होर्मुज स्ट्रेट पर 'फरिश्ता' बनकर टोल वसूलेगा अमेरिका, ईरान डील पर ट्रंप ने अपना इरादा बता दिया
US Iran Talk: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि 60 दिनों के सीजफायर में 'Strait of Hormuz' से गुजरने वाले जहाजों से टोल नहीं लिया जाएगा. समझौता न होने पर टोल टैक्स लग सकता है. वहीं, आगे की बातचीत के लिए ईरान और अमेरिका की टीमें Switzerland पहुंच चुकी हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि 60 दिनों के सीजफायर के दौरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर कोई शांति समझौता नहीं हो पाता है, तो अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगा सकता है. ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी सेना वेस्ट एशिया के देशों की सुरक्षा एक 'गार्जियन एंजेल' यानी फरिश्ता या रक्षक की तरह करती है. ऐसे में अमेरिका इन देशों को दी जाने वाली इस सिक्योरिटी सर्विस के बदले जहाजों से टोल वसूल सकता है.
रविवार, 21 जून को डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर सीजफायर के दौरान 60 दिनों तक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में कोई टोल नहीं लगने की जानकारी दी. उन्होंने आगे लिखा,
"60 दिन का पीरियड खत्म होने के बाद भी कोई टोल नहीं लगेगा. सिवाय उस हालत में कि जब डील पूरी न हो. ऐसे में अमेरिका, मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) के देशों के लिए 'गार्जियन एंजेल' (फरिश्ते) के तौर पर दी गई सेवाओं के बदले टोल वसूलेगा. चाहे वे सेवाएं पहले की, मौजूदा या भविष्य की लागत की भरपाई के लिए हों."

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के उन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिनमें कहा गया था कि लेबनान में सीजफायर के उल्लंघन की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद कर दिया गया है.
ईरान ने होर्मुज बंद करने का ऐलान किया
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 60 दिन के सीजफायर पर सहमति बनी थी. लेकिन शनिवार, 20 जून को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने का ऐलान कर दिया. इससे तनाव और बढ़ गया है. कुछ ही दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे.
ईरान के सरकारी न्यूज चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने जहाजों को इस अहम समुद्री रास्ते से दूर रहने की चेतावनी दी है. उन्होंने लेबनान में इजरायल के हमले और सीजफायर के वादों को पूरा न करने में अमेरिका की नाकामी का हवाला दिया. IRGC ने कहा कि जहाज अपने रिस्क पर होर्मुज स्ट्रेट में एंट्री करेंगे.
वेस्ट एशिया में एनर्जी सप्लाई रुकी रहेगी
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कहा कि अमेरिका 14-पॉइंट वाले अंतरिम समझौते की पहली शर्त को पूरी करने में नाकाम रहा है, जिसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सीजफायर अनिवार्य था. ‘X’ पर लिखते हुए, मोखबर ने चेतावनी दी कि जब तक यह समझौता असल में लागू नहीं हो जाता, वेस्ट एशिया में एनर्जी सप्लाई रुकी रहेगी.
लेबनान में 4057 मौतेंअमेरिका-ईरान के बीच 60 दिनों की बातचीत शुरू करने की पहली शर्त लेबनान में लड़ाई रोकना था. लेकिन सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद लेबनान पर इजरायली हमले शुरू हो गए. लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि 19 जून को हुए इजरायली हवाई हमलों में कुल 83 लोग शहीद हुए और 141 लोग घायल हुए. वहीं, 20 जून को पूरे देश में हुए इजरायली हमलों में 20 लोग मारे गए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई हिजबुल्लाह के हमलों के जवाब में थी. ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह ने बताया कि वह लेबनान में इजरायल को ‘आजादी से घूमने-फिरने’ की इजाजत नहीं देगा. रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी ने बताया कि इजरायली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने शनिवार को दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हमले किए. इन इलाकों को हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है.
NNA ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि 2 मार्च से 20 जून के बीच इजरायली हमलों में 4,057 लोग मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और मेडिकल स्टाफ शामिल हैं. मंत्रालय आम नागरिकों और लड़ाकों के बीच कोई फर्क नहीं करता है.
इजरायल ने क्या बताया?इजरायली सेना (IDF) ने कहा कि हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में काम कर रही इजरायली सेना पर 50 से ज्यादा गोले दागे, जिसके जवाब में इजरायल ने उन ठिकानों पर हमले किए जिन्हें उसने हिजबुल्लाह के ठिकाने बताया.
इजरायली सेना ने कहा कि वह सीजफायर के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इजरायल या उसकी सेना के खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देना जारी रखेगी.
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हिजबुल्लाह के साथ हुई लड़ाई में कम से कम 32 सैनिक और चार आम नागरिक मारे गए हैं.
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स्विट्जरलैंड पहुंचा US-ईरान का डेलीगेशन
प्रेस टीवी के मुताबिक, ईरान का एक डेलीगेशन 20 जून को अमेरिका के साथ बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच गया है. इस डेलीगेशन को ईरानी संसद के स्पीकर और चीफ नेगोशिएटर मोहम्मद बाकर कालिबाफ लीड कर रहे हैं और इसमें विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ देश के कई सीनियर अधिकारी शामिल हैं. वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं.
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