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शशि थरूर की भारी मांग - लीगल गांजा, लीगल भांग

इससे पहले बाबा रामदेव के राइट हैंड और पतंजलि के CEO बालकृष्ण ने भी यही मांग की थी.

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फोटो - thelallantop
शाम को फेसबुक चला रहा था. भारी अंग्रेज़ी में अंग्रेजों की धज्जियां उड़ाने वाले शशि थरूर का एक पोस्ट दिखा. मुझे लगा ब्रिटिश राज की शान जूतों से कुचलने वाला एक और पोस्ट होगा. लेकिन हेडिंग पढ़ी तो करंट लग गया. खुद देख लीजिये -
शशि थरूर चाहते हैं कि भारत मरिजुआना (गांजा) लीगल कर दे. आपको क्या लगता है?
आर्टिकल में मालूम चला कि थरूर ने इसके लिए तर्क दिए हैं. उनका मानना है कि मरिजुआना को 'रेगुलेट' करने से उससे जुड़ा करप्शन और क्राइम घटेगा. ये नेताओं का चुनाव के समय आने वाला विवादित बयान नहीं है. बबुआ, ये उंचे लेवल की बातें बोली हैं. उन्होंने तर्क दिया है:
"लोगों को अंदाज़ा नहीं रहता कि जो 'माल' वे फूंक रहे हैं, वह कितनी THC स्ट्रेंथ वाला है."
THC? हमें तो गांजे का धुआं पता है. ये THC क्या होता है? थरूर की बात समझने के लिए पहले टेक्निकल बातें समझी जाएं. पॉइंट-बाई-पॉइंट ज़रूरी बातें बता देता हूं.
'हाई'लाइट्स 
# गांजे में THC ही वो केमिकल एलिमेंट है जिससे नशा चढ़ता है. गंजेड़ियों की भाषा में बोलें तो इसी से 'हाई' होते हैं. THC यानी Tertrahydrocannabinol.
एक और एलिमेंट होता है - CBD. CBD के 'साइकोएक्टिव इफेक्ट्स' नहीं होते. मतलब ये दिमाग पर ऐंसे असर नहीं करता जिससे हाई होते हैं अर्थात नशा चढ़ता है. CBD यानी Cannabidiol.
# गांजा, चरस और भांग तीनों एक ही पौधे के अलग-अलग हिस्सों से बनते हैं. उस पौधे का साइंटिफिक नाम 'कैनेबिस' है. इसी पौधे को मारिजुआना, हेम्प और वीड के नाम से भी जाना जाता है.
गांजे को भारत के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर चिलम में सूटा जाता है. बैचलर्स का ध्यान बोंग और जॉइंट ज्यादा आकर्षित करते हैं.
गांजे को भारत के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर चिलम में सूटा जाता है. यूथ का ध्यान बोंग और जॉइंट ज्यादा आकर्षित करते हैं.

# कैनेबिस की दो जातियां बहुत फेमस हैं- कैनेबिस इंडिका और कैनेबिस सेटाइवा.
# कैनेबिस पौधे के किस हिस्से से क्या बनता है?
  • 'चरस' कैनेबिस पौधे के रेज़िन से बनता है. रेज़िन गोंद टाइप का द्रव्य होता है जो पेड़ की डालियों पर लटकता है.
  • 'गांजा' इसी पौधे के फूल को सुखा के उसे खूब दबा के तैयार किया जाता है.
  • 'भांग' को कैनेबिस के बीज और पत्तियों को पीस-पीस कर तैयार किया जाता है.
# मरिजुआना को रेग्यूलेट करने के लिए दो केटेगरी में बांटा गया है - 'मेडिकल मरिजुआना' और 'रिक्रिएशनल मरिजुआना'. मेडिकल मरिजुआना यानी औषधीय रूप में इस्तमाल किए जाने वाला मरिजुआना. मेडिकल मरिजुआना में THC कंटेंट कम और CBD कंटेंट ज्यादा होता है. और रिक्रिएशनल मरिजुआना यानी ज्यादा THC कंटेंट वाला मरिजुआना. जो मेडिकली टेस्ट और रेकमेंड नहीं किया जाता. इसका सेवन 'हाई' होने के लिए किया जाता है.
भारत में कैनेबिस की हिस्ट्री, जियोग्रफ़ी और संस्कृति
भोले और होली के साथ भांग का नाम बहुत पहले से चला आ रहा है. रिसर्च में खपे रहने वालों की मानें तो भारतीय संस्कृति और साहित्य में कैनेबिस का इतिहास कम से कम 3000 साल पुराना है.
भांग को अक्सर दूध में मिलकर पिया जाता है. कभी कभी इसको मिठाई में मिलकर भी लेते हैं.
भांग को अक्सर दूध में मिलकर पिया जाता है. कभी-कभी इसको मिठाई में मिलकर भी लेते हैं. भांग पीसना एक कला माना गया है. इसे अलग-अलग तरीके से पीसने से अलग-अलग इफेक्ट्स पड़ते हैं.

