मोगादिशू के अस्पतालों के बाहर खून दान करने वालों का तांता लग गया है. रक्तदान करने वालों में राष्ट्रपति मुहम्मद अब्दुल्लाही मुहम्मद भी शामिल थे. उन्होंने इस हमले के लिए अल-शबाब को ज़िम्मेदार ठहराया है. हम इस दुर्दांत आतंकी संगठन के बारे में जानेंगे जो कायरों की तरह धमाके करता है, फिर उनकी ज़िम्मेदारी लेने से बचता है.

धमाके की जगह के पास ही डीज़ल या पेट्रोल का एक टैंकर खड़ा था, जिसने धमाके के असर को कई गुना बढ़ा दिया.
क्या है ये अल-शबाब?
अल-शबाब एक आतंकवादी संगठन है. दुनिया के जो सबसे खौफनाक और वहशी आतंकवादी गुट हैं, उनसे बड़े नज़दीकी रिश्ते हैं इसके. एक वक्त में बहुत बड़ा इलाका इनके कब्ज़े में था. 2006 की बात है. मोगादिशू पर यूनियन ऑफ इस्लामिक कोर्ट्स (UIC) का कब्जा था. ये असल में शरिया अदालतों का एक संगठन था. एकदम कट्टर इस्लामिक कानूनों को मानने और मनवाने वाला. UIC का सरगना था शरीफ शेख अहमद. 2006 में पड़ोसी इथियोपिया की सेना ने UIC को हरा दिया. इसी UIC की कट्टरपंथी युवा शाखा है अल-शबाब.
UIC ने ट्रांज़िश्नल फेडरल गर्वनमेंट ऑफ सोमालिया (TFG) को चुनौती दी. उसके खिलाफ खड़ा हुआ और मोगादिशू पर कब्जा कर लिया. TFG सोमालिया की अंतरिम सरकार थी. अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त. इसका कार्यकाल 20 अगस्त, 2012 को खत्म हुआ. फेडरल गर्वनमेंट ऑफ सोमालिया (FGS) अस्तित्व में आई. FGS, माने सोमालिया की सरकार.

अल शबाब में अमरीका और ब्रिटेन से आकर लड़ाके शामिल हुए हैं (फोटोःरॉयटर्स)
अल-शबाब पिछले कुछ समय से लगातार मज़बूत हो रहा है. बहुत बड़ी तादाद में विदेशों से लोग जाकर उसके साथ मिल गए हैं. आतंकवादी बन गए हैं. अड़ोस-पड़ोस के अफ्रीकी देशों से तो गए ही हैं, अमेरिका और यूरोप से भी गए हैं. अमेरिका और ब्रिटेन, दोनों ने ही अल-शबाब को आतंकवादी संगठन करार देते हुए प्रतिबंधित किया हुआ है. इस्लामिक स्टेट (ISIS), अल-कायदा और नाइजीरिया के बोको हरम से भी इसके रिश्ते हैं.
धमाके करता है, ज़िम्मेदारी नहीं लेता अल शबाब
अल-शबाब ने फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. अल-शबाब के लिए ये कोई नई बात नहीं है. इसके इतिहास में भरा हुआ है ये. वो पहले भी कई बार मोगादिशू में धमाके कर चुका है. ज़्यादातर मामलों में ये जिम्मेदारी नहीं लेता. उसको लगता है कि ज़िम्मेदारी लेने से सोमालिया के आम लोगों के बीच इसकी छवि खराब होगी, मगर लोग अब उसकी चालाकी को समझ रहे हैं. अल-शबाब का पूरा ज़ोर फरवरी 2017 में सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति अब्दुल्लाही की सरकार को अस्थिर करना है.

