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UGC के नए नियमों पर बीजेपी 'बंट' गई? साक्षी महाराज ने सवर्णों को नसीहत दे डाली

सवाल उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए UGC रेगुलेशंस आउट ऑफ सिलेबस क्वेशचन साबित हो रहा है? क्योंकि हिंदुत्व की छतरी से मंडल और कमंडल में से कोई भी एक छिटका तो बीजेपी के लिए सत्ता बचाना आसान नहीं होगा. ये देखने के लिए चुनाव होने तक इंतजार करना होगा.

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साक्षी महाराज और बृजभूषण शरण सिंह की बयानबाजी ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. (इंडिया टुडे)

शिक्षण संस्थानों में समानता बढ़ाने और भेदभाव खत्म करने के उद्देश्य से लाए गए यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के इक्विटी रेगुलेशंस बीजेपी की गले की हड्डी बनते जा रहे हैं. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में रेगुलेशंस के पक्ष और विपक्ष में हो रही गोलबंदी ने जहां सत्ता पक्ष को असहज कर दिया है, वहीं देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर का अंतर्द्वंद भी बीजेपी नेतृत्व की पेशानी पर बल डालने वाला है.

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उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने UGC रेगुलेशंस को लेकर सामान्य वर्ग के विरोध पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर ओबीसी और एससी समुदाय इस विरोध को अपने खिलाफ मानकर एकजुट हो गया तो यह बीजेपी के लिए चुनावी मुश्किले खड़ी कर सकता है. उन्होंने इसको तूल नहीं देने की सलाह दी है. साक्षी महाराज ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा, 

जो लोग UGC का विरोध करते हैं, अगर इसे SC और OBC अपना विरोध मान लें तो? UGC के लोग इकट्ठा हो रहे हैं, समझ में आ रहा है. अगर OBC और SC के लोग इकट्ठे हो गए तब? अगर ये 90% इकट्ठे हो गए तो कोई MLA बनेगा? कोई MP बनेगा? कोई मुख्यमंत्री बनेगा? कोई प्रधानमंत्री बनेगा? फिर क्या होगा? इसलिए इस मामले को इतनी तूल नहीं देना चाहिए जितना सवर्ण समाज दे रहा है. मोदी पर विश्वास करना चाहिए, योगी पर विश्वास करना चाहिए.

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एक तरफ ओबीसी समुदाय से आने वाले सांसद साक्षी महाराज UGC विरोधियों को चेतावनी दे रहे हैं. वहीं सामान्य वर्ग से आने वाले बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का दावा है,

UGC रेगुलेशंस का विरोध गांवों में करंट की तरह फैल गया है. केवल सवर्ण ही नहीं, बल्कि पिछड़ा और दलित समाज भी इस कानून के पक्ष में नहीं है. हमारा सवाल नहीं है कि हमने विरोध किया, मैं गांव से जुड़ा हुआ हूं. कोई बचा ही नहीं जिसने विरोध ना किया हो और जिनका फेवर दिखाया गया है दलित समाज या पिछड़े समाज का वो भी विरोध में है. यह UGC का क्या प्रभाव है इसको गांव में जाओ और समझो कि क्या दलित समाज या पिछड़ा समाज ऐसा कानून चाहता है या नहीं चाहता है.

बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व और पार्टी के बड़े चेहरे अब तक इस मुद्दे को लेकर कुछ भी कहने से बचते रहे हैं. वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस मुद्दे पर बीच का रास्ता अपनाया है. उन्होंने लखनऊ दौरे पर इक्विटी रेगुलेशंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

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 नियम का पालन होना चाहिए, लेकिन अगर कानून गलत है तो उसमें बदलाव की गुंजाइश भी होनी चाहिए.

तो सवाल उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज बीजेपी के लिए UGC रेगुलेशंस आउट ऑफ सिलेबस क्वेशचन साबित हो रहा है? क्योंकि हिंदुत्व की छतरी से मंडल और कमंडल में से कोई भी एक छिटका तो बीजेपी के लिए सत्ता बचाना आसान नहीं होगा. ये देखने के लिए चुनाव होने तक इंतजार करना होगा.

इस बीच मौके की नजाकत को भांपते हुए पीडीए समीकरण की बात करने वाले अखिलेश यादव ने ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पकड़ी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ’ पोस्ट करके राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का एक वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने बीजेपी पर सच्चे संतों के अपमान का आरोप लगाया. 

अखिलेश यादव को लगता है कि UGC इक्विटी रेगुलेशंस और शंकराचार्य के मुद्दे पर बीजेपी का एक बड़ा पारंपरिक समर्थक वर्ग पार्टी से नाराज है. इसी वर्ग को अपनी ओर लुभाने के लिए अखिलेश अब सनातन के नाम पर बीजेपी को घेर रहे हैं.

वीडियो: UGC इक्विटी नियमों पर DU में टकराव, छात्र संगठनों और यूट्यूबर के बीच झड़प

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