क्या आपको पता है? दुनिया भर के समुद्र में काम कर रहे हर 5 नाविकों में से एक भारतीय है. साल 2024 तक भारत के सीफेयरर्स यानी नाविकों की संख्या 3 लाख को पार कर गई. समुद्री नाविकों की सप्लाई करने वाले दुनिया के सबसे बड़े तीन देशों में भी भारत का नाम आता है. इससे ऊपर केवल फिलीपींस और चीन ही हैं. समुद्री जहाज पर काम करने वाले कर्मचारियों की सप्लाई में भारत की हिस्सेदारी तकरीबन 17 फीसदी बनती है.
दुनिया में हर 5 में से एक नाविक भारतीय, समुद्र की नौकरी इंडियन्स को इतनी क्यों भा रही?
दुनिया के हर पांच नाविकों में से एक भारतीय है और मर्चेंट नेवी आज भी युवाओं के लिए आकर्षक करियर बनी हुई है. ऊंची सैलरी और बेहतर भविष्य की चाह में हजारों युवा हर साल समुद्र का रास्ता चुन रहे हैं, भले ही इसमें जान का खतरा क्यों न हो.


ये सब आंकड़े इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में तब सामने आए हैं, जब होर्मुज में अमेरिका और ईरान की तनातनी का खामियाजा भारतीय नाविकों को चुकाना पड़ा है. MT Settebello नाम की शिप पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीयों की मौत हो गई. इसी शिप पर 21 और भारतीय नाविक थे, जिन्हें किसी तरह बचा लिया गया. एक और नाविक निशांत होर्मुज में फंसे जहाज पर ठीक से इलाज नहीं करा पाए और उनकी भी मौत हो गई. एमटी मारिवेक्स नाम के जहाज पर भी 24 भारतीय नाविक थे, जिन्हें जहाज पर आग लगने के बाद रेस्क्यू किया गया. एमटी जलवीर पर भी 20 भारतीयों के क्रू को बचाया गया. यानी कुल मिलाकर होर्मुज संकट के दौरान कुल 65 भारतीय नाविकों का जान सांसत में आई.
अब सवाल है कि इतने सारे भारतीय समुद्र में क्यों हैं? आखिर वो क्या चीज है, जो उन्हें गहरे, सुनसान और बेतहाशा खतरों से भरे समुद्र की ओर खींचती है? ‘पैशन’ एक जवाब हो सकता है. लेकिन इससे भी बड़ा कारण जो है, वो पैसे से जुड़ी है.
लंबे समय तक मर्चेंट नेवी की नौकरी को एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी माना जाता रहा है. भारत के छोटे शहरों और कस्बों के जवानों में इस नौकरी को लेकर खूब क्रेज रहता है. यही वजह है कि हर साल समुद्री जहाज पर काम करने के लिए आवेदनों की बाढ़ आती जा रही है. लोनावला के समुंद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम स्टडीज (SIMS) के वाइस प्रिंसिपल कैप्टन सुभेंदु हाटी बताते हैं कि दो साल पहले भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय की यूनिफाइड आईएमयू-सीईटी एग्जाम में 39 हजार लोगों ने फॉर्म भरा था. पिछले साल (2025) में यह संख्या 55 हजार हो गई और इस साल तो ये आंकड़ा 72 हजार के पार हो गया है. हाटी ने कहा कि ज्यादातर कैडेट्स भारत के टियर-2 शहरों, छोटे कस्बों और गांव वाले इलाके से आते हैं.
आखिर इस नौकरी में क्या है, जो युवाओं को अपनी ओर खींचता है?
चेन्नई के रहने वाले 23 साल के जीवा भारती दो महीने में ग्रेजुएट हो जाएंगे. अपने परिवार में समुद्र में जाने वाले वो पहले शख्स हैं. डेस्क जॉब छोड़कर उन्होंने समुद्री करियर चुना है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जीवा कहते हैं कि टैंकर में ज्यादा सैलरी मिलती है. वहां जंग का खतरा तो है लेकिन यह एक बाधा है, जिसे जल्दी ही पार कर लिया जाएगा. गुजरात की रहने वाली 19 साल की खेता पटेल कहती हैं कि जब वह 8वीं क्लास में थीं, तब वो सेना की वर्दी पहनना चाहती थीं. उन्होंने इसके लिए अपने मां-बाप का विरोध भी सहा. जब उन्हें एनडीए यानी नैशनल डिफेंस अकादमी में दाखिला नहीं मिला तो उन्होंने मर्चेंट नेवी में शामिल होने का फैसला किया..
ऐसे ही हजारों युवा वर्दी पहनने का सपना पूरा करने और अच्छी सैलरी के पीछे समुद्र में अपना करियर चुनते हैं. मर्चेंट नेवी में सैलरी भी बढ़िया होती है. कैडेट की शुरुआती सैलरी करीब 40 हजार रुपये महीना होती है, जबकि जूनियर इंजीनियर को लगभग 1 लाख रुपये महीना मिलता है. करीब 10 साल के अनुभव के बाद एक सीनियर अधिकारी की कमाई 10-15 लाख रुपये महीना तक पहुंच सकती है.
करियर की सबसे हाई पोस्ट मास्टर यानी कप्तान या चीफ इंजीनियर की होती है. उन्हें 10 से 20 लाख रुपये महीना तक सैलरी मिलती है. इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि एलएनजी जहाज, केमिकल टैंकर और गैस कैरियर में सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है.
भारत के छोटे शहरों और कस्बों में सैलरी सामाजिक प्रतिष्ठा की बात होती है. जिन परिवारों की मासिक आय 8 से 10 हजार रुपये होती है, उनके लिए समुद्र की नौकरी लाखों रुपये महीना कमाने के अवसर लेकर आती है. इससे न सिर्फ एक व्यक्ति की बल्कि पूरे परिवार की माली हालत सुधर जाती है.
14 साल में 3 लाख कैडेट हो गएशिपिंग महानिदेशालय (DG Shipping) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले डेढ़ दशक में समुद्र में भारतीय नाविकों की संख्या 5 गुना से ज्यादा बढ़ी है. साल 2010 में 62 हजार 267 भारतीया नाविक समुद्र में थे, जो 2024 में बढ़कर 3.07 लाख हो गए. इस दौरान जहाजों पर अधिकारियों (ऑफिसर्स) की तुलना में रेटिंग कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. ज्यादा से ज्यादा लोग इसी कैटेगरी में काम करने लगे हैं. रेटिंग जहाज पर नॉन अफसर लेवल के कर्मचारी होते हैं. इनका काम जहाज को चलाना, रखरखाव करना और अफसरों को सपोर्ट करना होता है.
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