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जेपी नड्डा ने जो कहा, नरेंद्र मोदी खुद नहीं चाहेंगे कि वैसा रोज़ हो

भाजपा को अंतरराष्ट्रीय मीडिया का सुविधानुसार इस्तेमाल छोड़ना होगा.

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जेपी नड्डा भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष है, सदन के अंदर 'विदेशी' मीडिया की रिपोर्ट्स का ज़िक्र कर रहे थे.
11 दिसंबर को राज्यसभा में 'सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल' (CAB) पेश हुआ. बहस के दौरान बोलने के लिए खड़े हुए जे पी नड्डा. BJP के कार्यकारी अध्यक्ष. राज्यसभा सांसद. नड्डा अपने भाषण में बता रहे थे कि CAB क्यों ज़रूरी था. उन्होंने विभाजन का ज़िक्र किया. भारत और पाकिस्तान में कौन-कौन से समुदाय अल्पसंख्यक थे, ये गिनाया. नेहरू-लियाकत पैक्ट का ज़िक्र किया. उसकी असफलता गिनाई. और फिर इस ज़िक्र पर आए कि पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश में किस तरह हिंदुओं, सिखों, पारसियों, जैनों, बौद्धों और ईसाईयों पर अत्याचार हुए. ये सब CAB के समर्थन में तर्क थे. नड्डा अपनी बातों के समर्थन में तीन इंटरनैशनल मीडिया रिपोर्ट्स लाए नड्डा चाहते थे कि उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाए. उसे बस 'BJP' या 'मोदी सरकार' की कही बात न समझा जाए. सो वैलिडेशन के लिए नड्डा रेफरेंस लाए इंटरनैशनल मीडिया का. तीन मीडिया संस्थान- न्यू यॉर्क टाइम्स, गार्डियन और रॉयटर्स. नड्डा ने इन तीनों की एक-एक रिपोर्ट का ज़िक्र किया. इन रिपोर्ट्स की कुछ पंक्तियां पढ़कर सदन में सुनाईं. ये तीनों रिपोर्ट्स इस विषय की थीं कि किस तरह अफ़गानिस्तान में हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. किस तरह उनकी संख्या लगातार घटती जा रही है. किस तरह उन्हें उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया जा रहा है. इन रिपोर्ट्स का ज़िक्र करते हुए नड्डा के शब्द थे-
मैं बहुत से फ़ैक्ट ला सकता हूं. अब मैं अफ़गानिस्तान की बात करता हूं. मैं कुछ आपके सामने उद्धृत करुंगा, जो रिपोर्टिंग हुई है. न्यू यॉर्क टाइम्स 20 जनवरी, 2002 को कहता है- एव्री संडे इन द लेट आफ्टरनून द सिख्स ऐंड हिंदुज़ ऑफ काबुल, दोज़ फ्यू हू आर लेफ्ट, ट्रैवर्स अ सर्किट ऑफ सॉरो. लाइक फैमिली मेंबर्स विज़िटिंग अ ग्रेव, दे गो टू देअर रुइन्ड हाउसेज़ ऑफ वरशिप, स्टॉपिंग टू प्रे एट इच वन. द सिख ऐंड हिंदू पॉपुलेशन ऑफ अफगानिस्तान हैज़ रिड्यूस्ड ओवर द लास्ट डिकेड्स फ्रॉम फिफ्टी थाउज़ेंड इन अर्ली नाइंटी नाइंटीज़ टू 2,000 फीयर्ड टुडे.ये मेरी रिपोर्टिंग नहीं है, ये न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्टिंग है.
इसके बाद नड्डा ने 'द गार्डियन' की एक रिपोर्ट से कुछ पंक्तियां पढ़ी. जो अफगानिस्तान में रहने वाले एक सिख- गुलाब सिंह को लेकर लिखी गई थी. इस मंशा में कि कैसे वहां फिरौती के लिए सिखों को किडनैप करके मारा गया. इसके बाद बारी आई इंटरनैशनल न्यूज़ एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट की. इसमें काबुल के रहने वाले एक जगतार सिंह का ज़िक्र था. जिन्हें धर्म परिवतर्न न करने पर गला काटने की धमकी दी गई. नड्डा ने इन रिपोर्ट्स का ज़िक्र करने के बाद राज्यसभा में कहा-
मैं ये सारी रिपोर्टिंग यहां रख दूंगा, ताकि वो इस सभा सदन का पार्ट बन जाए. मैं भावनाओं को, उत्तेजनाओं को बढ़ाना नहीं चाहता, बस कुछ फैक्ट्स रखना चाहता था कि कैसे इन देशों में माइनॉरिटीज़ के साथ सलूक किया गया.
