अरविंद केजरीवाल.
दिल्ली के अपने विधायक को पंजाब में चुनाव लड़ाने ले जा रहे केजरीवाल
पंजाब में ये केजरीवाल का बड़ा दांव है. ठीक उनके अपने स्टाइल में.

रुकिए. हंसने की जरूरत नहीं है. बंदा दिल्ली का मुख्यमंत्री है. भले हरकतें अहमियत के मुताबिक न हों, पर बात सुननी तो पड़ेगी. तो अरविंद इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. उनकी ख्वाहिश पंजाब में 'आप' को दिल्ली जैसी जीत दिलाना है. तो उन्होंने दिल्ली का अपना एक विधायक पंजाब चुनाव में उतारने का फैसला लिया है.
जरनैल सिंह. दिल्ली की राजौरी गार्डेन सीट से विधायक और पंजाब के सह-प्रभारी.
पिछले सप्ताह केजरीवाल पंजाब की लंबी सीट पर प्रचार करने पहुंचे थे, जो मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की विधानसभा सीट है. यहां केजरीवाल ने कहा:
'कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) में एक अनोखी सेटिंग है, जिससे बादल हर बार जीत जाते हैं. लंबी और जलालाबाद की सीट पर कांग्रेस जान-बूझकर कमजोर कैंडिडेट उतारती है. जलालाबाद की सीट पर हमने अपने एक शेर भगवंत मान को उतारा है. अब हमारा दूसरा शेर... मेरा छोटा भाई जरनैल, प्रकाश सिंह बादल की सीट लंबी से चुनाव लड़ेगा.'
अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के जिन दो नेताओं को वो शेर बता रहे हैं, उसमें उनके पहले शेर के चुनावी वीडियो कम और नशे में टुन्न रहने के वीडियो ज्यादा आते हैं. शराब पीना उनका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन सड़क पर नशे पर झूमना अच्छा तो नहीं लगता.
उनके दूसरे शेर जरनैल सिंह और भी रोचक हैं. ये जनाब पहले पेशे से पत्रकार थे. लंबे समय तक एक हिंदी अखबार से जुड़े रहे. फिर एक दिन न जाने किस बात पर दिमाग फिर गया कि पी. चिदंबरम पर जूता फेंक आए. साल 2009 और तारीख थी 7 अप्रैल. प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी और जरनैल फांद पड़े थे. बाद में पूछा गया, तो पता चला कि चुनाव में 1984 के सिख दंगों से जुड़े लोगों को कांग्रेस का टिकट मिलने से नाराज थे.
जिन नेताओं को जरनैल दोषी ठहरा रहे थे, वो कांग्रेस के शासनकाल में हुई CBI जांच में पाक-साफ निकल चुके थे. चिदंबरम ने जवाब दिया था कि CBI ने बिना किसी दबाव के जांच की है और कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दी. हालांकि, जरनैल ने बाद में ये भी कहा, 'मैं मानता हूं कि मेरा तरीका गलत था, लेकिन मेरे इरादे सही थे. मैं नहीं चाहता कि कोई पत्रकार ऐसा व्यवहार करे.' चिदंबरम ने भी बात आगे नहीं बढ़ाई.
राजनीतिक करियर
2014 में जरनैल 'आप' के टिकट पर वेस्ट दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने उन्हें ढाई लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजौरी गार्डेन से दावा ठोंका, जहां उन्हें जीत हासिल हुई. अब केजरीवाल उन्हें दिल्ली से उठाकर पंजाब में लड़ाने ले जा रहे हैं. लंबी का कैंडिडेट बनाए जाने पर उन्होंने कहा, 'लंबी में एक ऐतिहासिक लड़ाई होगी. यहां से इतिहास लिखा जाएगा. लोगों को बदलाव चाहिए, न कि बादल. ऐसी जंग होगी कि जमाना याद रखेगा.'
दिल्ली से लेनी होगी विदाई
पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए जरनैल को दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा देना होगा. असल में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए संबंधित राज्य में वोट होना जरूरी है. ऐसे में जरनैल को दिल्ली की वोटर लिस्ट से अपना नाम हटवाकर पंजाब की वोटर लिस्ट में जुड़वाना होगा. वो इसमें जुट भी गए हैं. दिल्ली का वोट कटते ही दिल्ली विधानसभा से उनकी सदस्यता भी चली जाएगी. लोकसभा चुनाव में किसी भी राज्य में वोट होने पर देशभर में कहीं से संसदीय चुनाव लड़ा जा सकता है.
जरनैल को क्यों चुना
'आप' ने जरनैल के जरिए अकालियों को घेरने की कोशिश की है. जरनैल पार्टी का सिख चेहरा हैं, जिनकी सिख संगत में अच्छी पकड़ बताई जाती है. चिदंबरम पर जूता फेंकने के बाद वो सिख समुदाय के हीरो के तौर पर पेश किए जाने लगे. 'आप' जनरैल की इसी छवि को पंजाब में कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल करने की फिराक में है. जरनैल के जरिए माहौल बनाया जाएगा कि कांग्रेस सिख-विरोधी है. सोशल मीडिया पर कवायद शुरू भी हो गई है.

पुरानी है केजरीवाल की ये पॉलिटिक्स
केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री के सामने एक ऐसा कैंडिडेट उतार रहे हैं, जो उनकी नजर में मजबूत है. ये केजरीवाल की पुरानी राजनीति है. इससे पहले दिल्ली के विधानसभा चुुनाव में वो खुद दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़े थे और जीते भी थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनारस में ताल ठोंकी थी. उन्हें वहां करारी शिकस्त मिली थी. उसी लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ पार्टी के बड़े नेता कुमार विश्वास को उतारा था. कुमार भी हारे थे.
जूते से याद आया
जरनैल सिंह की जूते वाली घटना से याद आया, केजरीवाल के नए साल की शुरुआत उन पर जूता फेंके जाने से हुई है. 2017 के पहले दिन रोहतक में नोटबंदी पर एक सभा संबोधित करने के दौरान एक लड़के ने उन पर जूता फेंक दिया. हालांकि, केजरीवाल खुशकिस्मत रहे. जूता उन्हें लगा नहीं. इस घटना पर उन्होंने अपने दिलअजीज नरेंद्र मोदी याद करते हुए कहा, 'मोदी जी कायर हैं, इसीलिए उन्होंने अपने पिट्ठू को मुझ पर जूता फेंकने के लिए भेज दिया. आप जूते फिंकवा सकते हैं, CBI के छापे मरवा सकते हैं, पर ये मुझे नोटबंदी घोटाले के बारे में सच बोलने से रोकेगा नहीं.'
साल के दूसरे दिन 2 जनवरी को झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास पर भी जूता फेंका गया. वो खरसावां के शहीद पार्क में पुलिस फायरिंग में मारे गए आदिवासियों को श्रद्धांजलि देने गए थे. रघुबर भी खुशकिस्मत रहे. जूता उन्हें नहीं लगा.











