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देवियों-सज्जनों, दिल छोटा न करें, 3 मेडल तक आ सकते हैं

दीपा कर्मकार की हार से निराश होने की जरूरत नहीं है. उम्मीदों की फसल अब भी हरी है.

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फोटो - thelallantop
भारत ने इस बार पिछले ओलंपिक के करीब डेढ़ गुना बड़ा दल भेजा, लेकिन 9 दिन बाद भी झोली खाली है. कुल 119 खिलाड़ियों में से 32 हॉकी के थे. 18 पदक मुकाबलों में 12 निशानेबाज़. कुल 44 खिलाड़ी.
एथलेटिक्स में 19 पुरूष और 17 महिला, कुल 36 खिलाड़ी. इनमें कुछ के मुकाबले हो गए हैं कुछ के होने वाले हैं. 44 जमा 36 यानी अब तक 80 खिलाड़ी.
भारत को ओलंपिक में हॉकी के बाद सबसे ज्यादा 6 पदक निशानेबाज़ी में मिले हैं. निशानेबाज़ी के सारे मुकाबले खत्म हो चुके हैं. तो वहां से पदक की कोई उम्मीद नहीं है.
पुरुष हॉकी टीम शानदार खेल के बावजूद सेमीफाइनल तक नहीं जा पाई और महिला हॉकी टीम के लिए 36 साल बाद ओलंपिक जाना ही एक बहुत बड़ी बात थी.
एथलेटिक्स के 36 खिलाड़ियों से आप पदक की उम्मीद कर सकते हैं. किसी खिलाड़ी से पदक की बहुत ज्यादा उम्मीद दबाव में डाल देती है और उम्मीद ही न करना उसके खेल का अपमान है. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि एथलेटिक्स से पदक आने की उम्मीद न के बराबर है. हां, कोई रंजीत माहेश्वरी चमत्कारिक जंप ले ले या कोई शानदार दौड़ कर जाए तो अलग बात.
अब देखिए ओपी जईशा इतनी गरीब थीं कि उनको मिट्टी तक खानी पड़ी थी. दूध बेचकर जैसे-तैसे गुज़ारा किया. उनका मुकाबला सर्व-सुविधा संपन्न खिलाड़ियों से आप कैसे कर सकते हैं. हमारे एथलीट ओलंपिक गए ये बड़ी बात है.
ओपी जईशा.
ओपी जईशा.

टेनिस के 4 खिलाड़ी, टेबल-टेनिस के 4 खिलाड़ी, तीरंदाज़ी के 4 खिलाड़ी, तैराकी के 2 खिलाड़ी, 2 खिलाड़ी वेट लिफ्टिंग, 3 खिलाड़ी गोल्फ के यानी कुल 19 खिलाड़ी, अपना ओलंपिक सफर खत्म कर चुके हैं. 80 और 19 बराबर 99.
बैडमिंटन में कुल 6 खिलाड़ी गए थे. उनमें से पीवी सिंधू और के श्रीकांत बचे हैं. इनसे आप पदक की उम्मीद कर सकते हैं. पिछले 1-2 साल में कई दफा पीवी सिंधू सायना नेहवाल से भी बेहतर खेली हैं. श्रीकांत ने भी ओलंपिक मैच सीध सेटों में धमाकेदार ढंग से जीता. 99 और 6 बराबर 105.
PV सिंधू
PV सिंधू. Reuters
बॉक्सिंग में भारत के 3 खिलाड़ी ही जा पाए. भारत का बॉक्सिंग संघ नहीं है. होता तो 8-9 बॉक्सर चले जाते. इन 3 में सिर्फ विकास कृष्ण बचे हैं. विकास एकदम सफाई से खेल रहे हैं, पदक से 1 जीत दूर हैं. तो यहां आप पहला पदक गिन सकते हैं. 105 जमा 3 बराबर 108 खिलाड़ी.
नौकायन, जूडो और जिम्नास्टिक में भारत ने 1-1 खिलाड़ी भेजा. 108 और 3 ये कुल 111 खिलाड़ी.
अब 119 खिलाड़ियों में बचे सिर्फ 8 पहलवान – 5 पुरुष और 3 महिला. इनमें हरदीप और रविंदर खत्री ग्रीको-रोमन में हैं. इस वर्ग में भारत का कोई खिलाड़ी 12 साल बाद जा रहा है. हमारी अखाड़ों वाली कुश्ती फ्री-स्टाइल है. ग्रीको-रोमन में पदक की उम्मीद कुछ ज्यादा ही होगी.
बचे 6 पहलवान – 3 पुरूष, 3 महिला. इनमें योगेश्वर दत्त और विनेश से आप पदक की पूरी-पूरी आशा रख सकते हैं. योगेश्वर ने अपना टांगों वाला, चरखी वाला फितले दांव ऐसा बना लिया है जो एक बार लग गया तो अगला चित्त. विनेश 48 किलो वर्ग में दुनिया की सबसे अच्छी पहलवानों में से हैं.
योगेश्वर दत्त.
योगेश्वर दत्त.

ऐसा नहीं है कि बाकी बचे 4 पहलवान – नरसिंह, संदीप तोमर, बबीता और साक्षी पदक नहीं ला सकते. लेकिन सब पदक नहीं ला सकते. महिला कुश्ती में जापान, चीन से कड़ी टक्कर मिलेगी, वहीं पुरुषों में भूतपूर्व सोवियत देशों के पहलवानों से पार पा गए तो पदक है.
हम दो पदक कुश्ती से मान रहे हैं और एक ऊपर, कुल 3 पदक.
एथलेटिक्स या बैडमिंटन में कमाल हो जाए तो आंकड़ा ज्यादा से ज्यादा 4 जाएगा. 5 हो गया तो इसे भारत के रियो ओलंपिक का शानदार अंत कहा जाएगा.
इस बार हमें 10 पदकों की उम्मीद थी – 4 निशानेबाजी, 2 मुक्केबाजी+पहलवानी, 2 बैडमिंटन + टेनिस + तीरंदाजी + हॉकी, 2 बाकी खेलों में. लेकिन अब लग रहा है कि 3 से ही संतोष करना होगा.
अभिनव बिंद्रा, सानिया-बोपन्ना और भारतीय ओलंपिक खेलों की इस बार की प्रतीक बाला दीपा कर्माकर चौथे स्थान पर रहे. तीन पदक में से एक तो आता, किस्मत भी कुछ होती ही होगी !

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