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पीएम मोदी के दोस्त नेतन्याहू को बस ये एक काम नहीं करना चाहिए था

नेतन्याहू का ये काम उनकी पर्सनालिटी को सूट नहीं करता है.

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इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा 17 जनवरी को अहमदाबाद में साबरमति आश्रम गए थे.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत के दौरे पर हैं. वो छह दिनों के लिए भारत आए हैं. भारत और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होंने अपना दोस्त बताया है. खुद पीएम मोदी ने भी उन्हें दोस्त बताया है. इसलिए भारत आने के बाद इजरायली प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम रहे हैं.
India's Prime Minister Narendra Modi flies a kite watched by his Israeli counterpart Benjamin Netanyahu and Netanyahu's wife Sara during their visit to Gandhi Ashram in Ahmedabad, India, January 17, 2018. REUTERS/Amit Dave - RC1B6A253320
अहमदाबाद के गांधी आश्रम में नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी के साथ पतंग उड़ाई. (Reuters)

14 जनवरी को जब नेतन्याहू आए तो वो सबसे पहले दिल्ली के तीन मूर्ति चौक पर गए. फिर एक समझौते के बाद इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति स्मारक हाइफा चौक के नाम पर कर दिया गया. कोई विदेशी राजनयिक भारत आए और ताजमहल न जाए, ऐसा बहुत कम ही होता है. तो इजरायली प्रधानमंत्री भी ताजमहल के दीदार के लिए आगरा गए और पत्नी सारा के साथ फोटो खिंचवाई. 17 जनवरी को नेतन्याहू को पीएम मोदी के साथ अहमदाबाद में रोड शो करना था. इसके लिए वो अहमदाबाद पहुंचे. वहां रोड शो से पहले नेतन्याहू महात्मा गांधी के आश्रम साबरमति गए और वहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने महात्मा गांधी को मानवता के महान दूतों में से एक बताया.
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नेतन्याहू पत्नी सारा के साथ ताजमहल भी गए थे. (Twitter)

यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन उसके बाद नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने साबरमति आश्रम में चरखा भी काता. लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री को ये चरखा नहीं कातना चाहिए था. इसकी वजह हम बताते हैं-
भारत में चरखे को प्रचलित करने और उसे घर-घर तक पहुंचाने का काम महात्मा गांधी ने किया था. महात्मा गांधी के व्यक्तित्व के साथ चरखा ऐसे जुड़ा रहा कि भारत में चरखा और महात्मा गांधी एक दूसरे के पर्यायवाची के तौर पर रेखांकित होने लगे. महात्मा गांधी के जीवन के जो तीन सबसे बड़े सिद्धांत थे, वो थे- सत्य, अहिंसा और ब्रह्मचर्य. लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू का व्यक्तित्व महात्मा गांधी के ठीक उल्टा है. महात्मा गांधी से जुड़ा चरखा शांति का प्रतीक रहा है, जबकि बेंजामिन नेतन्याहू आर्मी के जवान रहे हैं. उन्होंने कई बड़े-बड़े ऑपरेशन किए हैं. इनमें 1968 में किया गया ऑपरेशन इन्फर्नो और उसी साल लेबनान पर इजराइल के किए गए ऑपरेशन गिफ्ट दोनों में बेंजामिन शामिल रहे थे. 1973 की योम-किप्पुर लड़ाई में भी बेंजामिन नेतन्याहू ने हिस्सा लिया था. नेतान्याहू के भाई जोनाथन भी इज़राइली फौज का हिस्सा थे. 1976 में एंटेबे, यूगांडा में हाईजैक प्लेन के रेस्क्यू मिशन के दौरान 106 हॉस्टेज लोगों में से 102 को बचा लिया गया. इजराइल का सिर्फ एक सैनिक मरा. वो जोनाथन ही थे. उनके सम्मान में इजराइल ने इस मिशन को ऑपरेशन जोनाथन नाम दे दिया. 1982 में अपने भाई की याद बेंजामिन ने एंटी-टेररिज्म इंस्टिट्यूट खोला और यहीं से उनका राजनैतिक सफ़र शुरू हुआ.
Indian Prime Minister Narendra Modi assists Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu's wife Sara as Netanyahu looks on during their visit to Gandhi Ashram in Ahmedabad, India, January 17, 2018. REUTERS/Amit Dave - RC1710FC57F0
नेतन्याहू के साथ उनकी पत्नी सारा ने भी  सूत काता. इस दौरान पीएम मोदी उनके साथ मौजूद थे. (Reuters)

वहीं इसके ठीक उलट महात्मा गांधी ने भारत में असहयोग आंदोलन और अहिंसक आंदोलनों के जरिए पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई. आज भी महात्मा गांधी भारत के लिए बापू हैं और देश के साथ ही पूरी दुनिया में उन्हें श्रद्धा की नज़र से देखा जाता है. जबकि इजरायल के ये प्रधानमंत्री अपने दुश्मनों से बदला लेने के लिए खास तौर पर अपनाए जा रहे हिंसक तरीकों के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में उनका शांति के प्रतीक चरखे पर सूत कातना उनके व्यक्तित्व के लिए मुफीद नहीं है.


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