1. करुआ तेल
पहला गाना है 'करुआ तेल'. इसमें बोला जा रहा है कि करुआ तेल का दीप जलाकर स्वेदेशी का रेलम रेल कर दो. और विदेशी सामानों का खेलम खेल. करुआ तेल बोले तो सरसों का तेल. जब बाजार में चाइना का झाल-माल नहीं था तो लोग दिये और मोमबत्ती से अपने-अपने घरों को जगमगाते थे. पर फिर एक दिन चाइनीज झालर आया और सब बहा ले गया. अच्छी बात ये हैं कि लोग आज भी गांवों में दिये ही जलाते हैं. सदियों से चले आ रहे परम्पराओं को फॉलो कर रहे हैं. गाने में सिंगर का भी यही कहना है. इसके साथ ही सिंगर लक्ष्मी-काली की पूजा करने को भी कह रहे हैं. पर अब तो भगवान भी चाइनीज हो चुके हैं. कहने का मतलब उनकी मूर्तियां चाइना में बन रही हैं. इसपर सिंगर ने कुछ नहीं कहा है गाने में. ये है गाने का लिरिक्स. नीचे वीडियो भी है.भाई खूबे जरईह करुआ तेल, ऐ भाई खूबे जरईह करुआ तेल. आ हो जाए दियरी रेलम रेल. ‘पूरा दियरी में भैया..करुआ तेल, शुद्ध करुआ तेल डाल के, आ दीपावली मनाबे के बा.. आ ई बिदेसी बत्ती के दूर करे के बा.’ भाई खूबे जरईह करुआ तेल, आ हो जाए दियरी रेलम रेल. हो जाई बेदेसी बत्ती फेल, जाए दियरी रेलम रेल. ‘क्या बात है, क्या बात है..बहुत बहुत बधाई बा दिवाली के..’ भाई खूबे जरईह करुआ तेल, हो भाई खूबे जरईह करुआ तेल. आईल दिवाली लक्ष्मी, कली पूजीह घर आई खुशिहाली. जनि करिह पटाखा से तू खेल, हो जाई दियरी रेलम रेल. भाई खूबे जरईह करुआ तेल, ऐ भाई खूबे जरईह करुआ तेल.https://www.youtube.com/watch?v=JK4rEQuPh04&feature=youtu.be
2. आईल दिवाली के परब
दूसरा गाना धार्मिक किस्म का है. लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने की बात हो रही है. बड़ा मजेदार बा इ गाना. पहिले लिरिक्स देखल जाए फेर सुनल जाए.आईल दिवाली के परब इ पावन, जगमग दीप से सजे घर आंगन. अईहो, आईल दिवाली के परब इ पावन, जगमग दीप से सजे घर आंगन. खुशियन के आईल बहार हो.. लक्ष्मी-गणेश के होता पूजन आज, आईल शुभ के बहार हो. साल भर से रहे अहि दिन के इंतजार हो, आईल दिवाली सबका लऊ त्योहार हो. भईल जग उजियार हो.. लक्ष्मी-गणेश के होता पूजन आज, आईल शुभ के बहार हो. सुख-समृद्ध के होई घर में बढंती, रिद्धि-सिद्धि अहिंए मिले मन के शांति. गायक गोविंद पर बरसईहें प्यार हो.https://www.youtube.com/watch?v=J7v48kM3e_s
3. जग मग जग मग दीप जले
तीसरा गाना ऑसम है. गांव-घर में मनाई जाने वाली दिवाली देखेंगे आप. इसमें घर को केले के पत्ते से सजाने कि बात हो रही है. गाय के घी से दीप जलाने की बात हो रही है. भुकभुकिया चाइनीज लाइट का फैशन तो अब का है. पहले तो दिवाली पर घर-बाड़ मोमबत्ती और दीप से ही जगमगाता था.केरा के पात से द्वारिया बा साजल, इन्द्रधनुष से रंगोली बा बनल. चरही सामान घर जगमग करे, सबके बा नेहिया चरनिया में लागल. लक्ष्मी-गणेश अईले घरे-घरे, जगमग जगमग दीप जरे. गइया के घीइवा से दीप सब बारे, लक्ष्मी-गणेशजी के आरती उतारे. नया नया बस्तर नया आभारंवा, हाथ जोड़ सब मां लक्ष्मी पुकारे. रिद्धि-सिद्धि के चरनिया पड़े चरनिया पड़े, जगमग जगमग दीप जरे.https://www.youtube.com/watch?v=82YswMBrvWs
4. चाइना को दूर भगाएं मिट्टी वाले दिये भगाएं
चौथा गाना संजय फैजाबादी का है. इसकी बोली भी फैजाबादी है. इस गाने में सिंगर हाथ में आरती लेकर खड़े हैं. कह रहे हैं कि सेना का सम्मान करना है और इस दिवाली चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना है. सिंगर पूरे फॉर्म हैं. और मदमस्त होकर जनता को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहें हैं.“प्रिये देशवाशियों श्री मोदी जी का कहना है, इस दीपावली सरहद पर तैनात वीर सिपाहियों को एक संदेश अवश्य भेजें. और ध्यान रहे, इस बार चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना है...” राष्ट्रीयहित का गला घोंट कर छेद न करना थाली में,मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. देश के धन को देश में रखना, नहीं बहाना नाली में.. बने जो अपने मिटटी से वो दिये बिके बाजारों में, घर में आता है ये सभी तीज-त्योहारों में. कार्तिक दीप से बदले पितृ-दोष खुशहाली में, मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. अबकी अमावास वाली ये रात न अबकी काली हो, दिये बनाने वालों की भी खुशियों भरी दिवाली हो. अब अपने जेब का पैसा भी जाए भाई की झोली में, मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. चीनी झालर से आकर्षित ये किट-पतंगें लाते हैं, जल के दिये में बरसाती कीड़े मर जाते हैं. जान-बूझकर देश को अपने लाओ न तुम बदहाली में, मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. गए जो दुश्मन देश में पैसा बम-बारूद बनाएगा, संजय फैजाबादी हमको बार-बार उकसाएगा. देश की सीमा रहे सुरक्षित चूक न हो रखवाली में, मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में.https://www.youtube.com/watch?v=FsbROa3T14w
ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है.