इसी बैकग्राउंडर से दी लल्लनटॉप की रिपोर्ट शुरू होती है. नड्डा सांसद हैं. सत्तारूढ़ पार्टी के मौजूदा अध्यक्ष हैं. मंत्री रहे हैं. सत्ता का हिस्सा हैं. वो सत्ता, जिसके कई फ़ैसलों और नीतियों पर इंटरनैशनल मीडिया लगातार लिख रहा है. जैसे- कश्मीर. NRC. और ताज़ा ज़िक्र- नागरिक संशोधन बिल, 2019. हमने इन्हीं तीनों- न्यू यॉर्क टाइम्स, गार्डियन और रॉयटर्स की कुछ ख़बरें निकाली हैं. पांच साल का एक कार्यकाल पूरा कर दूसरे कार्यकाल में चल रही मोदी सरकार को लेकर वैसे तो इंटरनैशनल मीडिया (इन तीनों समेत) में काफी कुछ लिखा गया. मगर पुराना बताने लगेंगे, तो स्टोरी फैल जाएगी. इसीलिए हम जिन रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट यहां लगा रहे हैं, वो इन तीन मुद्दों से ही जुड़ी हैं- कश्मीर, NRC और CAB 2019. पहले CAB 2019 पर हुई कुछ रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट्स देखिए- 1. न्यू यॉर्क टाइम्स- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी हैं अमित शाह, जिनकी हिंदू-राष्ट्रवादी सरकार के बारे में आलोचक कहते हैं कि ये भारतीय लोकतंत्र की धर्मनिरपेक्ष बुनायादों को कमज़ोर करने का अजेंडा चला रही है. Nyt Cab 2. न्यू यॉर्क टाइम्स- भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार (11 दिसंबर, 2019) को टीवी चैनलों को निर्देश दिया कि वो पूर्वोत्तर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों या किसी भी तरह के 'ऐंटी-नैशनल' कंटेट को न दिखाएं. आलोचकों का कहना है कि ये सरकार द्वारा विपक्ष को दबाने की कोशिश का हिस्सा है. ये आदेश ऐसे में आया है जब ऊपरी सदन में विपक्ष के नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह को सवाल पूछ-पूछकर तंग कर दिया और इसका लाइव फीड राज्यसभा टीवी ने काट दिया. Nyt Cab Bill   3. न्यू यॉर्क टाइम्स- भारत उस दिशा में बढ़ रहा है, जहां मुस्लिमों के लिए उसका नागरिक हो पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा. इमिग्रेंट्स के लिए रिलिजियस टेस्ट का प्रावधान करने वाले एक बिल को संसद के निचले सदन ने पास कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हिंदू-राष्ट्रवादी अजेंडा के लिए ये बहुत बड़ा कदम है. Nyt Cab Bill 2   4. न्यू यॉर्क टाइम्स-  भारतीय संसद ने विभाजनकारी नागरिकता बिल को पास किया, बिल क़ानून बनने के और करीब पहुंचा. भारतीय संसद के ऊपरी सदन ने बुधवार को एक विवादास्पद नागरिकता बिल को मंज़ूरी दे दी. इससे धार्मिक तौर पर ध्रुवीकरण करने वाला ये बिल क़ानून बनने के एक कदम और करीब पहुंच गया. जबकि देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. Nyt Cab 5 5. रॉयटर्स- भारत के राष्ट्रपति ने विरोध प्रदर्शनों की अनदेखी करते हुए 'सिटिज़नशिप बिल' पर दस्तख़त करके उसे क़ानून की शक्ल दे दी. Cab 2019 Reuters 6. रॉयटर्स- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार Reuters Cab 2019 7. गार्डियन- मुस्लिमों के साथ पक्षपातपूर्ण भारतीय नागरिकता क़ानून पास हुआ Guardian Cab Bill 1   अब NRC पर कुछ रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट्स देखिए- 1. न्यू यॉर्क टाइम्स- मोदी की भारतीय जनता पार्टी, जो कि पूरे भारत के लिए हिंदू सर्वोच्चतावादी अजेंडा लागू करने की कोशिश कर रही है, बहुत अधीरता के साथ इस नागरिकता की बहस में कूद गई है. उसने ऐंटी-इमिग्रेंट भावनाओं को भड़काया है और इसे साफ़तौर पर मुस्लिम-विरोधी झुकाव के साथ किया गया है. जिस तरह दुनियाभर में दक्षिणपंथी संगठनों