तेलंगाना में टीबी की जांच के लिए बलगम को लैब पहुंचाने में ही मरीजों का साढ़े 9 हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो जाता था. फिर एम्स बीबीनगर ने ड्रोन्स के जरिए बलगम को टेस्टिंग लैब भेजने का काम शुरू किया. इसने मरीजों का खर्च इतना कम कर दिया कि इसके बारे में वो कभी सोच भी नहीं सकते थे.
एक टीबी टेस्ट में लगते थे ₹9451 रुपये, ड्रोन सर्विस की वजह से ₹90 हुई कीमत, जानें कैसे
तेलंगाना में एम्स बीबीनगर के ड्रोन मॉडल ने टीबी जांच के लिए बलगम के सैंपल लैब तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज और सस्ता बना दिया. स्टडी के मुताबिक, मरीजों का खर्च 9,451 रुपये से घटकर केवल 90 रुपये रह गया और जांच रिपोर्ट मिलने का समय भी काफी कम हो गया.


पहले जहां बलगम के सैंपल को लैब तक पहुंचाने में उन्हें 9451 रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ते थे. वहीं अब यही काम सिर्फ 90 रुपये में होने लगा. इतना ही नहीं. पहले टेस्ट की रिपोर्ट आने में भी देरी लगती थी. अब सैंपल देने के एक दिन बाद ही उन्हें टेस्ट का रिजल्ट भी मिल जा रहा है.
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिसीज' में एक स्टडी छपी है. शीर्षक है- ‘क्वासी-एक्सपेरिमेंटल प्री-एंड-पोस्ट इंटरवेंशन स्टडी’. इसमें इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की 'i-DRONE' पहल के असर का मूल्यांकन किया गया है. ये वो पहल है, जिसमें यादाद्री भुवनगिरी जिले में दूरदराज के गांवों से टीबी टेस्टिंग सेंटरों तक बलगम के सैंपल पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था.
स्टडी में ड्रोन वाली व्यवस्था की तुलना पहले से चली आ रही टीबी जांच के सिस्टम से की गई थी. पहले से जो व्यवस्था चल रही थी, उसमें टीबी के संदिग्ध मरीज जांच के लिए अपने-अपने गांवों से सैंपल लेकर GeneXpert या Truenat जैसे टीबी यूनिट (TU) तक जाते थे. इसके लिए वह ठीक-ठाक दूरी तय करते थे. अपने गांव से निकलकर प्राइवेट ट्रांसपोर्ट से टीबी यूनिट तक पहुंचने में अच्छा-खासा खर्चा भी आता था.
रिपोर्ट में बताया गया कि इसके लिए संदिग्ध मरीज औसतन 9,450 रुपये तक खर्च करते थे. यानी टीबी है या नहीं, ये पता लगाने के लिए ही करीब साढ़े 9 हजार जेब से चले जाते थे. लेकिन ड्रोन वाले मॉडल से टीबी की जांच न सिर्फ आसान हुई, बल्कि इसके खर्च में भी बेतहाशा कमी आई. इस सिस्टम में गांव के ही प्राइमरी हेल्थ सेंटर (PHC) और सब-सेंटर्स पर बलगम सैंपल इकट्ठा किए जाते हैं. फिर ड्रोन से हवाई यात्रा के जरिए ये सैंपल सीधे डायग्नोस्टिक सेंटर तक पहुंचाए जाते हैं.
ये भी पढ़ेंः पेंशन लेने गए पिता-पुत्र ने बैंक बैलेंस चेक किया, ₹1500 करोड़ देखकर हाथ-पांव फूल गए
इसमें मरीजों को केवल इतना करना है कि वो अपने नजदीकी PHC या सब-सेंटर जाएं. वहां हेल्थकेयर वर्कर को अपने बलगम के सैंपल दें. वर्कर्स ये सैंपल इकट्ठा करेंगे. फिर उन्हें सुरक्षित रूप से पैक करके ड्रोन से टीबी यूनिट तक पहुंचा दिया जाएगा.
रिपोर्ट आने में भी आई तेजीरिपोर्ट के मुताबिक, AIIMS बीबीनगर में मौजूद एक सेंट्रल कमांड सेंटर ने जिले के 11 PHC, 60 सब-सेंटर और 4 टीबी यूनिट में ये ड्रोन ऑपरेशन संचालित किया था. बताया गया कि ड्रोन के इस्तेमाल से टीबी जांच की रिपोर्ट आने में लगने वाला औसत समय (median turnaround time) भी 15 दिन से घटकर 5 दिन हो गया.
पहले जहां 92 फीसदी से ज्यादा मरीजों को अपने टेस्ट के नतीजे पाने के लिए 2 दिन से ज्यादा इंतज़ार करना पड़ता था, वहीं, ड्रोन सर्विस की वजह से 76.3% मरीज़ों को अगले ही दिन रिजल्ट मिल गए. सिर्फ 16.3% मरीजों को नतीजे मिलने में दो दिन से ज्यादा का समय लगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च में 840 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया गया था. इनमें से 206 प्रतिभागी ड्रोन पूर्व चरण (Pre-drone Phase) में और 634 प्रतिभागी ड्रोन चरण (Drone Phase) में शामिल थे.
वीडियो: सतलुज मूवी के मेकर्स से केंद्रीय मंत्री ने मांगा जवाब, लीगल एक्शन की तैयारी









