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तीसरी शादी करने वाले इमरान ख़ान ने अपनी एक बेटी को अपना मानने से इनकार कर दिया था

बेशुमार मुहब्बतें नाकाम रहने के बावजूद इमरान ख़ान ने तीसरी शादी की है.

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फोटो - thelallantop
1985 में हृषिकेश मुखर्जी की एक फिल्म आई थी. नाम था 'झूठी'. रेखा, अमोल पालेकर, राज बब्बर की फिल्म. फिल्म में एक सीन है. राज बब्बर से पहली मुलाक़ात के बाद रेखा घर लौटी है और अपनी बहन को उनके बारे में बता रही है. कहती है,
"क्या डैशिंग पर्सनालिटी है दीदी! साइड से देखो तो इमरान ख़ान लगता है!"
एक बॉलीवुड फिल्म में किसी पाकिस्तानी शख्स़ का ज़िक्र ग्रीक गॉड की तरह होना इस बात को मोहरबंद करता है कि उसका वजूद कितना तिलिस्माई होगा. जनाना ख़ूबसूरती के कसीदे पढ़ते ढेरों ग्रंथ रचे गए हैं. मरदाना कशिश को बहुत कम बार सराहा गया है. इमरान ख़ान उस दुर्लभ ब्रीड के फ्लैग बेयरर हैं, जिन्हें सेक्स सिंबल के तौर पर जाना-पहचाना गया. 70-80 का दशक तो ऐसा था कि उनके प्रति लड़कियों की दीवानगी का कोई ओर-छोर नहीं था. इमरान की क्रिकेट, इमरान की लुक, इमरान का लहजा, इमरान की लीडरशिप क्वालिटीज़, इमरान का चार्म. हर लिहाज़ से ये शख्स़ डिज़ायरेबल था. यानी ऐसा, जिसको पाने की तमन्ना करते हुए जिया जाए. कोई हैरानी नहीं कि इमरान ख़ान का नाम बेशुमार मुहब्बतों की कहानियों में गुंथा पाया गया. अगर ऐसा न हुआ होता तो हैरानी होती.
जवानी में इमरान ख़ान.
जवानी में इमरान ख़ान.

जिस समाज में एक से ज़्यादा प्रेम-संबंध चारित्रिक पतन का लक्षण माना जाता है, वहां तमाम किस्से-कहानियों के बावजूद जनता के दिलों पर राज करना एक दुर्लभ कला है. इसी के बूते इमरान ख़ान अपनी सफलता का कारवां क्रिकेट के मैदान से राजनीति की रपटीली राह पर ले आए. कामयाबी से. आज उन्हें बेहिचक पाकिस्तानी पॉलिटिक्स की कद्दावर शख्सियत कहा जा सकता है. बाज़ लोग तो ये भविष्यवाणी भी करते हैं कि एक दिन उनका पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनना तय है.
गुलाब होना बड़ा झंझट का काम है वैसे! जब आप गुलाब होते हैं न तो भले ही रंग-ओ-बू की बेशुमार दौलत पर आपका कब्ज़ा हो, साथ ही पूरे गुलिस्तान की नज़र के घेरे में हर घड़ी रहने के लिए अभिशप्त भी होते हैं. आपकी हर मूव पर नज़र बनी रहती है. हर गुल-ओ-खार से आपकी नजदीकी को जांचा-परखा जाता है. इमरान ख़ान भी अपवाद नहीं रहे. तमाम उम्र उनकी लव-लाइफ, अख़बार के कॉलमों से लेकर बुद्धू बक्से तक डिस्कस की जाती रही. अब इमरान 65 साल के हो गए हैं. यहां से उनकी गुजश्ता ज़िंदगी पर नज़र दौड़ाई जाए तो नाकाम मुहब्बतों का एक रंगीन दस्तावेज सी लगती है. 65 की उम्र में तीसरी शादी से खलबली मचा रहे इमरान की पिछली नाकाम शादियां और उससे ज़्यादा नाकाम अफेयर्स पर एक नज़र मारते हैं. कहना न होगा कि ये कोशिश किसी की पर्सनल लाइफ को कुरेदना नहीं बल्कि एक करिश्माई शख्स़ की मुहब्बतों की दुनिया से करीबियत करना है.
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पहले वो किस्से, जिनके सफ़र में शादी नाम का डेस्टिनेशन कभी था ही नहीं.

