भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली एक गंभीर संकट का सामना कर रही है. शिक्षा के तीव्र विस्तार या "सामूहिकीकरण" के कारण छात्रों में असंतोष, जाति आधारित भेदभाव, शिक्षकों की कमी और छात्रवृत्तियों में देरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. इन चिंताजनक रुझानों ने सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करने और महत्वपूर्ण निर्देश जारी करने के लिए बाध्य किया.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय विश्वविद्यालयों से क्या कहा?
भारत के सर्वोच्च न्यायलय ने शिक्षा प्रणाली को लेकर क्या कहा?
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