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55 साल का ये प्रोफ़ेसर 100 दिन समंदर के अंदर रहने का रिकॉर्ड क्यों बनाना चाहता है?

ऐसा रिकॉर्ड दुनिया में आज तक किसी ने नहीं बनाया!

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प्रोफ़ेसर जोसेफ़ को पानी के अंदर भयंकर दबाव झेलना होगा (फोटो सोर्सं- USF)

समंदर के अंदर क्या है? हजारों तरह के जलीय जीव हैं, वनस्पतियां हैं. और पनडुब्बियां भी हैं, जिनमें इंसान रहते हैं. हम इंसान, मछलियों की तरह न तो पानी से ऑक्सीजन ले सकते हैं और न ही करोड़ों लीटर पानी का दबाव झेल सकते हैं. इसीलिए पनडुब्बी में ऑक्सीजन लेकर जानी होती है. प्रेशर मेंटेन करना पड़ता है. मतलब लंबा तामझाम लगता है. इसीलिए ज़्यादातर पनडुब्बियां नौसेना के पास ही होती हैं, जिनके पास बजट की कोई कमी नहीं होती. और मकसद होता है समुद्री सीमा की सुरक्षा. अब सुरक्षा की बात आते ही आदमी बिल की तरफ देखना भूल जाता है.

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लेकिन एक दूसरा मकसद भी होता है, जिसमें ढेर सारे परिश्रम, ट्रेनिंग और बजट की ज़रूरत पड़ती है - विज्ञान. और इसी विज्ञान की खातिर एक 55 वर्षीय अमेरिकी प्रोफ़ेसर, एक महीने से ज्यादा वक़्त से पानी के अंदर बने एक घर में हैं. वो पूरे 100 दिन तक उसमें रहने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं. प्रोफ़ेसर ये स्टडी भी कर रहे हैं कि लंबे वक़्त तक पानी के दबाव का इंसानी शरीर पर क्या असर होता है.

पानी के अन्दर 100 दिन रहकर प्रोफ़ेसर क्या हासिल करना चाह रहे हैं, इस दौरान उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना होगा? आज की मास्टरक्लास में विस्तार से जानेंगे.

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100 दिन पानी के अंदर

प्रोफ़ेसर, जोसेफ डिटुरी, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ फ्लोरिडा में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. फ्लोरिडा में ही 'जूल्स अंडरसी लॉज' है. ये पानी के अंदर बनी एक रिसर्च लैबोरेटरी थी जिसे अब एक होटल की तरह डेवेलप किया गया है. पूरे अमेरिका में ये अपनी तरह की अकेली जगह है. इसके कमरों में जाने के लिए स्कूबा डाइविंग करनी पड़ती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ फ्लोरिडा की वेबसाइट के मुताबिक जोसेफ़, 'जूल्स अंडरसी लॉज' में पानी के करीब 30 फीट नीचे, एक 100 स्क्वायर मीटर की जगह में रह रहे हैं. जोसेफ अमेरिका की नेवी में थे. करीब 28 साल नेवी में काम करने के बाद बतौर कमांडर रिटायर हुए. इसके बाद फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी आ गए. वो यहां ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी, यानी दिमागी चोटों के बारे में रिसर्च कर रहे हैं.

एक मेडिकल टीम पानी के अंदर गोते लगाकर जोसेफ का हाल लेती रहती है. ये लोग जोसेफ के स्वास्थ्य से जुड़े रिकार्ड्स इकठ्ठा कर रहे हैं. जोसेफ के कई सारे मेडिकल और साइकोलॉजिकल टेस्ट किए जाएंगे. एलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) के जरिए जोसेफ के दिल की जांच की जाएगी. खून की जांच, स्टेम सेल टेस्ट और अल्ट्रासाउंड वगैरह भी होंगे. चूंकि जोसेफ किसी एस्ट्रोनॉट की ही तरह अकेले एक बंद जगह में लम्बे वक़्त तक रहने वाले हैं. इसीलिए उनके दिमाग पर क्या असर पड़ता है इसका भी लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा. एक मनोवैज्ञानिक और एक मनोचिकित्सक मिलकर ये काम करेंगे.

100 दिन के इस मिशन में जोसेफ और भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे. उनके एक साथी ने एक टूल बनाया है. ये टूल, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की मदद से इंसानी शरीर की स्क्रीनिंग कर बीमारी का पता लगा सकता है, और ये भी तय कर सकता है कि दवाई देने की जरूरत है या नहीं. जोसेफ़ इस टूल का इस्तेमाल भी करेंगे. इस मिशन के दौरान पानी के नीचे कुछ और साइंटिस्ट्स भी उनसे मिलने जाएंगे. और समुद्र के संरक्षण और बचाव वगैरह पर चर्चा की जाएगी. इस दौरान जोसेफ अपनी बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की क्लासेज़ भी ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं.

