दीवाली के सप्ताह भर पहले ही दिल्ली सरकार चाईनीज पटाखे फोड़ने में लगी है. 11 टीमें बनाई गई हैं. चाईनीज पटाखों पर बैन लगाने के लिए. रेड मारी जा रही है. सामान जब्त हो रहा है. जनता में उधर अलग हाहाकार मचा हुआ है चाईनीज सामान का बॉयकाट करने का. चीन के पाकिस्तान पर रुख को लेकर देश की जनता में काफी नाराजगी है.
पर सरकार पटाखे क्यों बैन कर रही है?
चाईनीज पटाखों की कीमत कम होती है. पर उनमें पोटैशियम क्लोरेट होता है जो कि बहुत अनस्टेबल होता है. झटका पा के भी फूट सकता है. इसके केमिकल जहरीले होते हैं. टच में आने पर स्किन के रोग पैदा करते हैं. जिसको एलर्जी है उसके लिए ये कहर बन के आते हैं. हमारे इंडिया में जो पटाखे बनते हैं उनमें पोटैशियम या सोडियम नाइट्रेट होता है जो कि बड़ा सुस्त सा होता है. सेफ होता है. यही वजह है कि सरकार ने चाईनीज को बैन करने का फैसला किया है.
इंडिया में ये केमिकल इस्तेमाल क्यों नहीं होता?
1992 से ही क्लोरेट इंडिया में बैन है. सरकार के मुताबिक सिर्फ साइंस एक्सपेरिमेंट या किसी जरूरी चीज में ही इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. रेलवे के फॉग सिग्नल में इसका इस्तेमाल होता है. वो तो जरूरी चीज है. चाईनीज पटाखे 2013 में बैन हुए थे. वैसे तो सारे विदेशी पटाखे बैन हुए थे. पर चीन को सबसे ज्यादा घाटा हुआ था. क्योंकि चीन सबसे ज्यादा पटाखे बनाता है दुनिया में. और इनके कम दाम वाले पटाखे इंडिया ही आते हैं सबसे ज्यादा.
लेकिन चाईनीज पटाखों का मार्केट कैसे बन गया?
पोटैशियम क्लोरेट सस्ता है. पोटैशियम नाइट्रेट की तुलना में एक-तिहाई दाम है इसका. औऱ ये जलता बहुत तेज है. खूब रोशनी देता है. इसमें मेटल चूर्ण भी मिला दिया जाता है. वो जलता है तो रंग-बिरंगी रोशनी निकलती है. पटाखे बनाने वाले कहीं के हों पटाखों पर लिखते नहीं हैं कि क्या-क्या मिलाया गया है इसमें. फिर चाईनीज पटाखे स्मगलिंग से आते हैं. तो इनमें सल्फर और क्लोरेट की मात्रा का भी कोई हिसाब होता नहीं. ये प्रदूषण भी बहुत करते हैं. आंख वगैरह भी खराब कर देते हैं. सांस की दिक्कत, किडनी की समस्या सब हो जाती है. ऐसा नहीं है कि सारे चाईनीज पटाखे ऐसे ही होते हैं. पर स्मगल होने वाले पटाखे बढ़िया तो नहीं ही होते हैं. इसका कतई ये मतलब नहीं है कि इंडियन पटाखे बहुत बढ़िया हैं और खूब जलाये जाने चाहिेए. अभी कोल्लम में आग लगी थी ना. लोग मंदिर से निकल नहीं पाए. बम की तरह ब्लास्ट हुआ था. पटाखे कोई भी फोड़ो, प्रदूषण तो होता ही है. दिल्ली में तो दीवाली के बाद बुरा हाल हो जाता है.
-इंडियन एक्सप्रेस से