ज़ीनत अमान

बॉलीवुड की उन हीरोइन्स की जमात का नाम जिनकी बोल्डनेस हमेशा चर्चाओं में रही. कहते हैं सत्तर के दशक में जब-जब भी पाकिस्तान का भारत दौरा हुआ, ज़्यादातर बार ज़ीनत से इमरान की मुलाक़ात ज़रूर हुई. कुछ लोग कसमिया ये ऐलान करते दिखाई देते हैं कि ज़ीनत से मुलाक़ात के अगले दिन मैदान पर इमरान के साथी उन्हें ज़्यादा थके हुए लगने का ताना देते थे. कहना न होगा कि ज़ीनत-इमरान की नज़दीकी से पूरा ड्रेसिंग रूम वाकिफ था. कुछ अरसा दोनों तरफ बराबर गर्मजोशी रही, जो वक़्त के साथ कम होती गई.
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बेनज़ीर भुट्टो

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान बनते-बनते बनेंगे लेकिन इस सीट पर बैठ चुकी एक शख्सियत के साथ उनका नाम जुड़ चुका है अतीत में. इमरान ख़ान की कहानी किताब की शक्ल में लिखने वाले राइटर क्रिस्टोफर सैंडफोर्ड ने अपनी किताब में इसका ज़िक्र किया था. राजनीति में अपनी आमद के बाद से ही इमरान ख़ान बेनज़ीर को अपने निशाने पर रखते आए थे. ये तक कहा जाता है कि उनका पॉलिटिक्स में कदम रखने का मकसद ही बेनज़ीर की मुखालफ़त था. कई मौकों पर इमरान और बेनज़ीर ने एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी की है. ये सिलसिला 2007 में हुई बेनज़ीर की असमय मौत तक चलता रहा. ऐसे में उनके बीच किसी रूमानियत की बात थोड़ी चौंकाती तो है.
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क्रिस्टोफर अपनी किताब में लिखते हैं कि बेनज़ीर किसी ज़माने में इमरान पर बुरी तरह फ़िदा थी. उन्होंने ही सबसे पहले इमरान को 'लाहौर का शेर' कहा था. दोनों जवान थे, उमंगों से भरे थे और ज़्यादा अहम बात ये कि पाकिस्तान के बंद माहौल से दूर ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की खुली हवा में कुलांचे भर रहे थे. उस वक़्त इमरान क्रिकेट की दुनिया में अभी उभर ही रहे थे. एक तरफ क्रिकेट का सितारा जो अपनी मिकनातीसी कशिश के सदके मशहूर हो रहा था. दूसरी तरफ पाकिस्तान के पीएम की सुपुत्री जो मग़रिब की आकर्षक उन्मुक्तता और मशरीक़ की बुनियादी तहज़ीब का मिला-जुला संस्करण थी. क्यूपिड ने स्ट्राइक तो करना ही था! कहते हैं कि उस मुख़्तसर दौर में दोनों कई महफिलों में साथ पाए गए. दोनों के बीच जिस्मानी ताल्लुकात होने की बातें भी हुईं, जिनसे हमें कोई मतलब नहीं.
benazir

ये तक दावा किया जाता है कि इमरान ख़ान की मां शौकत खानम ने दोनों की शादी कराने की पुरज़ोर कोशिश की. बावजूद इसके ये रिश्ता ज़्यादा चला नहीं. कहते हैं बेनज़ीर बहुत पज़ेसिव थी और इमरान का और लड़कियों के साथ नाम आना उन्हें बिल्कुल गवारा न था. यहां आकर बात फंस गई और मुहब्बत का फूल मुरझा गया.
बाद में राजनीति के दौर में दोनों ने एक-दूसरे पर काफी ज़ुबानी हमले लिए. हम कोई साहित्यकार या कवि होते तो कहते, "मुहब्बत जब नफरत में तब्दील हो जाती है, तो विद्वेष की इंतेहा को छूने लगती है."

