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फिल्मकार को पीटकर कौन सा इतिहास बना रहे हैं इतिहासप्रेमी?

संजय लीला भंसाली से बड़ा फ़नी सवाल किया है करणी सेना ने कि क्या वो जर्मनी में हिटलर के खिलाफ फिल्म बना सकते हैं?

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फोटो - thelallantop
राजस्थान में बीकानेर के पास करणी माता का मंदिर है. ये चारण जाति की कुल देवी मानी जाती हैं. चारण, जो खुद कवि और कलाकार होते थे. राजपूत राजाओं के यहां आश्रय पाते थे और उनके लिए विरदावलियां लिखते थे. ये मंदिर वहां रहने वाले चूहों के लिए फेमस है. इन्हीं करणी माता के नाम पर करणी सेना बनी है. करणी माता के मंदिर में चूहों तक को आश्रय मिला है लेकिन माता के नाम पर चलने वाली सेना ने एक कलाकार को पीट दिया. भई फिल्म बनाने वाला भी तो कलाकार है. बस उसका कैनवस राजा के दरबार से काफी बड़ा है. कितना गजब का इत्तेफाक है कि करणी माता के एक भक्त हैं चारण जो खुद कलाकार हैं, दूसरे भक्त हैं करणी सैनिक जो कलाकारों को पीटते हैं. इल्जाम ये है कि संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म पद्मावती में इतिहास से छेड़छाड़ की है. अव्वल तो फिल्म आने से पहले उसमें इतिहास से छेड़छाड़ का पता लगा लेने वाले दूरदर्शी लोग मारपीट करके अपनी ऊर्जा क्यों बरबाद कर रहे हैं. सरकार इनको फ्यूचर प्लानिंग कमीशन का काम दे सकती है या वो आने वाली आपदाओं के बारे भविष्यवाणी भी कर सकते हैं. हां ये सच है कि फिल्म की कहानी का कुछ सुराग फिल्मकार फिल्म शुरू करते है फैला देते हैं लेकिन उसके पीछे स्ट्रैटजी कंट्रोवर्सी क्रिएट करने की नहीं होती. और संजय लीला भंसाली इतने बुद्धू नहीं हैं कि वो राजस्थान में राजपूत पॉलिटिक्स से पंगा लेने की कोशिश फिल्म बनाने से पहले ही कर लेंगे. क्या उन्होंने जोधा अकबर बनाने वाले आशुतोष गोवारिकर से कुछ भी न सीखा होगा? तो ये बात पक्की है कि करणी सेना के सैनिक सुपर पावर्स से लैस हैं. उनको आगा पीछा सब पता है. अब एक बहुत फ़नी बात दिखाते हैं. इसमें करणी सेना के फाउंडर लोकेंद्र बता रहे हैं कि क्या संजय लीला भंसाली जर्मनी जाकर हिटलर के खिलाफ फिल्म बना सकते हैं? ये फ़नी इसलिए है कि अपने इतिहास की जैसी जानकारी करणी सेना वालों को है वैसी ही जानकारी जर्मनी के वर्तमान की. भैया वहां हिटलर को लोग गाली देते हैं. कोई फिल्म बनाए, पोस्टर बनाए, कविता लिखे या कुछ भी करे, वहां मना नहीं किया जाता. नागरिक और कलाकारों के अधिकारों के लिए यूरोपीय देश वैसे ही ज्यादा डेमोक्रेटिक हैं. कहोगे कि वो तो भारत भी है. यहां फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेसन है. वो तो है ही लेकिन कानून भर से कुछ नहीं न होता. शासन के पास बात पहुंचने से पहले ही ये उत्पाती संगठन खुद फैसला कर लेते हैं. ऑन द स्पॉट. बिना पॉलिटिकल शह के ऐसा कहीं संभव नहीं है. तो प्लीज जर्मनी और हिटलर के बारे में बात न ही करें. क्योंकि जिनको अपना इतिहास नहीं पता वो दुनिया का कैसे जानेंगे. लेकिन बात उनकी भी सुननी चाहिए, तो सुन लो. https://www.youtube.com/watch?v=RAsEUHm3IYA
ये अपील कर रहे हैं तमाम संगठनों से कि जो कोई फिल्म बनाए उसको पीट दो. ऑन कैमरा. मतलब पुलिस वगैरह को फुल रिटायरमेंट दे दो. बॉर्डर पर से सेना भी बुला लो. अब तो शिवसेना वालों ने भी फिल्म वालों को हौंक दिया है. कि हिंदू राजा रानियों के इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. तो ये सरकारें कर क्या रही हैं? BSF, CRPF वगैरह पर कितना पैसा बरबाद होता है. फिर भी तेज बहादुर यादव जैसे लोग खराब खाने की शिकायत करते हैं. ये सब सेनाएं खत्म कर दो. करणी सेना और शिवसेना सब संभाल लेंगी. देश के अंदर भी सबको 'ठीक कर देंगी' और बाहर हाफिज सईद वगैरह से भी निपट लेंगी. उनको तो छूट भी देने की जरूरत नहीं है, वो उन्होंने पहले से हासिल कर रखी है.
फिल्म में अगर कुछ छेड़छाड़ की गई है या भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है(वैसे तो फिल्में बनती ही हैं भावनाओं से खेलने के लिए, चाहे वो वीरू राजू की सौदागर ही क्यों न हो) तो उसके लिए और तरीके हैं विरोध के. कोर्ट कचहरी में फंसा दो उनकी लाइफ घिस जाएगी. लेकिन नहीं. इनको अपने तरीके से निपटना आता है. किसी पुलिस कोर्ट कचहरी के तलबगार नहीं हैं. अब फिल्मकारों की जिम्मेदारी है कि वो फिल्म में तीन बार राष्ट्रगान बजवाएं, इतिहास भूगोल संस्कृत जैसे हाईस्कूल के सब्जेक्ट्स पर फिल्में न बनाएं. जहां कहीं भी फिल्म की शूटिंग के लिए जाएं वहां सरकार से अनुमति लेने के अलावा एक पीएसी बटालियन की छोटी छावनी साथ ले जाएं अपने मूवी क्रू के साथ उनका खर्चा दें और बिना धूम्रपान दारूपान गाली या किसी क्रिटिकल मुद्दे के सड़ी सी लव स्टोरी बनाकर रिलीज कर दें और अरविंद केजरीवाल से रिव्यू करा लें. फिर इन सेना वालों की भावनाएं भी नहीं आहत होंगी और फिल्म भी बन जाएगी. खैर प्रवचन सुनकर आप बोर हो गए होंगे इसलिए फिल्म इंडस्ट्री वालों के रिएक्शन भी पढ़ लो. सबसे पहले रामगोपाल वर्मा. इन्होंने पीएम को संबोधित करते हुए लिखा है कि भारत वापस बुरे दिनों की तरफ जा रहा है. rgv प्रीति जिंटा का कहना भी वही है जो लल्लन का कहना है. वायलेंस किसी भी तरह सही नहीं है. pri सोनम कपूर ने भी तकलीफ जताई है. sonam रिचा चड्ढा ने हमला करने वालों के लिए कायर लिखा है. देखो वो कहीं इतने बहादुर न हों कि इनको भी ट्रोल करने लगें. richa ऋषि कपूर ने करणी सेना की रेपुटेशन पर सवाल खड़े किए हैं. rishi इन सब बातों के बाद लल्लन भी कुछ पूछना चाहेगा सेना वालों से. कि सारा टाइम तो आपका मार पीट में निकल जाता है. इतिहास पढ़ने का टाइम कैसे निकालते हैं?
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