ऋग्वेद में सोम का ज़िक्र है. वैदिक साहित्य में 'सोम' शब्द को दो तरह इन्टरप्रेट किया जा सकता है. एक है - सोमदेवता. और दूसरा है - पिया जाने वाला सोमरस. इसमें औषधीय गुण भी हैं और ये मादक भी है. ऋग्वेद में सोम का ज़िक्र अमर होने के लिए किया गया है -
वेदों के अध्यानकर्ता सोम को बनाने के लिए कैनेबिस के पौधे को एक मुख्य घटक बताते हैं. हलाकि अध्यानकर्ताओं के एक धड़े का इसके विरोध में भी मत है.
 ऋग्वेद (8.48.3). वेदों के अध्ययनकर्ता सोम को बनाने के लिए कैनेबिस के पौधे को एक मुख्य एलिमेंट बताते हैं. अध्ययनकर्ताओं के एक धड़े का इसके विरोध में भी मत है. 

कैनेबिस अभी तो हर जगह उगाया जाने लगा है. लेकिन भारतीय उप-महाद्वीप में बहुत पहले से यह पौधा नेचुरली उगता था. कैनेबिस इंडिका का नाम भी देश के यानी इंडिया के नाम से ही पड़ा है.
आज़ाद भारत में कैसे गुलाम हो गयी भांग?
1947 के बाद केवल राज्य स्तरों पर कैनेबिस संबंधी नशे को अपराध बताते हुए क़ानून पास किए गए. कुछ साल तक भारत सरकार अपना ध्यान कैनेबिस से होने वाले नशे की ओर नहीं ले गई. लेकिन ध्यान ले जाना पड़ा, वो भी जबरन.
1961 में अमेरिका के मैनहेटन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन हुआ. सिंगल कन्वेंशन ऑन नार्कोटिक ड्रग्स, 1961. इस सम्मलेन में कैनेबिस को 'हार्ड ड्रग्स' की श्रेणी में डाल दिया गया. और सभी राष्ट्रों से इसपर शिकंजा कसने की अपील की गई. सम्मलेन में भारत के प्रतिनिधि कैनेबिस से जुड़ी सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे थे.
'वार ऑन ड्रग्स' अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन का उछाला टर्म है. इसी के चलते अमेरिका ने ड्रग्स के खिलाफ जो अभियान चलाया उसके लिए इस टर्म उछाला गया था.
'वार ऑन ड्रग्स' अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन का उछाला टर्म है. अमेरिका ने ड्रग्स के खिलाफ जो अभियान चलाया उसके लिए इस टर्म को उछाला गया था.

उनका पक्ष था कि इसे भारतीय समाज पर एकदम से नहीं थोपा जा सकता. भारत ने समझौते पर साइन किया. एक नज़र उसके मुख्य बिन्दुओं पर:
  • कन्वेंशन में भांग को कैनेबिस की परिभाषा से बाहर रखा गया. और इसीलिए भांग हार्ड ड्रग्स की श्रेणी से भी बाहर रहेगा.
  • भारत ने कैनेबिस के एक्सपोर्ट को लिमिट करने का वादा किया.
  • साथ ही भारत ने इन ड्रग्स पर शिकंजा कसने के लिए 25 साल की मोहलत भी ली.
गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर अघोरी बाबा निडर होकर चिलम सूटते हैं. इनमें से कई बाबा माल के सप्लायर भी होते हैं.
गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर अघोरी बाबा निडर होकर चिलम सूटते हैं. इनमें से कई बाबा माल के सप्लायर भी बताए जाते हैं.

