आश्विन बताते हैं कि कुम्बले ने आते ही नेट्स में बॉलिंग करनी शुरू कर दी है. जहां से उन्हें सबसे ज़्यादा सीखने को मिलता है. कुम्बले ने आश्विन पर काई जिम्मेदारियां और ढेर सारा आत्मविश्वास दिया है. आश्विन ने बताया की उनकी कुम्बले के साथ एक बेहद ओपन चैट हुई जहां उन्होंने ये साफ़ किया की आश्विन की ताकतें क्या-क्या हैं और वो आश्विन से मैच में क्या चाहते हैं. कुम्बले के आने से टीम का वो सेक्शन जिसे सबसे ज़्यादा प्यार और देख-रेख मिलेगी, वो है स्पिन डिपार्टमेंट. एक बेहतरीन टेस्ट प्लेयर होने के नाते कुंबले की सलाह टीम के स्पिनर्स के काफी काम आने वाली है. चौखट पर खड़ी वेस्ट इंडीज़ टेस्ट सीरीज़ के बाद अगले पूरे एक साल इंडिया देसी पिचों पर ही टेस्ट मैच खेलेगी. टेस्ट सीरीज़ें भी प्रचुर मात्रा में हैं. लिहाज़ा स्पिन अटैक इन-फ़ोकस रहेगा. टेस्ट खेलने को तैयार स्पिनर्स आज टी-20 के मोड में चल रहे हैं. ओवर की हर तीसरी गेंद दूसरा या क्विकर वन होने लगी है. टेस्ट मैच में स्पिन अटैक के लगने का मतलब होता था एक जाल का बुना जाना. हम अपने टीवी सेट पर बैठे एक चक्रव्यूह रचे जाने का प्रॉसेस देख रहे होते थे.
आज वो टेक्नीक गायब सी दिखाई देती है. स्पिनर्स का एक ही जगह पर गेंदों को फेंकते रहना और बैट्समैन के गलती करने का इंतज़ार करना आज लुप्तप्राय हो चला है. उसकी जगह बैट्समैन खुद छोटी या तेज़ फेंकी गयी गेंदों की ताक में रहते हैं जिन्हें मिलने में उन्हें देर भी नहीं लगती. बॉलर्स जल्दी विकेट लेने की चाह में प्लानिंग नाम के शब्द से दूर होते जा रहे हैं. हालत ये है कि बॉलर फ़ील्ड के हिसाब से गेंद ही नहीं डालने को तैयार हैं. वो उस आर्ट को भूल चुके हैं. आज वो समय आ गया है जब विकेट के पीछे खड़ा कप्तान चिल्ला कर बॉलर को कहता है कि "इसको ये घूमेगा तो पुजारा को उसी के लिए रक्खा है. वो उधर ताली बजाने के लिए नहीं है." टीम इंडिया में आये स्पिनर्स को अगर हम देखें तो अनिल कुम्बले के जाने के बाद अमित मिश्रा एक मात्र ऐसे स्पिनर हैं जो पेशेंस को अपना हथियार बना कर चलते हैं. हरभजन सिंह का ग्राफ पिछले 5 सालों में गिरता ही गया है. अश्विन और जडेजा वेरिएशन के मारे रहे हैं. बाकी कोई भी स्पिनर अपनी जगह पक्की करने में नाकाम ही रहा है. धोनी के लिए मुसीबत में पड़ने पर अमित मिश्रा ही एकमात्र विकल्प बचते हैं.
वेस्ट इंडीज़ के टूर पर गयी टीम अभी अभी पहला वार्म-अप मैच खेल कर निपटी है. इसमें आश्विन को खेलने का मौका नहीं मिला. लेकिन अमित मिश्रा ने ज़रूर गेंदबाजी की. वहां साफ़ दिखा है कि पहले 15-16 ओवर बॉलिंग करने पर उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. लेकिन वो फिर भी वही बॉल फेंकते रहे. जिसका फ़ायदा उन्हें मिला. एक बार विकेट गिरने के बाद उन्हें लगातार विकेट मिलते चले गए. अपनी लय को खोये बगैर धीरज से गेंदबाजी करना ही एक अच्छे टेस्ट बॉलर की ज़रुरत और पहचान है. ये जितनी जल्दी हो सके, सभी बॉलर्स को समझ लेना चाहिए. वो जो अभी टेस्ट टीम में हैं. और वो भी जो आगे बीसीसीआई का बिल्ला लगी सफ़ेद टीशर्ट और नीली कैप सर पर पहनना चाहते हैं.