एमा सार्जंट

यूं कहा जाता है कि आर्टिस्ट एमा सार्जंट वो इकलौती महिला है, जिसे इमरान ख़ान ने पूरी शिद्दत से चाहा. 1982 में एक डिनर पार्टी में हुई उनकी मुलाक़ात के बाद अगले चार सालों तक दोनों का साथ बना रहा. एमा वहां-वहां गईं, जहां-जहां इमरान पहुंचे. भले ही वो पेशावर के जंगलों में शिकार करना हो, या ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट दौरा. ये साथ शादी में तब्दील हों चुका होता बशर्ते एमा ने पाकिस्तान का उनके लिए असंभव लाइफ-स्टाइल अपनाने से दहशत न खाई होती. एमा के लिए अपना काम सर्वोपरि था. वो किसी बंद समाज में पति की आइडेंटिटी के सहारे जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती थी. इस प्रेम-कहानी का असमय अंत लाज़मी था.
एमा सार्जंट.
एमा सार्जंट.

सीता व्हाइट

सीता व्हाइट इमरान ख़ान की ज़िंदगी का सबसे कंट्रोवर्शियल चैप्टर है. वो बारूद जिसकी आंच आज भी उनके राजनीतिक करियर का दामन पकड़ लेती है. नवाज़ शरीफ का तो पसंदीदा शगल है इमरान ख़ान को चुप कराने के लिए सीता व्हाइट का नाम लेना. सीता उन चुनिंदा लड़कियों में से एक थी जो इमरान से शादी करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी. फिर चाहे वो इस्लाम कबूलना हो या पाकिस्तान शिफ्ट कर जाना. हालांकि ये बात थोड़ी अजीब ही है कि उन्होंने अपना असली नाम ऐना-लूसिया छोड़कर जो नाम अपनाया, वो कोई इस्लामी न होकर एक हिंदू देवी का था.
सीता, इमरान और टिरियन.
सीता, इमरान और टिरियन.

इमरान के साथ मुख़्तसर वक्फे की कोर्टशिप में सीता प्रेग्नंट हो गई. इमरान ने बाप होना कबूल तो किया लेकिन मामले को कुछ समय के लिए गुप्त रखने की गुजारिश की. 'कुछ समय' की कोई समय-सीमा तय नहीं थी. सीता ने काफी अरसा इसे गुप्त रखा लेकिन कभी तो धीरज छूटना ही था. उन्होंने इमरान से अपनी बेटी को पिता का नाम देने की दरख्वास्त की. इमरान ने मना कर दिया. सीता कोर्ट जा पहुंची. मामला खूब बिगड़ा. पाकिस्तान में इमरान की खूब फजीहत हुई. यहां तक कि कोर्ट का फैसला भी इमरान के खिलाफ गया. कोर्ट ने माना कि बच्ची 'टिरियन जेड व्हाइट' के पिता इमरान ख़ान ही हैं.
बाद के दिनों में जब टिरियन बड़ी हो गई, जेमिमा ने ये तस्वीर इन्स्टाग्राम पर डाली थी.
बाद के दिनों में जब टिरियन बड़ी हो गई, जेमिमा ने ये तस्वीर इन्स्टाग्राम पर डाली थी.

