हमारे यहां मर्द का कॉन्ट्रासेप्टिव इस्तेमाल करना उसकी मर्दानगी को कम कर देता है, ऐसा उसे लगता है. जैसे उसके पौरुष का प्रमाण औरत की योनी में अपना वीर्य गिराकर ही मिलेगा. अपने 'मजे', 'सुविधा' और 'मैं तो मर्द हूं' वाले ईगो के चलते जब पुरुष बर्थ कंट्रोल की ओर कोई भी कदम नहीं बढ़ाते, तो ये काम औरतों को करना पड़ता है.
'रोज एक गोली लीजिए, अनचाहे गर्भ से बचिए'
ये ऐड हमने तबसे देखे हैं, जब इन्हें देखकर अपराधबोध सा होता था. जब इनके आने पर चैनल बदल दिया जाता था. पहले 'माला डी' और अब 'अनवॉन्टेड-21' के नाम से आने वाली ये गोलियां मेडिकल स्टोर पर हाथोहाथ बिकती हैं. टीवी पर इनके प्रचार आते हैं. औरतों को बताया जाता है कि जब तक प्रेगनेंसी से बचना हो, तब तक इनका कोर्स करें. यानी अगर शादी के दो साल तक बच्चे न करने हों या लगातार गैर-शादीशुदा सेक्स करना हो, तो इन गोलियों को लेते रहिये. महीने में 21, फिर 7 दिन का गैप. 29वें दिन से फिर शुरू.लेकिन इस भ्रम में न रहें कि ये गोलियां वही लड़कियां खा रही हैं जो रेगुलर सेक्स करती हैं. कई युवा या टीनेज लड़कियों को भी ये गोलियां लिखी जा रही हैं, उनकी पीरियड साइकल को कंट्रोल करने के लिए. या फिर उनके हॉर्मोन की समस्या को ठीक करने के लिए. ये कोर्स 3 महीने से एक साल का हो सकता है और लड़की के पीरियड रेगुलर न हों तो उससे भी ज्यादा.
गोली खाने में समस्या क्या है?
वजन बढ़ना और ब्रेस्ट में सूजन कुछ समस्याएं हैं, जो आपके दिख जाएंगी. लेकिन इन गोलियों का सबसे बड़ा साइड इफ़ेक्ट वो है, जो आपको दिखता नहीं. जो औरतों के दिमाग में धीरे-धीरे घर करता है. और आपको मालूम नहीं पड़ता कि कब वो अपने पांव इतने पसार चुका होता है कि औरतें सुसाइड तक करने की हद तक पहुंच जाती हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी. वो बीमारियां जो दिखती नहीं, पर औरतों के सामने मुंह बाए खड़ी हैं.जामा साईकैट्री की औरतों पर की गई एक रिसर्च पर नजर डालें, तो गर्भ रोकने की गोलियां लेने वाली औरतों को डिप्रेशन में जाने का खतरा हमेशा रहता है. जब कुछ औरतों को ये बताया गया चूंकि वो पिछले कुछ सालों से गोलियां ले ले रही हैं, उनका डिप्रेशन बढ़ा है, वो उछल पड़ीं. और कहने लगीं, 'आखिरकार साइंस ने इन दवाओं की समस्या खोज निकाली.'
हमारी औरतें खतरे में हैं
क्योंकि इन गोलियों के साथ-साथ और भी बहुत कुछ है, जो उन्हें दिमागी तौर पर परेशान करता है. पति का दबाव, घर चलाना, सास के ताने. और ये सब झेलते हुए कभी अपनी सेक्स लाइफ के बारे में किसी से ना कह पाना. जिस देश में लोग औरतों को लेकर इतने लापरवाह हों कि ब्रेस्ट कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पता चलते हों, वो उनकी मानसिक बीमारियों को क्या ही पकड़ पाएगा? जहां अगर औरत को बेटी पैदा हो जाए तो डिलीवरी के अगले ही दिन से उससे पोंछा लगवाने लगते हैं, जहां घरों में वो आखिर में पतीले में बचे-खुचे को लेकर खाने बैठती है, दाल ख़त्म हो जाती है तो तेल-नमक से चावल खा लेती है. जहां औरत का घी और फलों में हिस्सा नहीं होता, उस औरत के मन की बात कौन पूछेगा?और हमने अपनी औरतों को ऐसा बना दिया है, कि वो खुद ही परवाह नहीं करतीं. घर में पड़े सेब बच्चों को खिला देती हैं. घर में आया दूध बच्चों को पिला देती हैं. जिन औरतों को बचपन से ये सिखाया गया है कि उन्हें अपने नहीं, परिवार के लिए जीना है, उसके लिए हमेशा दुखी रहना कोई तनाव की बात नहीं है. अपने डिप्रेशन को वो अपनी नियति मानकर भोगती जाती हैं. जाने कितनी औरतें रोज रोते हुए सोती हैं.
पर समाज एक दिन में कैसे बदलेगा?
समाज का स्ट्रक्चर हम चुटकी में नहीं बदल सकते. पर कुछ फैसले जरूर ले सकते हैं. ऐसा नहीं है कि औरतें गर्भ निरोधक गोली न खाकर डिप्रेशन से बच जाएंगी. पर उनके डिप्रेस होने का रिस्क काफी हद तक घट सकता है. अगर पुरुष बस इतना समझ लें कि सिर्फ अपनी सुविधा, आलस और ईगो के चलते वो औरतों को डिप्रेशन में धकेल रहे हैं, तो शायद हमारी औरतें बच सकें. अगर हमारी औरतें ये तय कर लें कि उनके पति का कॉन्डम यूज करना उतनी ही उनकी जिम्मेदारी है, जितनी उनके पति की, तो शायद हमारी औरतें बच सकें.ये भी पढ़ें:
कॉन्डम की वजह से पिटती है दिल्ली की हर चौथी औरत
लाइव टीवी पर सेक्शुअल असॉल्ट! ये कैसा एंटरटेनमेंट है?
कॉन्डम के 10 ऐड, देखना बिल्कुल सेफ है...रेप करने के पहले वो औरत को पॉर्न क्यों दिखाते हैं?
कॉन्डम ने इंसान से लिया बेइज्जती का बदला!पॉर्न फिल्मों के वो 8 सीन जो आपको नहीं दिखाए जाते हैं
जब निर्विरोध निरोध का नाम रखा गया 'कंडोम'
पता चल गया 'दुनिया की बेस्ट' पॉर्न मूवी कौन सी है!
सारे घोंचू आज 'रेप' और 'सेक्स' का फर्क समझ लें
शर्मनाक: वो जगह, जहां 2 लाख मर्द एक साथ रेप करते हैं
पॉर्न स्टार्स के 'गंधैले' फैन्स की अनसुनी कहानियां