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ख़ास इरादा क्या है?

अब आप पूछ सकते हैं कि अगर कोई सनकी वैज्ञानिक पानी के भीतर 100 दिन रहने का रिकॉर्ड बना भी रहा है, तो उसकी इतनी सारी जांचें करके हमें हासिल क्या होगा. इसका जवाब मार्च की शुरुआत में समुद्र के अंदर जाने के पहले जोसेफ ने खुद दिया था.

उन्होंने प्रेस से कहा था,

“इंसानी शरीर कभी भी इतने लंबे वक़्त तक पानी के अन्दर नहीं रहा. इसलिए मुझ पर बारीकी से नजर रखी जाएगी. मेरी इस यात्रा का मेरे शरीर पर क्या प्रभाव होता है, इस पर स्टडी की जाएगी. मुझे लगता है कि बढ़े हुए प्रेशर की वजह से मेरा स्वास्थ्य सुधरेगा.”

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट एक स्टडी का हवाला देते हुए कहती है कि जब कोशिकाओं पर प्रेशर बढ़ता है तो वो 5 दिनों में दोगुनी हो जाती हैं. इससे पता चलता है कि बढ़े हुए दबाव में इंसानों में बढ़ती उम्र की बीमारियों को रोकने की क्षमता है. और उम्र भी बढ़ सकती है. जोसेफ, इसी स्टडी के निष्कर्षों को आगे बढ़ा रहे हैं.

जोसेफ भी कहते हैं,

"हमें लगता है कि मैं एक सुपर-ह्यूमन बन जाऊंगा. मिलिट्री में कई लोगों को दिमाग में चोट आ जाती है. मैं सीखना चाहता था कि उनकी मदद कैसे की जा सकती है. मैं जानता था कि हाइपरबैरिक प्रेशर से सेरेब्रल ब्लड फ्लो बढ़ जाता है. और फिर मैंने कल्पना की, कि इसका इस्तेमाल दिमागी चोटों के इलाज में किया जा सकता है. मेरा मानना है कि हाइपरबारिक मेडिसिन के काम करने की जितने मकैनिज़म अभी तक मालूम हैं. उनका इस्तेमाल करके कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है."

यहां दो टर्म समझने जरूरी हैं, एक, हाइपरबारिक मेडिसिन. इसके मायने यूं समझिए कि हम आम तौर पर जब सांस लेते हैं तो फेफड़ों में जाने वाली हवा में 21 फीसद ऑक्सीजन होती है. लेकिन हाइपरबारिक मेडिसिन वो इलाज है, जिसमें 100 फीसदी ऑक्सीजन रोगी के फेफड़ों तक भेजी जाती है. दूसरा शब्द है- ‘सेरेब्रल ब्लड फ्लो’. इसके माने हैं दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में खून के प्रवाह की प्रक्रिया.

जोसेफ कहते हैं,

“इस पृथ्वी पर वो सब है जिसकी हमें जरूरत है. मेरा मानना है कि समुद्र के अन्दर कई ऐसे जीव हैं जिन्हें अभी तक खोजा नहीं गया है और इन जीवों में कई बीमारियों का इलाज खोजा जा सकता है. इसके लिए हमें और रिसर्चर्स की जरूरत है."

जोसेफ को क्या दिक्कतें आ सकती हैं?

ब्रैडली एलियट, इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेस्टमिंस्टर में फिजियोलॉजी पढ़ा रहे हैं, उन्होंने मीडिया आउटलेट 'द कन्वर्सेशन' के लिए एक आर्टिकल लिखा है. इसमें उन्होंने जोसेफ के सौ दिन के सफ़र की मुश्किलों के बारे में बात की है.

ब्रैडली के मुताबिक, जोसेफ, हाइपरबारिक प्रेशर के प्रभावों पर रिसर्च कर रहे हैं. हाइपरबारिक प्रेशर माने समुद्र के ऊपरी सतह पर लगने वाले हवा के सामान्य दबाव से ज्यादा दबाव. वो समुद्र के नीचे वक़्त बिताकर ये समझना चाह रहे हैं कि ज्यादा दबाव में रहने से उनके स्वास्थ्य पर क्या फर्क पड़ता है.

ब्रैडली कहते हैं कि जोसेफ का ये जोखिम किसी पनडुब्बी में रहने से कहीं अलग है. सबमरीन्स जब समुद्र में अन्दर जाती हैं तो पूरी तरह बंद होती हैं. उनके अन्दर, समुद्र तल पर जितना दबाव है, उतना ही रहता है. माने कोई प्रेशर डिफरेंस नहीं रहता. भले ही पनडुब्बी समुद्र में सैकड़ों मीटर अंदर गोता लगा रही हो.

