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बस मां ही नहीं सीने से लगाकर दूध पिलाती है, बाप भी कर सकता है ये काम

एक टीवी चैनल नया सीरियल दिखाने जा रहा है. इसमें दिखाया गया बाप आपकी सोच से अलग है.

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औरतें ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं. सब जानते हैं. बावजूद इसके एक बच्चे को दूध पिलाती मां की तस्वीर हमें सामाजिक तौर पर असहज कर देती है. सार्वजनिक जगहों पर कोई औरत ऐसा करते दिखे, तो 10 में से लगभग 7 लोग उसे पलटकर देखेंगे (फोटो: स्टार प्लस)
मां में ममता होती है. बाप राह दिखाता है. मां लाड़ करती है. बाप अनुशासन सिखाता है.
ये कुछ अतिरेक बातें हैं. जबर्दस्ती हमारे दिमाग में ठूंस दी गई हैं. मान ली गई हैं कि ऐसा ही होता आया है. आगे भी ऐसा ही होता रहेगा. मां ऐसी होती है. ऐसी ही रहेगी. बाप वैसा होता है. वैसा ही रहेगा. इससे अलग हो ही नहीं सकता. सिनेमा और टीवी इस गलतफहमी की इमारत पर और मंजिलें चढ़ाते रहते हैं. फर्जीवाड़ा मचाते हैं. कुछ अलग दिखाने की हिम्मत भी नहीं करते. लकीर के फकीर बने रहते हैं. किसी ने लकीर खींच दी. उसी पर चलते हुए घिसे जा रहे हैं. लेकिन. ये 'लेकिन' ही है आज की हमारी स्टोरी. टीवी पर एक नया सीरियल आने वाला है. इसने बाप के किरदार को जिस तरह पेश किया है, वैसा बाप देखने की हमारी-आपकी आदत ही नहीं है.
हमारे यहां मां और बाप का किरदार तय रहता है. हमारे दिमाग के अंदर भी इसे लेकर बहुत कट्टरता है. हम मां और बाप को किसी और रूप में देख ही नहीं पाते.
हमारे यहां मां और बाप का किरदार तय रहता है. हमारे दिमाग के अंदर भी इसे लेकर बहुत कट्टरता है. हम मां और बाप को किसी और रूप में देख ही नहीं पाते (तस्वीर: स्टार प्लस)

बाप की कोशिश है कि बच्ची को ब्रेस्टफीड जैसा महसूस हो स्टार प्लस पर एक नया सीरियल शुरू होने जा रहा है. इक्यावन. इसका एक प्रोमो आया. देखने से लगता है, जैसे किसी बाप-बेटी की कहानी हो. मां नजर नहीं आती कहीं. बाप ही दिखता है. देखकर लगता है जैसे सिंगल बाप हो. अकेला बच्ची की परवरिश कर रहा हो. प्रोमो की शुरुआत में किसी घर का दरवाजा दिखता है. फिर एक कमरा. कमरे में पलंग. उस पर बैठा हुआ एक शख्स. ये बाप है. गोद में है एक छोटी सी बच्ची. बच्ची रो रही है. भूखी है. बाप के चेहरे पर घबराहट है. बच्ची को चुप कराने की कोशिश कर रहा है. उस शख्स के साथ दो और लोग हैं. दोनों मर्द. जवान उम्र के. उनमें से एक दूध की बोतल पकड़ाता है. बाप को. वो थोड़ा झिझकते हुए बोतल पकड़ता है. उसे अपने बगल में दबा लेता है. कांख के नीचे. बोतल का निप्पल बगल से बाहर झांक रहा है. बैठा हुआ है, सो वो निप्पल उसके सीने के पास ठहर गया है. वहां, जहां पर स्तन होता है. फिर वो बाप निप्पल बच्ची के मुंह में लगा देता है. बच्ची रोना भूलकर दूध पीने लगती है.
मुझे तो नहीं याद आता कि इससे पहले कभी बाप को इस अंदाज से दिखाने की कोशिश की गई हो. ने केवल ये परंपरा से अलग है, बल्कि हमारे दिमाग में जम चुकी बाप की छवि से भी बिल्कुल अलग है.
मुझे तो नहीं याद आता कि इससे पहले कभी बाप को इस अंदाज से दिखाने की कोशिश की गई हो. न केवल ये परंपरा से अलग है, बल्कि हमारे दिमाग में जम चुकी बाप की छवि से भी बिल्कुल अलग है (तस्वीर: स्टार प्लस)

ब्रेस्टफीडिंग देखने की आदत कहां है हमको ये अलग सोच है. वो लेकिन है, जिसकी हम ऊपर बात कर रहे थे. मां दूध पिलाती है, सब जानते हैं. मगर उसे दूध पिलाते हुए दिखाना नॉर्मल नहीं माना जाता. ब्रेस्टफीडिंग को कैमरे पर दिखाना सहज नहीं माना जाता. ऐसा इसलिए कि देखनेवाले इसे देखकर सामान्य महसूस नहीं करते. इंस्टाग्राम जितना फैशनेबल और आधुनिक प्लेटफॉर्म भी ब्रेस्टफीडिंग की तस्वीरें हटा देता है. ऐसे में जब कोई सीरियल एक बाप को इस तरह पेश करे, तो चर्चा होनी चाहिए. उसके पास स्तन नहीं हैं. ब्रेस्टफीड नहीं करा सकता वो. फिर भी कोशिश कर रहा है. इस तरह. यहां तो कभी औरत को दूध पिलाते हुए दिखाना पड़े, तो पूरा आंचल-घूंघट डाल देते हैं. या फिर, एकदम सेक्स सायरन बनाकर परोस देते हैं. नॉर्मल दिखाते ही नहीं.

बदलाव की कोशिश तो है ही हम ये नहीं कहेंगे कि वो मां बन रहा है. बाप ही है वो. उसका बाप होना बच्चे की देख-भाल और उसकी परवरिश करने में आड़े नहीं आ रहा. ऐसे दृश्य दिखाए जाने चाहिए. ताकि नजरिया बदले. लोग जानें कि बाप भी बच्चे की परवरिश कर सकता है. जैसे मां करती है. उसको दूध पिला सकता है. खिला सकता है. नहला सकता है. मालिश कर सकता है डायपर बदल सकता है. बच्चा पालने वाले का कोई किरदार तय नहीं होता. कि मां ही पाल सकती है. मां को ही पालना चाहिए. ब्रेस्टफीडिंग को छोड़ दें, तो जो चीजें मां करती है, वो सब बाप भी कर सकता है. सीरियल में आगे क्या दिखाएंगे, क्या कहानी होगी, ये सब बात की बातें हैं. फिलहाल जो मायने रखता है, वो है बदलाव. वरना मां को किस अंदाज में पेश किया जाता है, ये हम जानते हैं. बच्चे के पीछे खाना लेकर भागती मां. बच्चे का टिफिन पैक करती मां. बच्चे को तैयार करती मां. बच्चे के बाल संवारती मां. ऐसे में एक बाप को इस अंदाज में दिखाकर इस सीरियल ने बदलाव की कोशिश तो की ही है.


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