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क्या दिल्ली सरकार के इस फैसले से सेकेंड हैंड कार खरीदना सस्ता हो जाएगा?

हालांकि एक्सपर्ट कह रहे कि पुरानी कार रखने वालों के लिए ये फैसला अन्याय है.

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सांकेतिक फोटो : इंडिया टुडे
दिल्ली सरकार 1 जनवरी 2022 से 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने जा रही है. हालांकि गाड़ी मालिक उन्हें दूसरे राज्यों में ट्रांसफर करवाना चाहें तो उन्हें NOC जारी किया जाएगा, ताकि दूसरी जगह इन वाहनों का फिर से रजिस्ट्रेशन करवाया जा सके. दिल्ली परिवहन विभाग ने इस मामले में 14 दिसंबर को आदेश जारी किया था. लेकिन इससे जुड़ी खबरें अब आई हैं. इस आदेश के मुताबिक, ऐसे डीजल वाहनों के लिए कोई NOC जारी नहीं किया जाएगा जो 15 साल या उससे ज्यादा पुराने हैं.
इसी बहाने हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि दिल्ली सरकार के इस फैसले से सेंकड हैंड गाड़ियों के बिजनेस पर क्या असर पड़ेगा? लेकिन उससे पहले जानते हैं कि दिल्ली परिवहन विभाग के आदेश में है क्या? दिल्ली परिवहन विभाग के आदेश में क्या है? #15 साल या उससे ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ियों के लिए NOC जारी नहीं किया जाएगा.
#10 साल तक पुरानी डीजल और 15 साल से कम पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के लिए देश में किसी भी जगह के लिए NOC जारी किया जाएगा.
#10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ले जाने के लिए कुछ शर्तों के साथ NOC जारी किया जाएगा. लेकिन उन जगहों के लिए NOC जारी नहीं किया जाएगा जहां NGT ने बैन लगाया है.
#10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों को अपनी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कंवर्ट कराने का विकल्प मिलेगा. लेकिन सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त रेट्रोफिटेड कंपनियों से ही किट लगवानी होगी.
# ऐसे वाहन जिन्हें नियमों के अनुसार दूसरे राज्यों में री-रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जा सकता, उन्हें स्क्रैप पॉलिसी के अनुसार स्क्रैप कराना होगा.
Cars (सांकेतिक फोटो-आजतक)
किन जगहों के लिए जारी हो सकता है NOC? दिल्ली परिवहन विभाग के आदेश में ये भी बताया गया है कि किन जगहों के लिए 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल व्हीकल्स के लिए NOC जारी किया जा सकता है.
# राजस्थान- 15 साल पुरानी डीजल गाड़ी को राजस्थान के किसी भी जिले के लिए NOC जारी नहीं किया जाएगा. लेकिन 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों के लिए NOC जारी किया जा सकता है.
#हिमाचल प्रदेश- यहां के किसी भी जिले के लिए 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों को NOC जारी नहीं किया जा सकता है.
# बिहार के इन जिलों के लिए NOC जारी किया जा सकता है- अरवल, शिवहर, लखीसराय, शेखपुरा, बांका, जहानाबाद, जमुई, कैमूर, नवादा, मधेपुरा, सुपौल, खगड़िया, बक्सर, मुंगेर सहरसा, अररिया, किशनगंज और औरंगाबाद
बिहार के इन जिलों के लिए NOC जारी नहीं किया जा सकता- पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भोजपुर (आरा), छपरा, मोतीहारी, दरभंगा, बेगुसराय, भागलपुर, पुरनिया, नालांदा, बेतिया, रोहतास, गोपालगंज, सिवान, सीतामढ़ी, वैशाली, मधुबनी, समस्तीपुर कटिहार,
#महाराष्ट्र- महाराष्ट्र के इन शहरों के अलावा अन्य जगहों के लिए NOC जारी किया जा सकता है- मुंबई, थाणे, मीरा भायंदर, नवी मुंबई, कल्याण डोंवीवली, उल्हासनगर, भिवंडी, वसई विरार, पुणे, पिंपरी-छिंदवाड़, कोल्हापुर, सांगली मिराज, सोलापुर, आंबेडकर नगर, नासिक, मालेगांव, जलगांव, धुले, औरंगाबाद, नांदेड़, परभणी सिटी, लातुर, अकोला, अमरावती, नागपुर, चंदरपुर.
#उत्तर प्रदेश- वहीं यूपी में इन 33 जगहों के लिए NOC जारी किया जा सकता है- इटावा, संत कबीरनगर, आंबेडकरनगर, कुशीनगर, फ़र्रूख़ाबाद, जौनपुर, कन्नौज, बलिया, सुलतानपुर, गाजीपुर, मैनपुरी, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, औरया, सोनभद्र, फतेहपुर, पिलीभीत, शाहजाहांपुर, लखीमपुर, बंदायू, बलरामपुर, हरदोई, बहराइच, उरई, ऐटा, काशिमनगर, महोबा, ललितपुर, चित्रकुट, हमीरपुर, अमेठी.