बावजूद इसके इमरान ने बेटी को नहीं अपनाया. तब तक, जब तक सीता की मौत न हो गई. 2004 में सीता की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. उसके बाद कहीं जाकर इमरान ने बच्ची को अपनाने का इरादा ज़ाहिर किया.
इस सिलसिले में न जाने क्यों सीता के पिता से जुड़ी एक बात याद आती है. उनकी 1995 मौत हो गई थी. उसके तुरंत बाद सीता को उनका लिखा एक नोट मिला. लिखा था, "जब आप मरते हो, आप अकेले मरते हो."
इनके अलावा जो नाम इमरान की ज़िंदगी में समय-समय पर दाखिल हुए वो थे एक्ट्रेस स्टेफनी बीचम, एक्ट्रेस गोल्डी हॉन, रॉयल लेडी लीज़ा कैम्पबेल, जर्नलिस्ट कैरोलिन केलेट, लेखक-पत्रकार सुज़ाना कांस्टंटाइन. इतनी मुहब्बतों से उलझते इमरान ख़ान का निकाह के बंधन में बंधना मुसलसल टलता रहा. आख़िरकार जब उन्होंने अपनी पहली शादी की, उनकी उम्र 43 साल हो चुकी थी.
लिज़ा कैम्पबेल.
लिज़ा कैम्पबेल.

शादियां, जो हमेशा किसी सस्पेंस मूवी की तरह रिलीज़ हुईं

इमरान ख़ान की हर शादी 'पहले ना, फिर हां' के ढर्रे पर चली है. हर बार पहले अफवाह आती, फिर उसका खंडन आता और आखिर में स्वीकारोक्ति. ये रिकॉर्ड तीसरी शादी तक तो कायम है, आगे अल्लाह जाने!.

वो बीवी, जिसने मुहब्बत के लिए 'तीसरी दुनिया में नौ साल' बर्दाश्त किए

जेमिमा मार्सेल गोल्डस्मिथ. एक ब्रिटिश फाइनान्सर की पत्रकार बेटी. वो पहली लड़की जो इमरान ख़ान की लव-ट्रेन को शादी के मुकाम तक लाने में कामयाब रही. 16 मई 1995 को उन्होंने एक पारम्पारिक इस्लामी फंक्शन में इमरान से निकाह कर लिया. कुछ ही महीने पहले जेमिमा ने इस्लाम कबूल लिया था. जेमिमा बताती हैं कि इस्लाम अपनाने के पीछे उस बेकरारी का हाथ था कि इमरान का समाज और मुल्क उन्हें कबूल करे. ये मुहब्बत ही थी जिसने उस ब्रिटिश लड़की को पाकिस्तान की कट्टरता के लिए बदनाम आबोहवा में कदम रखने पर मजबूर किया. ब्रिटेन की खुली फिज़ा में पली-बढ़ी जेमिमा के लिए महज़ 21 साल की उम्र में ये किसी क्रांति से कम नहीं था. शायद उनका ये जुनून ही था जिसने उन्हें पाकिस्तान से बेशुमार प्यार दिलाया. अपने चहेते क्रिकेटर की बीवी को पाकिस्तान ने खूब मुहब्बतें दी. आज भी जेमिमा को बेशुमार प्यार हासिल है.
imran jemima

पाकिस्तान में बिताए नौ बरसों में जेमिमा ने कई उतार-चढ़ाव देखें. चाहे वो दो बच्चों की पैदाइश की ख़ुशी हो या पाकिस्तान सरकार द्वारा किए गए केस से से उपजी बेइज्ज़ती. 1999 में पाकिस्तान ने उनपर इल्ज़ाम लगाया कि वो गैरकानूनी ढंग से इस्लामिक दौर की दुर्लभ टाइल्स को मुल्क से बाहर ले गई हैं. जेमिमा का कहना था कि ये उनके पति की पॉलिटिक्स में पलीता लगाने के लिए की जा रही साजिश है. बहरहाल, मामला इतना बिगड़ा की उन्हें कुछ समय के लिए पाकिस्तान छोड़ना पड़ गया. उनकी गिरफ्तारी तक की नौबत आ गई थी. बाद में जब नवाज़ शरीफ का तख्ता पलट कर परवेज़ मुशर्रफ गद्दीनशीन हुए, उन्हें दोषमुक्त किया गया. पाकिस्तान के संस्कृति और पुरातत्व मंत्रालय ने उन टाइल्स की जांच की और बताया कि वो इस्लामिक दौर की नहीं हैं. तब जाकर जेमिमा और इमरान की जान छूटी.
imran jemima pic

