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बृजभूषण के विधायक बेटे ने UGC का विरोध किया? पर रूल बनाने वाली कमेटी में तो सांसद बेटे भी थे

बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार ने यूजीसी के नए नियम लागू किए हैं. इस पर बवाल मचा हुआ है. सामान्य वर्ग (General Category) के लोग इस रूल के विरोध में हैं.

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बृजभूणष सिंह के बेटे करण भूषण (बायें) और प्रतीक भूषण (दायें)

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर पाले खिंच गए हैं. सामान्य वर्ग के लोग उबल पड़े हैं. नियम कॉलेज-यूनिवर्सिटी में जाति आधारित खासतौर पर SC, ST और OBC के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव (caste based discrimination) को रोकने के लिए लाए गए हैं लेकिन सामान्य वर्ग के लोगों का दावा है कि ये नए नियम एकतरफा और भेदभावपूर्ण है. 

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सवर्णों में इसका प्रबल विरोध हो रहा है. यहां तक कि प्रशासन और सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के भीतर भी बगावत की आंच महसूस की जा रही है. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के अलावा, भाजयुमो और बीजेपी के भी कई कार्यकर्ताओं ने यूजीसी के नए कानूनों से नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ दी. इसी बीच, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण सिंह के एक एक्स पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है. 

प्रतीक भूषण की पोस्ट में यूजीसी के नए 'विवादित' नियमों का विरोध किया गया है या नहीं, इसका निर्धारण मुश्किल काम है. बहुत अस्पष्टता से प्रतीक भूषण ने अपने पोस्ट से न जाने किसको साधने और न जाने किस पर निशाना साधने की कोशिश की है. पहले उनका पोस्ट देखते हैं. इसमें लिखा है,

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इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए. जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को ‘अतीत की बात’ कहकर भुला दिया जाता है, जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ‘ऐतिहासिक अपराधी’ के रूप में चिह्नित कर वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है.

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प्रतीक भूषण सिंह की एक्स पोस्ट (india today)

ऐसी पहेली में बात कही गई है कि इसे डिकोड करने के लिए ‘नीर-क्षीर विवेक’ चाहिए. पोस्ट के पहले भाग से ये साफ नहीं होता कि हमला यूजीसी के नए नियमों पर है या किसी पार्टी विशेष पर. दूसरा हिस्सा बात को थोड़ा साफ करती है. ‘भारतीय समाज के एक वर्ग को ऐतिहासिक अपराधी के तौर पर चिह्नित कर प्रतिशोध का निशाना बनाया जा रहा है’. माना जा रहा है कि यह 'एक वर्ग' सामान्य वर्ग ही है, जो यूजीसी के नए नियमों से गुस्से में है. इसी एक बात से ये इशारा मिलता है कि शायद बात ‘यूजीसी विवाद’ के संदर्भ में ही कही गई है. हालांकि, यह बिल्कुल साफ है कि अपनी पोस्ट में बृजभूषण ने UGC या सामान्य वर्ग का नाम कहीं भी नहीं लिया है.

लेकिन अगर प्रतीक भूषण यूजीसी की नई गाइडलाइन्स का विरोध कर रहे हैं, तो फिर ये ‘तीर’ उनके घर में उनके किसी अपने पर भी जाकर लग सकता है. क्योंकि, बृजभूषण शरण सिंह के बेटे बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण के भाई और सांसद करण भूषण उसी कमेटी का हिस्सा हैं, जिसने ये रूल्स बनाए हैं.

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हो सकता है यही वजह हो कि प्रतीक भूषण को पहेलियों में अपनी बात रखनी पड़ी हो. हालांकि, प्रतीक भूषण की इस ‘होशियारी भरी’ पोस्ट पर भी लोगों ने अपने हिसाब से मतलब निकाल लिए हैं. 

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कमेटी में करण भूषण सिंह भी शामिल हैं 

राजवीर सिंह नाम के यूजर कहते हैं,

विधायक जी (प्रतीक भूषण) आपके भाई (करण भूषण) भी उस कमेटी के मेंबर थे. एक भाई पक्ष में, एक भाई विपक्ष में. डैडी अभी कानून स्टडी कर रहे हैं. क्या गजब की राजनीति है. जनता को बेवकूफ समझा है क्या?

असीम त्रिपाठी भी यही बात याद दिलाते हैं कि गाइडलाइन के अप्रूवल टीम में प्रतीक भूषण के छोटे भाई भी शामिल थे. वह आगे तंज कसते हुए कहते हैं,  

छोटे भाई के कान पकड़िए आज. अभी नया-नया सांसद हुआ है. पापा की जगह. हो सकता है बिना पढ़े साइन करके चला आया हो.

गब्बर नाम के यूजर लिखते हैं, 'अरे दबदबा भैया, आपका छोटा भाई ही कमेटी में था. चार बात छोटे भाई को भी समझा दो.

@MYOW18183418 नाम के यूजर जवाब देते हैं, 

आपने कमेटी के मेंबर अपने भाई का विरोध क्यों नहीं किया? आज जब हम लोग अपने दम पर सरकार को झुकाने वाले हैं, तब आप इस आंदोलन की मलाई खाने आ गए हैं. आपको शर्म आनी चाहिए कि आप राजपूत समाज से आते हैं. क्षत्रिय समाज से आते हैं.

अब ऐसा नहीं है कि सब लोगों ने विरोध ही किया है. कुछ लोग प्रतीक का बचाव भी करते हैं. सचिन सिंह नाम के यूजर लिखते हैं, 

कुछ लोग लिख रहे इनके भाई भी थे कमेटी में तो महोदय वो कमेटी है. वहां चर्चा होती है और मेजॉरिटी की बात पर मुहर लगती है. मुझे विश्वास है करण भूषण ने जरूर विरोध किया होगा. लेकिन एक व्यक्ति के विरोध से फर्क नहीं पड़ता. ये बृजभूषण सिंह के लड़के हैं. पिता इनके डरते नहीं किसी से.

बता दें कि जिस समिति ने ये गाइडलाइन्स बनाई है, उसमें करण भूषण समेत कुल 31 सदस्य हैं. इस कमेटी के अध्यक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हैं. सदस्यों में जो बड़े नाम हैं, उनमें संबित पात्रा, बांसुरी स्वराज, रविशंकर प्रसाद जैसे भाजपाई तो हैं ही. सपा के जिया उर रहमान भी हैं, जो खुद नए नियमों का विरोध करने वालों में शामिल हैं. 

वीडियो: शंकराचार्य और UGC के मुद्दों पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा

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