अल शबाब कट्टरपंथी इस्लाम की विचारधारा को मानता है. अपने कब्ज़े के इलाकों में वो अपनी अदालतें लगाता है और लोगों को सज़ा सुनाता है (फोटोः रॉयटर्स)
अल-शबाब की विचारधारा क्या है ?
अल-शबाब इस्लाम के सबसे कट्टर रूप को मानता है. इसका इस्लाम सऊदी अरब वाला वहाबी इस्लाम है. सोमालिया में ज़्यादातर लोग मुसलमान हैं, मगर वो नरमपंथी हैं. सूफी मत में यकीन रखते हैं. वही सूफी, जिसमें इंसान खुद को अल्लाह की माशूका मानता है. अल्लाह से डरता नहीं, इश्क करता है. अल-शबाब ने कई इलाकों पर कब्ज़ा किया हुआ है. इन जगहों पर शरिया (इस्लामिक कानून) का सबसे सख़्त राज चलता है. कोई औरत अपने पति के अलावा किसी और पुरुष के साथ संबंध बनाए तो बीच चौराहे पर पत्थर मार-मारकर जान ले लेते हैं. कोई चोरी करता हुआ पकड़ा जाए तो उसके हाथ काट देते हैं. कानून तो बस नाम का है. असल में है तो वहशीपन ही.
कितना इलाका है अल-शबाब के पास?
2011 में अल-शबाब को मोगादिशू छोड़ना पड़ा. इसके कब्ज़े में किसमायो का बंदरगाह था. इनकी कमाई का सबसे बड़ा साधन था ये पोर्ट. ये भी सितंबर, 2012 में हार गए. आज की तारीख में ये ज्यादातर शहरी इलाके हार चुका है. हां, ग्रामीण इलाकों में इसकी भरपूर मौजूदगी है. इससे पहले, 2008 में अफ्रीकन यूनियन (AU) की सेनाओं ने अल-शबाब से लड़ने के लिए सोमालिया पर हमला किया. AU की फौज ज़मीन पर लड़ रही थी. अमेरिका आसमानी रास्ते में मदद कर रहा था.

सोमालिया और अफ्रीकी यूनियन की सेना के दबाव में अल शबाब के कई लड़ाकों ने सरेंडर भी किया है (फोटोःरॉयटर्स;2012)
अब आप पूछेंगे कि AU क्या है? AU वैसे ही है जैसे यूरोपियन यूनियन (EU). इसमें अफ्रीकी महादेश के 55 देश शामिल हैं. तो AU के हमले में अल-शबाब का सरगना अदेन हाशी आयरो मारा गया. उसका उत्तराधिकारी अहमद अब्दी गोदाने भी निपट गया. फिलहाल अल शबाब का सरगना अहमद उमर है. इसको अबू उबैदा भी बोलते हैं.
सोमालिया के पड़ोसी देशों को भी तंग कर रखा है
अहमद उमर सोमालिया के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी हमले करता है. अमेरिका ने उस पर इनाम रखा है. उसकी जानकारी देकर उसे पकड़वाने वाले को करीब साढ़े छह करोड़ रुपए मिलेंगे. अल-शबाब को कई मोर्चों पर एकसाथ लड़ना पड़ रहा है. ज़ाहिर है, ये कमज़ोर हुआ है. फिर भी आत्मघाती हमले करता रहता है. इथियोपिया की फौजें जब सोमालिया से लौट गईं तो इसका भी इसे फायदा मिला. अल-शबाब ने कई शहरों पर फिर से कब्ज़ा कर लिया.

अल शबाब नियमित रूप से सोमालिया की सरकार को कमज़ोर करने के लिए मोगादिशू में हमले करता रहता है (फोटोःरॉयटर्स)
2016 में अल-शबाब ने धमकी दी थी. कहा था, हमले और तेज़ कर देगा. उसने ऐसा किया भी. सोमालिया के अलावा पड़ोसी देशों में भी ये कई हमले करता है. केन्या में तो कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया इसने. दो अप्रैल, 2015. केन्या की एक यूनिवर्सिटी पर इसने हमला किया. इसके बंदूकधारी आतंकियों ने 148 लोगों को वहां भून डाला. उनके निशाने पर ईसाई छात्र थे. जनवरी 2016 में इसने सोमालिया स्थित केन्या के एक सैन्य शिविर पर हमला किया. इसमें करीब 180 सैनिक मारे गए थे.
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