जेमिमा ख़ान इमरान की ज़िंदगी का सबसे सशक्त संबल रहीं. इमरान की राजनैतिक महत्वकांक्षाओं को उन्होंने भरपूर समर्थन दिया. 22 जून 2004 को दोनों ने तलाक़ लेने की घोषणा कर दी. बकौल जेमिमा पाकिस्तान में रहना दिन ब दिन मुश्किल होता जा रहा था. इमरान और जेमिमा का सेपरेशन उन चुनिंदा घटनाओं में से एक है, जहां अलगाव के बाद भी चीज़ों ने बदसूरत शक्ल नहीं अख्तियार की.
केयरिंग, दयालु जेमिमा के नेचर की कोमलता ने ही शायद डिवोर्स के बाद भी उन दोनों की दोस्ती बनाई रखी. फिलहाल जेमिमा अपने दोनों बेटों के साथ ब्रिटेन में रहती हैं. आज भी किसी आम पाकिस्तानी इमरान ख़ान फैन से पूछा जाए कि इमरान की बीवी के तौर पर उनकी पहली चॉइस क्या है, तो वो बेहिचक बोलेगा, "जेमिमा भाभी".
Jemima+Khan+Protestors+Attend+Anti+war+Assembly+CM31F6N8rIFl

वो 'तब्दीली' जो ज़्यादा अरसा नहीं रह सकी

जहां इमरान ख़ान की पहली शादी नौ साल सर्वाइव कर गई, दूसरी शादी का वक्फा सालों से घटकर महीनों में रह गया. महज़ नौ महीने चली ये शादी. दूसरी दुल्हन थी बीबीसी की पत्रकार रेहम ख़ान, जिन्हें 'वेदर गर्ल' भी कहा जाता था. वो पहले बीबीसी पर मौसम का हाल जो बताया करती थीं.
reham bbc

2014 में एक टॉक शो के दौरान दोनों में करीबियत हुई, जिसका भरपूर विरोध हुआ. इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ से लेकर उनकी फॅमिली तक ने इस रिश्ते के खिलाफ वोट दिया. पीटीआई के एक वरिष्ठ नेता ने तो रेहम पर राजनैतिक महत्वकांक्षा पालने का आरोप तक लगाया. बहरहाल, जनवरी 2015 में दोनों ने शादी कर ली, जो बदकिस्मती से दूसरा कैलेंडर ईयर तक न देख सकी.
reham asians magazine

रेहम से अलगाव इमरान के लिए जेमिमा केस जैसा नहीं रहा. अक्टूबर 2015 में अलग होने के बाद रेहम ने इमरान एंड फॅमिली पर काफी इल्ज़ामात लगाए, जिनमें सबसे अहम एक खुदमुख्तार औरत की आइडेंटिटी को ख़त्म करना था. अपने करियर के लिए जुनूनी रेहम पर, बकौल उनके, चार-दीवारी में कैद रहने का दबाव डाला जा रहा था. रेहम का कहना था कि 'प्यार' और 'प्रोटेक्शन' के नाम पर उनकी आज़ादी को छीना जा रहा था. वजह चाहे जो हो, इमरान की ये शादी ज़्यादा दिन नहीं चली.
reham khan first show after marriage

