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Grok AI ने पीएम मोदी की पोस्ट का उल्टा ट्रांसलेशन किया, राजनयिक संदेश को बना दिया विवादित

पीएम मोदी का संदेश पूरी तरह से सकारात्मक और राजनयिक था, जो भारत-मालदीव के बीच सहयोग को मजबूत करने का संकेत देता है. लेकिन ग्रोक ने इसका ट्रांसलेशन पूरी तरह से उलट-पुलट कर दिया.

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ट्रांसलेशन न सिर्फ अर्थ में अलग था, बल्कि पूरी तरह से काल्पनिक और भड़काऊ है. (फोटो- PTI)

X के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट Grok ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक राजनयिक पोस्ट का गलत ट्रांसलेशन करके बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. ये पोस्ट मूल रूप से दिवेही भाषा में लिखा गया था. जिसमें पीएम मोदी ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया था.

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पीएम मोदी ने पोस्ट में लिखा था,

"मैं भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आपको अपनी गर्मजोशी भरी शुभकामनाएं और बेस्ट विशेज देता हूं. हम दोनों देशों के लोगों के हित में मिलकर काम करना जारी रखेंगे. मैं मालदीव के सभी लोगों को समृद्धि और खुशी से भरे भविष्य की कामना करता हूं."

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पीएम मोदी का मेन पोस्ट.

पीएम मोदी का ये संदेश पूरी तरह से सकारात्मक और राजनयिक था, जो भारत-मालदीव के बीच सहयोग को मजबूत करने का संकेत देता है. लेकिन ग्रोक ने इसका ट्रांसलेशन पूरी तरह से उलट-पुलट कर दिया.

ग्रोक की तरफ से दिखाई गए ट्रांसलेशन में तथ्यात्मक गलतियां थीं और राजनीतिक रूप से संवेदनशील दावे जोड़े गए थे. इसमें भारत के गणतंत्र दिवस को गलती से स्वतंत्रता दिवस बताया गया और मालदीव सरकार पर "एंटी-इंडिया कैंपेन" में शामिल होने का आरोप लगाया गया. ग्रोक का ट्रांसलेशन कुछ ऐसा था,

"शुक्रिया, रायिथुन मजलिस. भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस समारोह मालदीव में आयोजित हुए थे और मालदीव सरकार ने इसमें भाग लिया. ये शुक्रिया सरकार भी लोगों के एंटी-इंडिया कैंपेन में शामिल रही है. यहां तक कि दो एंटी-इंडिया कैंपेन में वो विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रही हैं."

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ट्रांसलेटेड पोस्ट.

ये ट्रांसलेशन न सिर्फ अर्थ में अलग था, बल्कि पूरी तरह से काल्पनिक और भड़काऊ है. पीएम मोदी के पोस्ट में एंटी-इंडिया जैसा कोई शब्द या संकेत नहीं था.

भारत-मालदीव संबंध हाल के वर्षों में कुछ तनावपूर्ण रहे हैं, इसलिए ऐसी गलत और उत्तेजक ट्रांसलेशन बहुत संवेदनशील हो जाते हैं. जैसे ही यूजर्स ने ग्रोक की इस गलत ट्रांसलेशन को देखा, उन्होंने स्क्रीनशॉट्स बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया. कई यूजर्स ने चिंता जताई कि एक बड़े सोशल प्लेटफॉर्म में बिना डिस्क्लेमर के ऐसी AI जनरेटेड सामग्री दिखाई जाएगी, तो लोग इसे पोस्ट करने वाले का इरादा समझ सकते हैं. इससे गलत सूचना फैलने का खतरा बढ़ जाता है और जनता की धारणा पर असर पड़ सकता है.

हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब ग्रोक भारत में विवादों में घिरा है. हाल ही में भारत सरकार ने ग्रोक पर आपत्तिजनक AI इमेज और कंटेंट जनरेट करने के लिए नोटिस जारी किया था, जिसमें महिलाओं की फोटो को सेक्शुअलाइज करने वाले फीचर्स पर सवाल उठाए गए थे. अधिकारियों ने इसे भ्रामक, अनुचित और हानिकारक बताया था. इस नई घटना से ग्रोक और एक्स प्लेटफॉर्म पर AI टूल्स की डिप्लॉयमेंट और मॉडरेशन पर और ज्यादा जांच बढ़ने की संभावना है.

ये घटना जनरेटिव AI के खतरों को उजागर करती है, खासकर जब बात राजनयिक या राजनीतिक संदर्भों की हो. ट्रांसलेशन जैसे संवेदनशील कामों में AI पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. प्लेटफॉर्म अक्सर ऐसे फीचर्स को एक्सपेरिमेंटल बताते हैं, लेकिन सोशल मीडिया की वायरल प्रकृति से एक छोटी सी गलती भी बड़ी सुर्खियां बन जाती है.

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