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विधवा महिला को ससुर से मिलेगा गुजारा भत्ता, लेकिन ये शर्तें पूरी होनी चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- 'यह जिम्मेदारी पति की मौत के बाद भी जारी रहती है, और कानून एक विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) मांगने की इजाजत देता है.'

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विधवा के गुजारे भत्ते के अधिकार पर अहम टिप्पणी की.
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पंकज श्रीवास्तव

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऑर्डर में विधवा के गुजारा भत्ते पर बड़ी टिप्पणी की. हाई कोर्ट ने कहा कि पति की अपनी पत्नी को गुजारा कराने की जिम्मेदारी उसकी मौत के बाद भी खत्म नहीं होती है. इसलिए, एक विधवा को अपने ससुर से गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार है. कोर्ट ने साफ कर दिया कि पति की मौत के बाद विधवा अपने ससुर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. लेकिन ये गुजारा भत्ता कब नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं.

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आजतक से जुड़े पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 मार्च के आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की एक डिवीजन बेंच ने कहा,

"यह एक तय नियम है कि पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण कराने के लिए जिम्मेदार है. यह जिम्मेदारी उसकी मौत के बाद भी जारी रहती है, और कानून एक विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) मांगने की इजाजत देता है."

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कोर्ट ने अकुल रस्तोगी नाम के शख्स की अपील पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं. अकुल रस्तोगी अपनी पत्नी के खिलाफ कोर्ट गए थे. उन्होंने फैमिली कोर्ट के एक ऑर्डर को चुनौती दी थी, जिसने झूठे बयान देने के लिए उनकी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की इजाजत देने से मना कर दिया था.

पति ने आरोप लगाया कि गुजारा भत्ता पाने के लिए, उसकी पत्नी ने गलत जानकारी दी थी, खासकर, नौकरी करने के बावजूद खुद को गृहिणी बताना. पति ने आगे दावा किया कि उसकी पत्नी के पास 20 लाख रुपये से ज्यादा की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDRs) थीं, जिन्हें पत्नी ने छिपाया था.

कोर्ट ने पाया कि पति अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया. कोर्ट ने कहा कि यह साबित करने की जिम्मेदारी पति की है कि पत्नी अच्छी नौकरी करती है. सिर्फ यह कहना कि पत्नी काम करती है, काफी नहीं माना गया.

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FDRs के मामले में कोर्ट ने देखा कि ये पैसे पत्नी को उसके पिता से मिले थे. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आम तौर पर एक पिता अपनी बेटी की शादी के बाद उसके भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार नहीं होता, सिवाय उन खास हालात के जब वह विधवा हो जाती है.

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पत्नी ने अपनी निजी जरूरतों को पूरा करने के लिए FDRs से ज्यादातर पैसे पहले ही निकाल लिए थे, जिससे यह साफ हो गया कि उसे सच में गुजारे के पैसे की जरूरत थी.

हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कुछ बातों को छोड़ देना, या पूरी जानकारी ना देना, अपने आप में झूठा बयान नहीं माना जा सकता. आखिर में, पत्नी के खिलाफ कोई ठोस वजह ना पाते हुए कोर्ट ने पति की अपील खारिज कर दी.

ससुर से कब नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता?

लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के तहत, अगर कोई विधवा अपने पति की प्रॉपर्टी, अपने माता-पिता या अपने बच्चों से मेंटेनेंस नहीं ले पाती है, तो वह अपने ससुर या उनकी प्रॉपर्टी से मेंटेनेंस का दावा कर सकती है. बस शर्त ये है कि उसने दूसरी शादी ना की हो. कानून के मुताबिक, अगर विधवा ने दोबारा शादी कर ली, तो फिर ससुर से गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा. इसके अलावा कानून में इससे जुड़े कुछ अन्य प्रावधान भी हैं. 

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