सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर एक प्रवासी मजदूर के एक शब्द – “अब नहीं आऊंगा, दोस्त” – से गुजरात के कपड़ा उद्योग के केंद्र को छोड़कर भाग रहे मजदूरों के दिल दहला देने वाला दर्द झलकता है. एलपीजी गैस संकट के कारण काम मिलने के बावजूद खाना बनाना नामुमकिन हो गया है. इस वीडियो में हम विस्तार से बताते हैं कि उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से आए हजारों प्रवासी मजदूर ट्रेनों के लिए 14-16 घंटे तक कतार में क्यों लगे हैं?
प्रवासी मजदूर LPG क्राइसिस के बीच सूरत क्यों छोड़ कर जा रहे हैं? ऐसी बात कही कि भावुक हो गए
एलपीजी गैस संकट के कारण काम मिलने के बावजूद खाना बनाना नामुमकिन हो गया है. अब सूरत के कर्मचारी अपने घर रवाना हो रहे हैं.
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