#पश्चिम बंगाल- यहां राजधानी कोलकाता में केवल BS-IV मानक वाली गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है. कोलकाता के बाहर BS-IV के अलावा BS-III मानक वाली गाड़ियों का भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है.
मेघालय- यहां 15 साल पुरानी गाड़ियों के लिए NOC जारी किया जा सकता है. सेकेंड हैंड गाड़ियों के बिजनेस पर क्या असर होगा? दिल्ली सरकार कह रही है कि आप 1 जनवरी, 2022 से राजधानी में 10 साल पुरानी गाड़ियों को नहीं चला पाएंगे. सरकार डीजल गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर देगी. हालांकि सरकार ये भी कह रही है कि अगर आपके पास 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी है तो उसे दूसरे राज्यों में ट्रांसफर करवा सकते हैं. इसके लिए हम NOC जारी कर देंगे.
अगर आप यूपी या बिहार के किसी जिले से हैं तो आपने अपने जिले में दिल्ली नंबर वाली सेकेंड हैंड गाड़ियों को देखा होगा. लंबे समय से लोग दिल्ली से गाड़ी खरीदकर इन जिलों में चलाते हैं. आमतौर पर शादी ब्याह में इस तरह की गाड़ियां बुकिंग के लिए यूज की जाती हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से कई ऐसी कंपनियां मार्केट में आई हैं जो लोगों से सेकेंड हैंड कार खरीदती और बेचती हैं.
दिल्ली सरकार के आदेश के बाद अब कहा जा रहा है कि जिनके पास 10 साल पुरानी डीजल वाली गाड़ियां हैं, उन्हें घाटा होगा. उनके पास ये रास्ता होगा कि या तो वो अपनी गाड़ी को इलेक्ट्रिक में कंवर्ट कराएं या फिर उसे दूसरे राज्यों में बेच दें. अब जब कोई चीज मजबूरी में बेची जाती है तो उसकी कीमत भी औने-पौने लगती है. ऐसे में गाड़ी बेचने वाले को घाटा हो सकता है. वहीं दिल्ली के बाहर के लोगों के लिए एक मौका हो सकता है कम दाम में गाड़ी खरीदने का.
दिल्ली में सेकेंड हैंड गाड़ियों का कारोबार करने वाले 'बाबा कार बाजार' से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया,
हमारे पास हर तरह के मॉडल की गाड़ियां बिकती हैं. वो चाहे 9-10 मॉडल हो या 11,12 मॉडल. हमारे यहां हर तरह की गाड़ियां बिकती हैं. महीने की 50-60 गाड़ियां बेचते हैं. इनमें से ज्यादातर डीजल गाड़ियां ही होती हैं. भले ही सरकार ने 1 जनवरी की डेट दी है, लेकिन ये फैसला कब लागू होगा देखना होगा. मुझे नहीं लगता कि इससे हमारे गाड़ियों के सेकेंड हैंड बिजनेस पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा.
हालांकि ऑटो एक्सपर्ट इससे अलग राय रखते हैं. ऑटो सेक्टर के एक जानकार रोनोजॉय मुखर्जी का कहना है,
सेकेंड हैंड कारें आजकल वैसे ही ज्यादा बिक रही हैं, क्योंकि नई गाड़ियों का प्रोडक्शन, चिप की वजह से प्रभावित है. लोगों को लंबी वेटिंग मिल रही है. ऐसे में सेकेंड हैंड कारों का मार्केट वैसे ही अप है. सरकार के इस फैसले से लोगों के पास कोई चारा नहीं होगा. ऐसे में दिल्ली के लोगों को गाड़ियां दूसरे राज्यों में बेचनी पड़ेंगी. इससे सेकेंड हैंड कारों का मार्केट और बढ़ेगा.
वहीं ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन ने सरकार के फैसले पर थोड़ी हैरानी जताई. कहा,
मुझे लगता है कि सरकार का ये फैसला अनफेयर है. क्योंकि 10 साल की बजाय सरकार को कार की फिटनेस को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए. अगर कार फिट है तो वो लंबे समय तक चल सकती है. फिर इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि उसने 10 साल पूरे कर लिए हैं. जो सरकारी कर्मचारी हैं या फौज में हैं, रिटायरमेंट के बाद गाड़ी खरीद लेते हैं. उनकी गाड़ियां बहुत कम चलती हैं. आज के टाइम मॉडर्न टेक्नोलॉजी की गाड़ियों का कुछ नहीं बिगड़ता दो-दो लाख किलोमीटर तक. ये (फैसला) प्रैक्टिकल नहीं है.
वहीं सेकेंड हैंड मार्केट को लेकर टूटू धवन का कहना है,
सेकेंड हैंड गाड़ियों के जो डीलर हैं, वो फटाफट गाड़ियां खरीदकर अपने कब्जे में ले लेंगे. NOC के लिए अल्पाई करके दूसरे राज्यों में भेज देंगे. इंवेस्टर्स के लिए और बिजनेस करने वालों के लिए ये शानदार मौका है. लेकिन 10 साल पुरानी गाड़ी मालिकों के साथ अन्याय है.
हालांकि अभी इस मामले में और क्लैरिटी आनी बाकी है. क्योंकि इतने कम समय में लोगों के लिए अपनी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कंवर्ट कराना प्रैक्टिकल नहीं है.

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