अलग होने के बाद रेहम ने इमरान ख़ान का मज़ाक एक और तरह से भी उड़ाया. दो महीने बाद ही वो नियो टीवी पर एक शो लेकर आई जिसका नाम था 'तब्दीली'. ये सीधे-सीधे इमरान ख़ान पर तंज था. 'तब्दीली' इमरान की पार्टी का मोटो था. उनका स्लोगन ही था 'तब्दीली आ नहीं रही, तब्दीली आ गई है'. कई सारी सभाओं में इमरान को तब्दीली के नारे के साथ चीखता हुआ देखा जा चुका था. बहरहाल, इस मामले में इमरान ने कभी कुछ नहीं कहा. इमरान की दूसरी शादी महज़ एक अप्रिय एडवेंचर बनके रह गई.
reham tabdeeli

इमरान की तीसरी शादी के बाद रेहम ख़ान ने बड़ी अप्रिय बातें भी बोली थीं. सर से पैर तक बुर्के में छिपी इमरान की तीसरी बीवी की तस्वीरों को उन्होंने शर्मनाक करार दिया था. मॉडर्न पाकिस्तान में बीवी को यूं लबादे में ढंककर पेश करना उन्होंने ‘राजनैतिक आत्महत्या’ करार दिया. इसके अलावा उन्होंने इमरान पर बेवफाई का आरोप भी लगाया. कहा कि जब वो रेहम के साथ निकाह में थे, उस वक़्त भी उनके बुशरा से ताल्लुकात थे. रेहम ने कहा है कि इमरान भरोसे के लायक नहीं हैं.
बहरहाल, इमरान ख़ान ने इन बातों का कोई जवाब नहीं दिया है.

तावीज़ लेने गए और प्यार कर बैठे

इमरान की हालिया दुल्हन बुशरा मानिका एक स्पिरिचुअल गुरु हैं. पाकिस्तानी पंजाब के पाकपट्टन में बहुत मशहूर हैं. उन्हें वहां 'पिंकी बीवी' के नाम से पुकारा जाता है. गौरतलब है कि बुशरा मानिका कभी हैट-दुपट्टे में सहज रहा करती थी लेकिन आजकल मुकम्मल परदा करती हैं. हाल ये है कि अपनी शादी की तस्वीरों में भी उनका चेहरा नहीं नज़र आ रहा.
bushra imran

कहते हैं कि इमरान ख़ान का बुशरा से पहला साबका 2015 में पड़ा था. पिंकी बीवी ने इमरान ख़ान के करीबी जहांगीर तरीन की लोधरा उप-चुनावों में जीत की भविष्यवाणी कर दी थी. ऐसा ही हुआ. जहांगीर जीत गए. नतीजतन इमरान अपने लिए कोई नुस्खा, कोई तावीज़ मांगने बुशरा के दरबार में पहुंचे. पहली मुलाक़ात को कई सारी मुलाकातों ने फॉलो किया. फिर प्यार पिक्चर में आया. जनवरी 2018 में दोनों ने सगाई कर ली. हालांकि इस शादी को भी छिपाने की इमरान और टीम की भरपूर कोशिश रही. आख़िरकार 18 फ़रवरी को ख़बर आई कि दोनों ने निकाह कर लिया है. निकाह बुशरा के भाई के घर संपन्न हुआ. 40 साल की बुशरा की अपनी पहली शादी से पांच संताने हैं.
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अपनी नई बीवी की सलाहियत में इमरान का तगड़ा अकीदा है. ये इस बात से भी ज़ाहिर होता है कि बुशरा ने दो साल पहले इमरान को जो सलाह दी रही, उसपर वो पूरी तरह अमल करते हैं. बुशरा ने कहा था कि बुरा वक़्त टालने के लिए वो पहाड़ों में समय गुज़ारा करें. इमरान हर साल मई-जून में पहाड़ों पर निकल लेते हैं.
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पिंकी पीर के साथ अपनी ये नई इनिंग इमरान ख़ान कितना अरसा चलाते हैं, ये अभी भविष्य के गर्भ में हैं. हम तो उन्हें सिर्फ शुभकामनाएं ही दे सकते हैं.


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