1986 में कन्वेंशन को 25 साल पूरे होने थे. इससे एक साल पहले 1985 में भारत सरकार ने एक एक्ट पास किया - 'नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेन्सेस एक्ट' या NDPS एक्ट. NDPS ने कैनेबिस की अमरीका में हुए कन्वेंशन में तय हुई परिभाषा को हुबहू उठा लिया. कैनेबिस की परिभाषा की चपेट में ये सारी चीज़ें आने लगीं :-
  1. चरस (कैनेबिस के रेसिन से तैयार).
  2. गांजा (कैनेबिस के फूल से तैयार).
  3. इन दोनों का कोई भी और मिक्सचर.
भांग को NDPS की पहुंच से बाहर रखा गया. लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग राज्यों ने भांग पर अपने कानूनों के ज़रिये शिकंजा कस रखा है. असम, महाराष्ट्र जैंसे राज्य 1961 से पहले ही अपने-अपने क़ानून ला चुके थे.
अभी कानून और लीगल स्टेटस को लेकर लेटेस्ट अपडेट ये है -
# शराब-बैन वाले गुजरात ने 2017 में भांग को लीगल कर दिया. उनके अनुसार भांग भगवान शिव का प्रसाद है.
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने एक भाषण में उर्जा के प्रकारों में से एक यह भी गिनाया था. बाकी दो थे न्युक्लीअर एनर्जी, सोलर एनर्जी.
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने एक भाषण में उर्जा के प्रकारों में से एक Weed Energy भी गिनाया था. बाकी दो थे न्युक्लीअर एनर्जी, सोलर एनर्जी.

# "वार ऑन ड्रग्स" छेड़ने वाले अमेरिका के राज्यों में भी शिव जी को प्रसन्न करने के लिए कैनेबिस लीगल करने की होड़ मची है. जनवरी 2018 तक अमेरिका के 50 में से 29 राज्यों में मरिजुआना किसी न किसी रूप में लीगल है. अमेरिका के 9 राज्यों में मेडिकल मरिजुआना एवं रिक्रिएशनल मरिजुआना दोनों लीगल हैं.
बाबाजी की बूटी?
कैनेबिस के नफे और नुकसान पर डिबेट जारी है. मरिजुआना कई केस में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ के लिए ख़तरा बन जाता है. लेकिन लगातार ऐंसे तरीके खोजे जा रहे हैं, जिससे मरिजुआना अधिक औषधीय रूप में उभर के आ रहा है.
अथर्ववेद(11.6.15) में भांग(कैनेबिस) को सोम के नेतृत्व वाली पांच मुख्य औषधियों में गिनाया गया है. आयुर्वेदिक साहित्य में भांग का एक औषधि के रूप में ज़िक्र है.
अथर्ववेद में भांग(कैनेबिस) को सोम के नेतृत्व वाली पांच मुख्य औषधियों में गिनाया गया है. आयुर्वेदिक साहित्य में भांग का एक औषधि के रूप में ज़िक्र है.

2014 में बिज़नेस इनसाइडर में एक लेख छपा था - 23 मेडिकल यूज़ेज़ ऑफ़ मरिजुआना. मरिजुआना के उन 23 फायदों की लिस्ट में से कुछ देख लीजिए -
# इसका उपयोग ग्लूकोमा का इलाज करने के लिए किया जा सकता है.
# यह तंबाकू के कैंसर पैदा करने वाले प्रभावों को रोकने में मददगार साबित हो सकता है.
# यह एंग्ज़ायटी (घबराहट) को कम करता है.
# THC अल्ज़ाइमर्स की बढ़ने की गति कम करता है. अल्ज़ाइमर्स डिसीज एक टाइप की भूलने की बीमारी होती है जो लगभग 60 साल के बाद बुजुर्गों को होने लगती है.
शशि थरूर ने अपने भतीजे अविनाश थरूर के साथ मिलकर एक विस्तृत आर्टिकल लिखा है. जिसमे उन्होंने मरिजुआना को लीगल करने के लिए तर्कों समेत अपनी राय रखी है. उनकी राय से हम सहमत-असहमत हो सकते हैं. लेकिन थरूर और बालकृष्ण ने एक सेंसिटिव और ज़रूरी डिबेट शुरू की है. इसे कतई खारिज नहीं ही किया जाना चाहिए.


IIT गुवाहाटी से हमारे यहां इंटर्नशिप करने आए आयुष के बारे में तीन चीज़ें अच्छी हैं: एक – वो IIT से हैं, दूसरी – वो दफ्तर में किसी को प्यासा नहीं मरने देते, और तीसरी – वो किस्से कायदे के सुनाते हैं. प्रस्तुत लेख उनकी तीसरी खूबी का एक छोटू सा नमूना है.


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