ने माइग्रेंट्स का शैतानीकरण किया, वैसा ही BJP के लोग भी कर रहे हैं. भारत के गृहमंत्री अमित शाह कई बार बांग्लादेश से आए माइग्रेंट्स को 'दीमक' बुला चुके हैं. Nyt Nrc 2   2. न्यू यॉर्क टाइम्स- अपने ही लोगों को बेवतन क्यों कर रहा है भारत? लगता है कि देश के मुस्लिमों का दमन करने में मोदी सरकार यहीं नहीं रुकेगी. Nyt Nrc 3 3. न्यू यॉर्क टाइम्स- भारत में 40 लाख से ज़्यादा लोगों, ज़्यादातर मुसलमान, के सामने विदेशी घुसपैठिया ठहरा दिए जाने का जोख़िम पैदा हो गया है. सरकार जिस तरह अपने कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी अजेंडे को थोप रही है, उसने भारत की विविधता वाली संस्कृति और अनेकता में एकता की परंपरा को चुनौती दी है. इसका मकसद है भारतीय होने की पहचान को बदलना, इसे अलग तरह से परिभाषित करना. Nyt Nrc 4   5. गार्डियन- 'वो हमें जेल में बंद कर देंगे या हमारी हत्या कर देंगे': पश्चिम बंगाल के मुसलमान डरे हुए हैं. Guardian Nrc   6. गार्डियन- मौजूदा हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के कार्यकाल में NRC का एक ख़ास धार्मिक चेहरा है. भारत के गृहमंत्री एक विवादित सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल लाए हैं. इसके तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के वे लोग जो भारत में आकर बस गए हैं और उनके पास पहचान और निवास से जुड़ा कोई कागज़ात भी नहीं है, उन्हें भारत में रहने दिया जाएगा. मगर मुस्लिमों को ये मौका नहीं मिल सकेगा. Guardian Nrc 2 7. गार्डियन- असम में हो रही एक बेहद क्रूर प्रक्रिया ने लोगों को भारत के साथ अपना 'सच्चा' रिश्ता साबित करने और ऐसा न कर पाने पर अवैध इमिग्रेंट्स ठहरा दिए जाने के लिए मज़बूर कर दिया है. Guardian Nrc 4   अब देखिए इन तीनों जगहों पर कश्मीर के ऊपर हुई कुछ रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट्स- 1. न्यू यॉर्क टाइम्स- कुछ विश्लेषक समय के चुनाव पर शंकित हैं. पिछले कुछ हफ़्तों से कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोज़गारी के मुद्दे पर मोदी सरकार की काफी आलोचना हो रही थी. (आर्टिकल 370 निष्क्रिय किए जाने की टाइमिंग पर) Kashmir Nyt 2. न्यू यॉर्क टाइम्स- भारत सरकार को पता है कि उसका उठाया कदम कितना विस्फोटक है. इसीलिए, सोमवार को ऐलान करने से पहले, कश्मीर में दसियों हज़ार अतिरिक्त ट्रूप्स भेजे जाने का आदेश दिया गया. बड़े नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया. पर्यटकों को कश्मीर से चले जाने के लिए कहा गया. स्कूल बंद कर दिए गए. इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं. Kashmir Nyt 2 3. न्यू यॉर्क टाइम्स- अख़बारों में चुप्पी थी. इसने ये नहीं बताया कि 17 साल के क़ासिब अल्ताफ़ को जब श्रीनगर के एक पुल पर सैनिकों ने घेर लिया, तो वो झेलम नदी में कूद पड़ा और मर गया. 2,000 लोगों पर बिना कोई आरोप तय किए उन्हें जेल में डाल दिया गया. उनमें से एक, मेरे अंकल, कश्मीर में नहीं बल्कि आगरा की एक जेल के अंदर बंद थे. ये अख़बार ये भी हिसाब नहीं रख सकेगा कि आने वाले दिनों में पैलेट गन और आंसू गैस से 152 लोग घायल होंगे. Kashmir Nyt 3   4. न्यू यॉर्क टाइम्स- पूछताछ के लिए पकड़े गए लोग अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाए. न ही वकील से ही मिल सके. वो कहां हैं, ये किसी को नहीं मालूम. चश्मदीदों के मुताबिक, ज़्यादातर को आधी रात में पकड़कर ले जाया गया. Kashmir Nyt4   5. न्यू यॉर्क टाइम्स- कश्मीर में बढ़ता गुस्सा और बढ़ती