लेकिन पनडुब्बी के उलट, जोसेफ जहां रह रहे हैं, उस जगह और समुद्र के बीच कोई ठोस चीज या एयरलॉक नहीं है. और जोसेफ के रहने वाली जगह में एक कमरा ऐसा है जहां पानी का एक पूल है जिसमें समुद्र का पानी आता है. ऐसे में जोसेफ के इस घर में समुद्र के अथाह पानी के दबाव के चलते, घर के अन्दर की हवा का दबाव भी बढ़ जाता है. ब्रैडली कहते हैं पानी के अन्दर 30 फीट की गहराई में रह रहे जोसेफ़ पर ये दबाव, उस दबाव का दोगुना है, जितना जमीन पर रहते वक़्त किसी इंसान पर रहता है. एक शब्द में कहें तो एटमोस्फियरिक प्रेशर का दोगुना.

इस बढ़े दबाव से क्या होगा?

ब्रैडली लिखते हैं कि हर सर्टिफाइड गोताखोर जानता है कि इस हाइपरबारिक प्रेशर से खतरा हो सकता है. सांस लेते वक़्त ऑक्सीजन और कार्बन डाई-ऑक्साइड आसानी से हमारे फेफड़ों और खून में प्रवाहित होती रहती हैं. लेकिन समुद्र की गहराई बढ़ने पर पानी का दबाव भी बढ़ता है, और हवा में मौजूद नाइट्रोजन हमारे फेफड़ों और खून में चली जाती है. इसके कई बुरे प्रभाव हो सकते हैं. , जिसमें आदमी ऐसे व्यवहार करता है जैसे नशे में हो.30 मीटर की गहराई पर तो नार्कोसिस जैसी स्थिति भी हो सकती है

इस खतरे के अलावा भी जोसेफ़ को कई शारीरिक बदलावों का सामना करना पड़ सकता है. जोसेफ़ के इस घर में कई खिड़कियां हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सूरज की रौशनी कम ही देखने को मिलेगी. जिसके चलते उनके जागने-सोने की साइकिल बिगड़ेगी. न जरूरत भर नींद मिल पाएगी और न भरपूर मात्र में नैचुरल विटामिन-D. जोसेफ़ के घर में जगह भी कम है. सो एक्सरसाइज के नाम पर भी जोसेफ के पास सिर्फ स्विमिंग का ऑप्शन है.

जोसेफ़ के लिए कुछ लॉन्ग टर्म की दिक्कतें भी हैं. हालांकि, जोसेफ़ का ये सफ़र, पनडुब्बी में रहने वाले नेवी वालों से बिल्कुल अलग है लेकिन वो भी सबमरीनर्स की तरह ही पानी के नीचे लम्बा वक़्त गुजारने वाले हैं. रिसर्च कहती हैं कि कुछ महीने पानी के अन्दर गुजारने वाले सबमरीनर्स को कुछ दिक्कतें लम्बे वक़्त के लिए पेश आती हैं. उनकी नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है, हड्डियों और मांसपेशियों का वजन कम हो जाता है. जोसेफ़ को भी इन दिक्कतों से जूझना पड़ सकता है.

ब्रैडली के मुताबिक, अब तक की स्टडीज, कम वक़्त के लिए शरीर पर पड़ने वाले हाइपरबारिक प्रेशर के प्रभावों पर हुई हैं. हो सकता है इस दबाव का इन स्टडीज में घावों को ठीक करने में सकारात्मक प्रभाव देखा गया हो. लेकिन जोसेफ़ एक लंबे अरसे तक इस दबाव को झेलेंगे. ये उनके लिए शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तर की चुनौती होगी. 

माने जोसेफ के लिए 100 दिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना बहुत आसान खेल तो नहीं है.साल 1992 में 69 दिन, 19 मिनट तक पानी के नीचे रहने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना था. जिसके बाद साल 2014 में ये रिकॉर्ड टूट गया. ये रिकॉर्ड तोड़ने वाले भी दो प्रोफ़ेसर थे. अमेरिका के रोन स्टेट कम्युनिटी कॉलेज के ब्रूस सैन्ट्रेल और जेसिका फेन. ये दोनों पूरे 74 दिन पानी के अन्दर रहे और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. और अब प्रोफ़ेसर जोसेफ अकेले ये रिकॉर्ड तोड़ना चाहते हैं. लेकिन जैसा कि आपने अभी जाना, वो ये सब सिर्फ रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान के लिए कर रहे हैं.

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