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एयरफोर्स छोड़कर बने सुवेंदु अधिकारी के करीबी, चंद्रनाथ रथ कौन थे जिन्हें बीच सड़क मार दी गोली?

Chandranath rath का परिवार पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ था. उनकी मां हसी रथ ने मेदिनीपुर में एक स्थानीय पंचायत निकाय में पद संभाला था. चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के करीबी थे. सुवेंदु अधिकारी की ही तरह चंद्रनाथ रथ का परिवार भी 2020 में भाजपा में शामिल हो गया था.

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चंद्रनाथ रथ की गोली मार कर हत्या कर दी गई (PHOTO-AajTak)

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खास सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. 41 साल के चंद्रनाथ रथ ने करीब दो दशक इंडियन एयरफोर्स में सेवा दी थी. चंद्रनाथ के जीवन को देखें तो ये समझ आता है कि उनका जीवन कई तरह के पड़ावों से होकर गुजरा था. चंद्रनाथ रथ बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के चांदीपुर के रहने वाले थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रनाथ रथ के सुवेंदु अधिकारी के साथ पुराने राजनीतिक और निजी संबंध भी थे. जो लोग उन्हें जानते थे, वे बताते हैं कि चंद्रनाथ बहुत ही मृदुभाषी, अनुशासित और रामकृष्ण मिशन से प्रभावित थे. उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में मेदिनीपुर में पढ़ाई की. उनके दोस्तों का कहना है कि एयरफोर्स में शामिल होने से पहले उन्होंने एक बार आध्यात्मिक जीवन अपनाने के बारे में भी सोचा था. लेकिन उन्होंने फोर्स जॉइन की और लगभग 20 सालों तक एयरफोर्स में सेवा देते रहे.

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इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स से खुद से रिटायरमेंट (voluntary retirement) ले लिया. रिटायर होने के चंद्रनाथ रथ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया. इसके बाद वे धीरे-धीरे राजनीति से जुड़ने लगे. रिपोर्ट के मुताबिक उनका परिवार पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ था. उनकी मां हसी रथ ने मेदिनीपुर में एक स्थानीय पंचायत निकाय में पद संभाला था. चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के करीबी थे. सुवेंदु अधिकारी की ही तरह चंद्रनाथ रथ का परिवार भी 2020 में भाजपा में शामिल हो गया था.

सुवेंदु अधिकारी BJP में आए, चंद्रनाथ को कोर टीम में रखा

चंद्रनाथ रथ औपचारिक रूप से 2019-20 के आसपास सुवेंदु अधिकारी की कोर राजनीतिक टीम में शामिल हो गए. ये तब की बात है जब अधिकारी ममता बनर्जी सरकार में मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे. शुरुआत में ऑफिस और प्रशासनिक काम संभालने वाले चंद्रनाथ रथ धीरे-धीरे पर्दे के पीछे से संगठन के एक अहम हाथ बन गए. हालांकि वो काफी लो-प्रोफाइल रहते थे इसलिए उन्हें मीडिया/न्यूज में काफी कम ही देखा गया. लेकिन अधिकारी के करीबी लोगों में उनका नाम शुमार था.

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BJP के अंदर उन्हें ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखा जाता था जो संवेदनशील राजनीतिक कामों, चुनाव प्रचार की व्यवस्था और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल का काम संभालते थे. वह कई अहम राजनीतिक अभियानों में भी शामिल रहे, जिनमें हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट भी शामिल है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि चंद्रनाथ रथ पर सुवेंदु अधिकार पूरा भरोसा करते थे. उन्हें इस खेमे के भीतर एक उभरती हुई संगठनात्मक हस्ती के तौर पर देखा जाने लगा था.

ममता बनर्जी के सामने विरोध प्रदर्शन

रिपोर्ट के मुताबिक वोटों की गिनती से पहले चंद्रनाथ रथ और ममता बनर्जी का आमना-सामना हुआ था. 30 अप्रैल को वोटों की गिनती के दिन से तीन दिन ममता बनर्जी शाखवत मेमोरियल हाई स्कूल स्थित भवानीपुर स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने गई थीं. उसी समय चंद्रनाथ BJP समर्थकों के एक ग्रुप के साथ वहां पहुंच गए. शुभेंदु अधिकारी की गैर-मौजूदगी में ही चंद्रनाथ रथ ने मतगणना केंद्र के बाहर BJP के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. 

उन्हें पुलिसकर्मियों के साथ तीखी बहस करते देखा गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब ममता बनर्जी अंदर थीं, तब TMC का एक प्रचार वाहन मतगणना केंद्र के पास अवैध रूप से खड़ा किया गया था. उनकी शिकायत के बाद, BJP कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस और CRPF कर्मियों के हस्तक्षेप से आखिरकार उस वाहन को वहां से हटा दिया गया. लेकिन इस घटना के छह दिन बाद चंद्रनाथ रथ की राजनीतिक यात्रा का हिंसक अंत हो गया, जब मोटरसाइकिल पर सवार कुछ अज्ञात हमलावरों ने कथित तौर पर मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके के पास उनकी गाड़ी को रोका और उन्हें गोली मार दी. उनकी हत्या ने बंगाल में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.

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