मुसीबतें Kashmir Nyt 5   6. न्यू यॉर्क टाइम्स- यूरोपियन पार्लियामेंट के दक्षिणपंथी झुकाव वाले सांसदों के कश्मीर जाने पर लिखी गई रिपोर्ट. जिसमें कहा गया है कि महीनों से पत्रकारों, भारतीय सांसदों और एक अमेरिकी सेनेटर को कश्मीर नहीं जाने दिया गया. मगर भारत सरकार ने EU के प्रतिनिधिमंडल, जिसमें ज़्यादातर दक्षिणपंथी धड़े से जुड़े सदस्य हैं, को कश्मीर जाने की परमिशन दे दी. ये सांसद ऐंटी इमिग्रेशन पार्टियों का प्रतिनिधत्व करते हैं. ऐसी पार्टियां, जिनका मुस्लिमों के विरोध में बोलने का अतीत रहा है. Kashmir Nyt 6   7. न्यू यॉर्क टाइम्स- कश्मीर में मौत से जंग चल रही है. बीमार पड़ने पर डॉक्टर बुलाने का भी कोई ज़रिया नहीं.  Kashmir Nyt 7   8. न्यू यॉर्क टाइम्स- डेढ़ लाख कश्मीरी बच्चे अब भी स्कूलों से बाहर. बाहर सैनिकों और चरमपंथियों ने अपने दावे ठोक लिए हैं और ज़्यादातर स्कूल बंद हैं, ऐसे में कश्मीर के अंदर महीनों से चले आ रहे संकट के कारण शिक्षा लगभग होल्ड पर चली गई है. Kashmir Nyt 8     9. रॉयटर्स: मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्ज़ा छीने जाने के फैसले का विरोध करने के लिए शुक्रवार को श्रीनगर में जमा हुए कम-से-कम 10 हज़ार लोगों को हटाने के लिए भारत की पुलिस ने आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया. (इस ख़बर का खंडन किया था भारत सरकार ने) Kashmir Reuters 2   10. गार्डियन: कश्मीरी परिवार ख़ौफ़ में जी रहे हैं. उनके अपने घर से दूर हिरासत में बंद हैं. रिश्तेदारों ने आगरा पहुंचने की हज़ार किलोमीटर की बस यात्रा के बारे में बताया. वो जगह, जहां 'मोदी क्रैकडाउन' के बाद कैदियों को बंद रखा गया है. Kashmir Guardian इसके अलावा बालाकोट एयरस्ट्राइक पर हुई इंटरनैशनल मीडिया की रिपोर्टिंग्स भी बहुत पुरानी नहीं हैं. रॉयटर्स की कुछ रिपोर्ट्स देखिए. इनमें बालाकोट स्ट्राइक पर किए गए भारत के दावों पर संशय जताया गया था. स्क्रीनशॉट्स देखिए- 1. रॉयटर्स की ये ख़बर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए.  Balakot Strike   2. इस ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए.  Balakot Strike Reuters ये उन्हीं मीडिया ऑर्गनाइज़ेशन्स की रिपोर्ट्स हैं, जिसका ज़िक्र जे पी नड्डा ने राज्यसभा में किया. जिनकी अफ़गानिस्तान में अल्पसंख्यकों से जुड़ी रिपोर्टिंग को उन्होंने सदन की कार्रवाई का हिस्सा बनाया. हम ये नहीं कह रहे कि अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को टारगेट नहीं किया जाता. हम बस ये नोटिस कर रहे हैं कि अपनी आलोचना होने, ख़ुद पर सवाल उठने, अपनी नीतियों पर उंगलियां उठने की स्थिति में मोदी सरकार और BJP इंटरनैशनल रिपोर्ट्स को सिरे से ख़ारिज़ कर देती है. ज़्यादातर आंतरिक मसलों के नाम पर. क्या ये सहूलियत की चीज है? अपने स्टैंड के मुताबिक जाए, तो संसद में इंटरनैशनल मीडिया को कोट करें. उन रिपोर्ट्स के माध्यम से अपनी कही बात को सही बताएं. मगर जब ख़ुद के स्टैंड से मेल न खाए या अपने पर सवाल आए, तो उन्हीं अख़बारों/वेबसाइट्स/चैनलों के रिपोर्ट्स को ख़ारिज़ कर दें. ऐसा करके सरकार आलोचनाओं और सवालों के प्रति अपनी असहनशीलता दिखाती है. और अपनी मंशाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए जाने का मौका देती है. राजनीति करना विशुद्ध सहूलियत की चीज हो सकती है. बल्कि होती है. मौक़ापरस्ती भी होती है. लेकिन सरकार चलाना अलग ही बात है. मतलब, अलग ही बात होनी चाहिए.
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