ऐसा बहुत कम देखने में आता है कि कोई प्लेयर पहले इंडियन एयर फोर्स अपनी मैरिट पर जॉइन करे और फिर देश की क्रिकेट टीम में भी खेले. खास बात ये कि शिखा को किसी भी स्पोर्ट्स कोटे के तहत एयर फोर्स में नौकरी नहीं मिली, बल्कि वो खुद पढ़ने में इतनी अव्वल रही कि एयर फोर्स में इसी दम पर कमीशन हुई.
बात शिखा की क्रिकेट जर्नी पर चली तो बताया कि 5 साल की उम्र से बल्ला थाम लिया था. गली मोहल्ले में खूब खेलती थी. फिर पिता ने पढ़ाई के साथ बतौर हॉबी क्रिकेट खेलने के लिए मोटिवेट किया. पिता एक तरफ पढ़ाई के लिए पुश करते रहे क्योंकि वो खुद केंद्रीय विद्यालय में हिंदी के टीचर थे और दूसरी तरफ ग्राउंड पर कैच प्रैक्टिस के भी सेशन करवाते थे.

शिखा पांडे 2014 से इंडियन टीम का हिस्सा है.
अब गोवा में थीं तो वहां तो फुटबॉल ज्यादा पॉपुलर है, तो शिखा ने क्रिकेट कैसे खेलना शुरू कर दिया. इस पर शिखा ने बताया कि फुटबॉल तो वहां हर कोई खेलता है और एक दूसरे को भी फुटबॉल खेलने के लिए प्रेरित करते हैं. मगर मुझे तो क्रिकेट का कीड़ा पहले ही लग चुका था. सुबह सुबह उठ कर एशेज सीरिज देखती थी. फिर कभी श्रीनाथ की बॉलिंग तो कभी एंड्रयू फ्लिंनटॉफ का ऑलराउंडर गेम. यही नहीं मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगा साउथ अफ्रीका के शॉन पोलक का गेम. उन्हीं को देखकर मैंने क्रिकेट में ऑलराउंडर बनने की सोची. 1996 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान जयसूर्या और फिर शाहजाह में सचिन को जब खेलते हुए देख लिया, उसके बाद कुछ और नहीं सोच पाई. फिर तो क्रिकेट ही दिल दिमाग पर थी.
शिखा 27 साल की हैं और अब तब कई क्रिकेट रिकॉर्ड या तो अपने नाम कर चुकी हैं या फिर बड़े मौकों पर टीम का हिस्सा रही हैं. ऐसा ही एक रिकॉर्ड है एक वनडे मैच में 50 रन मारने और 3 विकेट लेने का रिकॉर्ड. ये किसी भी दूसरी महिला किक्रेटर के नाम नहीं है. यही नहीं शिखा 2014 में उस इंग्लैंड दौरे का भी हिस्सा थीं जिसने 8 साल बाद कोई टेस्ट मैच जीता था. वो भी उस टीम ने जिसके 11 में से 8 प्लेयर टेस्ट क्रिकेट का अपना पहला मैच खेल रहे थे. शिखा ने उस मैच में 28 रनों की पारी खेलत हुए विनिंग रन मारे थे.
एक और बात का बिंदास जवाब देते हुए इंडियन एयर फोर्स की ये फ्लाइट लेफ्टिनेंट बोली- आप सबको वीमन्स क्रिकेट भी देखनी चाहिए. जैसे इस बार वर्ल्ड कप के दौरान देखा. और हमेशा ये दिमाग में रखकर देखें कि मेन्स क्रिकेट और वीमन्स क्रिकेट दोनों अलग हैं. क्या कोई रोजर फेडरेर के खेल को इसलिए देखता है कि वो सेरेना के खेल से अच्छा है? हमें हर खेल को उसी फॉर्म में देखना होगा जिस फॉर्म में वो है.

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दिन भर चलता रहा लल्लनटॉप शो.
अब बारी आई सबसे जरुरी सवाल की. क्या महिला क्रिकेट में भी सलेजिंग होती है? और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में महिला टीम कैंप में क्या माहौल होता है? शिखा ने कहा कि सलेजिंग होती है मगर ज्यादा नहीं. हर कोई अपनी गेम पर ध्यान देता है. मगर हां जब मैच पाकिस्तान के खिलाफ होता है तो घर से भी फोन आता है कि कुछ भी हो जाए पाकिस्तान के खिलाफ तो जीतना ही है. खुद ड्रेसिंग रूम में भी माहौल एक्साइटमेंट वाला रहता है.
दर्शकों में से किसी ने पूछा कि लॉर्ड्स के मैदान पर खेलना कैसा लगा, इस पर शिखा ने एक किस्सा सुनाया. 2014 में हम जब इंग्लैंड गए थे तो वहां टेस्ट मैच के दौरान झूलन गोस्वामी ने यंग लड़कियों से कहा था- परेशान मत हो. हम लोग 2017 में यहां वर्ल्ड कप खेल रही होंगी. जब इस बार वर्ल्ड कप में हम सच में वहां खेल रही थीं तो झूलन को बुलाकर हमने याद दिलाया कि उनकी बात सही साबित हो गई.
शिखा पांडे के सेशन का वीडियो:










