उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के एक गांव में लड़कों की शादियों में पानी ‘अड़ंगा’ लगा रहा है. गांव में पानी की बेहद कमी है. ग्रामीणों के लिए पानी की उचित व्यवस्था नहीं है. पानी की ये कमी गांव के जवान लड़कों के लिए अलग ही तरह का संकट बन गई है. दूसरे गांवों के लोग अपने बेटियों को इस गांव के लड़कों से ब्याहने में कतराते हैं. पानी की समस्या के बारे में जानने के बाद लड़कियों के घरवाले शादी से पीछे हट रहे हैं.
यूपी के इस गांव के लड़कों की शादी के 'आड़े' आया पानी, कोई पिता बेटी देने को तैयार नहीं
Uttar Pradesh के एक गांव में लड़कों की शादियां इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि गांव में पानी की भारी किल्लत है. लड़कियों के घर वाले पानी की समस्या को जानने के बाद शादी से इनकार कर दे रहे हैं.


महोबा के इस गांव का नाम मुधारा है. यहां लोगों के दिन की शुरुआत ही पानी के लिए संघर्ष करते हुए होती है. गांव में पानी की कमी सरकार के उन दावों और योजनाओं को भी आईना दिखा रही है, जिनमें ‘हर घर जल’ पहुंचाने की बात कही जाती है.
40 से ज्यादा लड़के कुंवारेइंडिया टुडे से जुड़े नाहिद अंसारी की रिपोर्ट के मुताबिक, मुधारा के निवासियों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपयों की लागत से पीने के पानी की योजना की शुरुआत की गई थी. लेकिन अब तक उन नलों से एक बूंद भी पानी नहीं आया. एक ग्रामीण ने बताया कि गांव में करीब 40 ऐसे लड़के हैं, जिनकी शादी की उम्र है, लेकिन उनकी शादी नहीं हो रही है. क्योंकि गांव में पानी की कमी होने की वजह से लोग अपनी बेटियों की शादियां नहीं करना चाहते.
लोगों ने बताया कि शादी की बातचीत तो होती है, लेकिन पानी की समस्या के बारे में पता चलते ही लड़की वाले पीछे हट जाते हैं. एक वृद्ध ग्रामीण ने बताया कि लड़की वाले उनसे पूछते हैं कि अगर हमारी बेटी आपके गांव में आएगी, तो उसे कितना पानी ढोना पड़ेगा.
बुजुर्ग ने यह भी दावा किया कि लोग खुलेआम कहते हैं कि वो अपनी बेटियों की शादियां ऐसे गांव में नहीं करेंगे, जहां पीने का पानी ही न हो. रिपोर्ट के मुताबिक, मुधारा में नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई. पानी की टंकी भी लगाई गई. यहां तक कि पानी का ट्रायल रन भी किया गया, लेकिन सप्लाई का आज तक कुछ पता नहीं.
टेस्टिंग के बाद भी पानी नहीं आयागांव के एक दूसरे शख्स ने बताया कि उन्होंने अपने घर के लिए टंकी बनवाई और पाइप लाइन का कनेक्शन कराया. टेस्टिंग के समय एक दफा पानी आया भी, लेकिन फिर बंद हो गया. तब से अब तक घरों में पानी की एक बूंद तक नहीं आई.
गांव की आबादी करीब 2 हजार से ज्यादा लोगों की है. बावजूद इसके पूरे गांव में सिर्फ तीन हैंडपंप और एक कुआं है. इन्हीं के सहारे गांव वालों का गुजर-बसर हो रहा है. पीने के पानी की बात आती है तो संकट और भी बड़ा है. तीन में से केवल एक ही हैंडपंप का पानी पीने लायक है. बाकी दो का पानी खारा है.
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