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कौन हैं वो दो लोग, जो लालू यादव के लिए जेल गए थे

अब जेल से बाहर आ गए वो लोग मामूली नहीं हैं, उनके बारे में जानकर आप हैरान होंगे..

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लालू को जेल जाना पड़ेगा.
23 दिसंबर को पूरे देश की नजरें रांची की विशेष सीबीआई अदालत पर लगी हुई थीं. वजह साफ थी. सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह के सामने बिहार के सबसे चर्चित चारा घोटाले की सुनवाई पूरी हो गई थी. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव इस मामले में अभियुक्त थे. फैसला लालू पर आना था, तो सबकी निगाहें उनपर लगी हुई थीं. कोर्ट ने सुनवाई के बाद लालू यादव को दोषी पाया और सजा सुनाने के लिए 3 जनवरी की तारीख तय कर दी. लालू दोषी करार दिए गए थे, तो उन्हें जेल जाना ही था. पुलिस उन्हें लेकर रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल लेकर चली गई.
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23 दिसंबर को कोर्ट ने लालू को चारा घोटाले में दोषी पाया था. 6 जनवरी को लालू को सजा सुनाई गई.

उसी दिन यानि 23 दिसंबर को ही बिरसा मुंडा जेल में दो और बंदियों की आमद हुई थी. इनके नाम थे मदन यादव और लक्ष्मण कुमार. पूरा देश लालू पर ही नज़र रखे था, इसलिए इन दो नए बंदियों के बारे में किसी को कुछ खास मालूम नहीं चल सका. जेल जाने की जो वजह बताई गई थी, उसमें कहा गया था कि मदन यादव और लक्ष्मण ने सुमित नाम के शख्स से 10 हजार रुपये छीन लिए हैं और जान से मारने की धमकी दी है. सुमित ने 23 दिसंबर की सुबह ही रांची के लोअर बाजार थाने में केस दर्ज करवाया था. जब लालू को सजा का ऐलान हो गया, तो पैसे छीनने के आरोपी मदन और लक्ष्मण लोअर बाजार थाने पहुंचे और खुद को सरेंडर कर दिया. इसके बाद पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. उस वक्त तक भी पुलिस को पता नहीं था कि जिन दो लोगों को उन्होंने 10 हजार रुपये छीनने के आरोप में जेल भेजा है, वो कौन हैं.
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23 दिसंबर को ही लालू को जेल भेज दिया गया था. उसी दिन उनके दो सहयोगी भी लूट के एक मामले में जेल चले गए.

इस बात का पहला शक मदन के पड़ोसियों को हुआ. जब कई दिनों तक मदन नहीं दिखा, तो उन्होंने कानाफूसी शुरू कर दी. कुछ बातें पुलिस के कानों तक भी पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू हुई. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जिस मदन यादव को 10, 000 रुपये छीनने के लिए पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वो करोड़पति है. मदन यादव के पास रांची में दो बड़ी गोशालाएं, एक बड़ा सा घर और एक एसयूवी भी है. मदन ने अभी हाल ही में रांची के वीवीआईपी इलाके साकेतनगर में नया घर भी बनवाया है. वह लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का नेता भी है. पिछली बार भी जब लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा जेल में रखा गया था, तो मदन यादव ऐसे ही किसी छोटे मुकदमे में जेल चला गया था. वहीं लक्ष्मण यादव वो शख्स है, जो लालू यादव का खास सेवादार है. लालू के खाने से लेकर उनकी दवाइयों तक का जिम्माा लक्ष्मण यादव के पास ही है. लक्ष्मण वही है, जो पिछले साल एक टीवी चैनल के ऑडियो क्लिप में सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि जेल में बंद पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने लालू यादव से बातचीत करने के लिए फोन किया था.
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लालू की पार्टी ने दोनों को पार्टी का नेता बताया है, वहीं विपक्ष लगातार इसपर सवाल उठा रहा है.

वहीं अखबार प्रभात खबर का दावा है कि जिस सुमित ने मदन यादव के खिलाफ केस दर्ज करवाया है, वो रिश्ते में मदन का सगा भतीजा है. यानि सुमित के पिता और मदन यादव सगे भाई हैं और एक ही मोहल्ले में आस-पास रहते हैं. खुद सुमित की मां ने इस बात को माना है कि मदन उनके देवर हैं. हालांकि सुमित ने ऐसे रिश्ते से इनकार कर दिया था. अखबार के मुताबिक सुमित की मां को इस पूरे मामले के बारे में कुछ पता नहीं था, इसलिए उसने साफ तौर पर सबकुछ मान लिया है. पुलिस ने भी जब मामले की सच्चाई पता की, तो पूरा केस फर्जी निकला. इसके बाद पुलिस ने कोर्ट से दोनों आरोपियों को रिहा करने के लिए आवेदन दिया. कोर्ट ने भी पुलिस की बात मान ली और दोनों को 10 जनवरी की शाम को  रिहा कर दिया गया.
जेल मैनुअल कुछ और कहता है
लालू यादव को कोर्ट ने साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है. वहीं मदन और लक्ष्मण सिर्फ आरोपी हैं. जेल अधीक्षक का कहना है कि जेल में कोई भी काम सजायाफ्ता ही कर सकता है. लालू यादव को भी सजा सुनाई गई है, तो वो माली का काम करेंगे. लेकिन मदन और लक्ष्मण सिर्फ आरोपी हैं, ऐसे में उनसे काम नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा बिरसा मुंडा जेल सेंट्रल जेल है. और किसी भी जेल में सजायाफ्ता और आरोपी को एक साथ नहीं, अलग-अलग ही रखा जाता है. जेल मैनुअल के मुताबिक जेल के जनरल वार्ड में रखा गया था, जबकि लालू यादव जेल की हाई सिक्युरिटी वाले अपर डिवीजन सेल में बंद हैं.
एक और मामले में आएगा लालू पर फैसला
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चारा घोटाले में चाइबासा की ट्रेजरी से भी पैसे निकाले गए थे, जिसकी सुनवाई पूरी हो गई है. इस मामले में भी लालू के साथ जगन्नाथ मिश्रा आरोपी हैं.

चारा घोटाले में देवघर की ट्रेजरी से पैसा निकाले जाने के मामले में कोर्ट ने लालू यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है. वहीं रांची की ही विशेष सीबीआई अदालत में चाईबासा ट्रेजरी से 35 करोड़ 62 लाख रुपये की निकासी के मामले में बहस पूरी हो गई है. मामला विशेष जज स्वर्णशंकर प्रसाद सिंह के सामने है, जिसमें कभी भी फैसला आ सकता है. इसके अलावा दुमका कोषागार से 3 करोड़ 97 लाख रुपये निकाले जाने के मामले में भी गवाही पूरी हो गई है. इसके अलावा डोरंडा कोषागार से फर्जीवाड़ा करके 184 करोड़ रुपये निकालने के मामले में 100 गवाहों की गवाही होनी है. ये सारे मुकदमे एक साथ रांची की विशेष सीबीआई अदालत में अलग-अलग जजों के सामने हैं.


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