मुंबई में बिरयानी और तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 लोगों के परिवार ने शनिवार, 26 अप्रैल की रात को अपने घर पर 5 रिश्तेदारों को न्योता दिया था. सभी 9 लोगों ने रात के करीब 10:30 बजे साथ में बिरयानी खाई. इसके बाद पांचों मेहमान अपने घर लौट गए. उनके जाने के बाद रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच परिवार के चारों लोगों ने तरबूज खाया.
मुंबई में तरबूज खाने के बाद पूरे परिवार की मौत, क्या इसकी फूड पॉयजनिंग जान भी ले सकती है?
मुंबई में बिरयानी और तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. पहले बिरयानी और फिर तरबूज खाने के बाद चारों की तबीयत बिगड़ी और उल्टी-दस्त के लक्षण दिखे. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.


रविवार, 27 अप्रैल की सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच चारों को उल्टी और दस्त होने लगे. सबसे पहले उनका इलाज फैमिली के एक डॉक्टर ने किया. फिर उन्हें जेजे अस्पताल रेफर कर दिया गया. यहां चारों की मौत हो गई. पुलिस का कहना है कि मामला फूड पॉयजनिंग का लगता है, लेकिन चारों की मौत का असली कारण मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट से ही पता चलेगा. तरबूज को भी फॉरेन्सिक जांच के लिए भेज दिया गया है.
क्या तरबूज से होती है फूड पॉयजनिंग?
इस घटना ने लोगों को डरा दिया है. सबका एक ही सवाल है कि क्या तरबूज जैसे फलों से भी फूड पॉयजनिंग हो सकती है और क्या उसके ऐसे गंभीर नतीजे हो सकते हैं कि किसी की मौत हो जाए. एनडीटीवी को इसका जवाब न्यूट्रिशनिस्ट रूपाली दत्ता ने दिया है. उन्होंने कहा कि तरबूज से फूड पॉयजनिंग हो सकती है और यह सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. इससे मौत भी हो सकती है, लेकिन ये सब हालात पर निर्भर करता है.
दत्ता के मुताबिक, तरबूज में पानी और नेचुरल शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है. ऐसे में अगर इसमें किसी तरह का इन्फेक्शन होता है तो बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ सकते हैं. इसके अलावा तरबूज को मीठा और लाल दिखाने के लिए उसमें ग्लूकोज या शुगर वॉटर इंजेक्ट किया जाता है. ऐसे में अगर तरबूज पहले से बैक्टीरिया की चपेट में है तो इससे उनके और तेजी से बढ़ने का खतरा होता है. ऐसा तरबूज खाने से तबीयत बिगड़ने की आशंका होती ही है.
रिपोर्ट में एक और डायटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर डॉ. अर्चना बत्रा बताती हैं कि तरबूज से फूड पॉयजनिंग होना कोई नई बात नहीं है. खतरा तब होता है जब तरबूज में हानिकारक बैक्टीरिया साल्मोनेला, लिस्टेरिया या ई.कोलाई के खतरनाक वेरिएंट मौजूद हों. ऐसे तरबूज डिहाइड्रेशन, शरीर में इन्फेक्शन (सेप्सिस) या शरीर के जरूरी अंगों पर बुरा असर डाल सकते हैं. ऐसे हालात में अगर समय पर इलाज न मिले तो ये जानलेवा भी हो सकते हैं.
रूपाली दत्ता का कहना है कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी एक खाने की चीज को जिम्मेदार ठहराना मुश्किल होता है. फूड पॉयजनिंग खराब हो गए फल या गलत तरीके से रखे गए खाने से भी हो सकती है.
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