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ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बदली रणनीति, अब मिसाइल नहीं प्रतिबंधों से बढ़ेगा दबाव

Iran पर US फिलहाल नए सैन्य हमले नहीं करना चाहता. अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत में इसका संकेत दिया है. अब Trump Administration का फोकस आर्थिक प्रतिबंधों, ईरान के तेल कारोबार और Strait Of Hormuz में दबाव बढ़ाने पर है.

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मार्को रूबियो ने अमेरिका की बदलती स्ट्रेटेजी को समझाया है (PHOTO - Getty)

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  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य हमले की योजना नहीं बना रहा है, बल्कि प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।
  • ट्रंप प्रशासन की नीति के तहत अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले से बचते हुए आर्थिक प्रतिबंधों और सामरिक दबाव के माध्यम से ईरान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।
  • अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल निर्यात में कमी आई है और यह रणनीति कम से कम नवंबर के मध्यावधि चुनाव तक जारी रखने की योजना है।

अमेरिका ईरान पर दबाव बनाना जारी रखेगा. लेकिन हमलों से नहीं. अब अमेरिका तमाम तरह से सैंक्शंस यानी प्रतिबंधों का सहारा लेगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत में ये संकेत दिया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका अभी ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू करने की योजना नहीं बना रहा है. इससे संकेत मिलता है कि अब अमेरिका आर्थिक और समुद्री दबाव बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है,

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एक्सियोस की रिपोर्ट मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका ‘फिलहाल’ ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई शुरू करने से बचेगा. हालांकि ये तय है कि ये अमेरिका की परमानेंट नीति नहीं है. लेकिन फिर भी अब अमेरिका का ध्यान जंग की जगह इकोनॉमिक प्रेशर बनाने पर है. अमेरिका Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही बनाए रखने की कोशिशों के जरिए दबाव बढ़ाने की योजना बना रहा है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ट्रंप प्रशासन बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से बच रहा है. वो ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर ज्यादा फोकस कर रहा है.

किसी नए हमले का प्लान नहीं

अमेरिका फिलहाल कोई नई हमले नहीं चाहता. लेकिन ईरान की ओर से हमला होने पर वो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार भी नहीं करता. अमेरिका का मानना ​​है कि होर्मुज और उसके आसपास चल रहे मिशंस ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर ईरान की पकड़ को काफी कमजोर कर दिया है. अमेरिकी सेनाएं होर्मुज से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटा रही हैं. खबरों के अनुसार अधिकतर जहाज और टैंकर अब होर्मुज के दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने लगे हैं.

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अमेरिकी अधिकारियों ने इस घटनाक्रम को एक बड़ा बदलाव बताया है. उन्होंने और तर्क दिया है कि होर्मुज से तेल/गैस की आवाजाही को रोकने की ईरान की क्षमता काफी कम हुई है. अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड से ईरान के तेल निर्यात में भारी कमी आई है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक हाल के हफ्तों में ईरान के मेन तेल एक्सपोर्ट टर्मिनल, खार्ग आईलैंड पर बहुत कम टैंकर देखे गए हैं. विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के मुताबक अमेरिकी ईरानी सरकार के बचे-खुचे पैसे के स्रोतों को खत्म कर रहा है. अल्टीमेट मकसद यही है कि किसी भी तरह ईरान को न्यूक्लियर पावर न बनने दिया जाए.

ईरान की आर्थिक घेराबंदी 

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक मुहिम तेज कर दी है. इसी हफ्ते अमेरिका ने और प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है. उसने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को चेतावनी दी कि उन्हें आगे चलकर सजा का सामना करना पड़ सकता है. अधिकारियों ने कहा कि ये मौजूदा रणनीति कम से कम नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों तक जारी रह सकती है. इसके बाद शायद किसी नई सैन्य मुहिम पर विचार किया जा सकता है.

(यह भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान को दी बड़ी मात, सीक्रेट रूट से कर रहा तेल सप्लाई, होर्मुज में क्या हो रहा?)

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वहीं, ईरान ने अमेरिका के दबाव बनाने वाले अभियान पर रिएक्शन दिया है. उसने अपनी अर्थव्यवस्था को अलग-थलग करने की कोशिशों को गैर-कानूनी बताया है. तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली है. क्योंकि ऑयल मार्केट ने नए प्रतिबंधों की धमकी के तुरंत असर को एक तरह से नजरअंदाज कर दिया है.

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