राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यटन मंत्रालय.
राज्य मंत्री: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
2017 में इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बनी कमिटी का सदस्य बनाया गया. फिलहाल कहीं से सांसद नहीं हैं.
2014 में केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद बीजेपी शासित राज्यों में सार्वजानिक वितरण तंत्र को दुरुस्त करने का काम रहे हैं.
क्यों बनाया गया
ईसाई समुदाय से आते हैं. बीजेपी इनके जरिए केरल के ईसाई समुदाय में अपनी पकड़ बनाना चाहती है. ईसाई समुदाय का एक बड़ा हिस्सा सीपीएम को वोट नहीं देता. केरल में सीपीएम और आरएसएस के बीच चल रही खूनी जंग के चलते यह राज्य संघ के एजेंडे में पहले नंबर पर हैं. अब तक नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में केरल से कोई मंत्री नहीं है. अल्फ़ोंस कन्ननथनम केरल के ईसाई बाहुल्य त्रावणकोर बेल्ट से आते हैं. चर्च के साथ उनके संबंध अच्छे रहे हैं.सियासी पारी-
# 1979 केरल काडर के आईएस अधिकारी है. शुरुआत से काफी महत्वाकांक्षी माने जाते हैं.# 1989 में केरल के कोट्टयम जिले को 100 फ़ीसदी साक्षरता दिलाने के बाद पहली बार खबरों में आए.
# पांच दिसंबर 1994 को छपी टाइम मैगजीन की कवर स्टोरी में इन्हें 100 ग्लोबल यंग लीडर की सूची में शामिल किया था.
# डीमोलेशन मैन के नाम से मशहूर. डीडीए के कमिश्नर रहते हुए 14,310 गैरकानूनी इमारतों को गिराया. इससे सरकार को उस समय करीब 10,000 करोड़ का फायदा हुआ.
# 2006 में प्रशासनिक सेवा से मुक्त हुए. उसी साल गृह राज्य केरल में चुनाव थे. निर्दल चुनाव लड़ा कोट्टायम की कंजिरापल्ली सीट से. पीछे खड़ी थी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी. चुनाव जीत गए. 2011 तक विधायक रहे. 2011 में तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व में बीजेपी ज्वॉइन की.

डीडीए कमिश्नर के तौर पर अल्फ़ोंस कन्ननथनम
क्या रहे विवाद
# 17 अगस्त 2016 को अमित शाह की तरफ से अल्फोंस को फोन गया. कुछ घंटों बाद इंटरनेट पर खबर छपी कि इन्हें चंडीगढ़ का नया एडमिनिस्ट्रेटर बनाया जाएगा. हालांकि उस समय इन्हें पंजाब का गवर्नर बनाने की चर्चा भी थी. दो दिन बाद 19 अगस्त को अल्फोंस के पास एक और फोन आया. इस बार गृहसचिव राजीव महर्षि का फोन आया. उन्हें बताया गया कि उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई है. उस समय उन्होंने खुल कर इस बात पर नाराज़गी जताई थी.
# 1998 में अटल सरकार के दौरान राम जेठमलानी शहरी विकास मंत्री थे. उस दौरान अल्फोंस जेठमलानी के सचिव हुआ करते थे. दोनों ने मिलकर ब्यूरोकेसी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था. उस समय मीडिया और मंत्रालय से जुड़े हलकों में चर्चा थी कि अल्फ़ोंस कन्ननथनम ही असली मंत्री हैं.
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