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यूपी विधानसभा के हॉल में मिली गुटखे की पिचकारियां, स्पीकर भड़के

4 मार्च को सदन की कार्यवाही शुरू होती ही महाना ने बताया किया कि उन्हें माननीय विधायक द्वारा विधानसभा के हॉल में पान मसाला खाकर थूकने की जानकारी मिली है. जानकारी मिलने के बाद उन्होंने खुद उस जगह की सफाई की. स्पीकर ने दावा किया कि उन्होंने खुद कुछ वीडियो में विधायकों को कथित तौर पर थूकते हुए देखा है.

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स्पीकर ने जताई नाराज़गी. (फोटो- आजतक)

पान और गुटखे के शौकीन समय-समय पर खूबसूरत दीवारों की सुंदरता बढ़ाते रहे हैं. मॉडर्न लैंग्वेज में इसे गुटखा पेंटिंग भी कहते हैं. लेकिन इस बार तो उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा हॉल को ही चुन लिया. व्यंग्य को यहीं थामते हैं और असल बात बताते हैं. यूपी विधानसभा के स्पीकर सतीश महाना 4 मार्च मंगलवार को कहा कि सदन के ‘माननीय विधायक’ पान मसाला खाकर विधानसभा हॉल में थूक रहे हैं. उन्होंने इस पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की.

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न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक, 4 मार्च को सदन की कार्यवाही शुरू होती ही महाना ने बताया किया कि उन्हें माननीय विधायक द्वारा विधानसभा के हॉल में पान मसाला खाकर थूकने की जानकारी मिली है. जानकारी मिलने के बाद उन्होंने खुद उस जगह की सफाई की. स्पीकर ने दावा किया कि उन्होंने खुद कुछ वीडियो में विधायक को कथित तौर पर थूकते हुए देखा है. लेकिन उन्हें सार्वजनिक रूप से बेइज्ज़त न होना पड़े इसलिए उनके नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं.

सतीश महाना ने विधानसभा में कहा,

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आज सुबह मुझे ख़बर मिली कि हमारे विधानसभा के इस हॉल में किसी सदस्य ने पान मसाला खाकर थूका है. इसलिए मैं यहां आया और उसे साफ करवाया. मैंने वीडियो में विधायक को देखा है. लेकिन मैं किसी व्यक्ति को अपमानित नहीं करना चाहता. इसलिए मैं उनका नाम नहीं ले रहा हूं. मैं सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि अगर वे किसी को ऐसा करते हुए देखें तो उन्हें रोकना चाहिए. इस विधानसभा को साफ रखना हमारी जिम्मेदारी है. अगर संबंधित विधायक आकर मुझसे कहते हैं कि उन्होंने ऐसा किया है तो अच्छा होगा, नहीं तो मैं उन्हें बुलाऊंगा.

उधर, पान मसाले की पिचकारी मारने वालों से निपटने के लिए गुवाहाटी ने 2019 में एक गज़ब की पहल की थी. तब यहां प्रधानमंत्री को आना था. सड़कें रंगी गई. लेकिन अधिकारियों को डर था कहीं पान के शौकीन उनकी किरकिरी न कर दें. इसके बाद गुवाहटी नगर निगम के अधिकारियों ने नए रंगी सड़क के डिवाइडरों को पॉलीथीन की चादरों से ढकने का फैसला किया. लेकिन बावजूद इसके कुछ पान और गुटखे के शौकीन लोगों ने अपनी छाप छोड़ ही दी थी.

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