तेलंगाना में 200 आवारा कुत्तों को ज़हर देकर मार दिया गया. कामारेड्डी ज़िले में आवारा कुत्तों की कथित सामूहिक हत्या के मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इनमें दो ग्राम पंचायतों की सरपंच और उनके पति भी शामिल हैं. आरोप है कि इन्होंने कुत्तों को ज़हर और जानलेवा इंजेक्शन देकर मारा है.
तेलंगाना में 200 आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या, दो सरपंच समेत 9 पर केस
तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में करीब 200 आवारा कुत्तों को जहर और इंजेक्शन देकर मारने का मामला सामने आया है. पुलिस ने दो ग्राम पंचायतों की सरपंच समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. आरोप है कि पंचायत चुनाव से पहले किए गए वादे के तहत यह कार्रवाई कराई गई. पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है और जांच जारी है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जनवरी 2026 को आदुलापुरम गौतम ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई. वे स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया में एनिमल क्रुएल्टी प्रिवेंशन मैनेजर हैं. शिकायत में बताया गया है कि पिछले दो से तीन दिनों के भीतर करीब 200 आवारा कुत्तों को मार दिया गया. ज़िले के माचारड्डी पुलिस थाना क्षेत्र के कुल 5 गांव में ये घटना घटी. इनमें भवानीपेट, पालवंचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारामेश्वरपल्ली गांव शामिल हैं.
पूरा मामला क्या है?एनिमल एक्टिविस्ट आदुलापुरम के मुताबिक, 12 जनवरी को दोपहर करीब तीन बजे उन्हें इन कथित हत्याओं की पुख्ता जानकारी मिली. उन्होंने आरोप लगाया कि ये पूरी कार्रवाई संबंधित गांवों के सरपंचों के कहने पर हुई है. शिकायत में पांचों गांवों के सरपंचों पर उन्होंने हत्या का आरोप लगाया है. इसके अलावा किशोर पांडे नाम के एक व्यक्ति पर भी शिकायत दर्ज कराई जिसे कुत्तों को मारने की जिम्मेदारी दी गई थी. शिकायत के अनुसार, कुत्तों को ज़हरीले इंजेक्शन दिए गए, जिससे उनकी मौत हो गई.
आदुलापुरम ने बताया कि उसी दिन शाम करीब 6 बजे वे एक दोस्त के साथ भवानीपेट गांव पहुंचे, जहां येल्लम्मा मंदिर के पीछे पेड्डाचेर्वु इलाके में कई कुत्तों के शव पड़े मिले. उन्होंने शिकायत में ये दावा किया कि अन्य गांवों में भी इसी तरह की क्रूरता देखी गई.
जानकारी के मुताबिक़, दिसंबर में गांववालों ने ग्राम पंचायत चुनावों से पहले कुछ उम्मीदवारों से आवारा कुत्ते और बंदरों की समस्या का समाधान करने की मांग की थी. अब आरोप है कि ग्राम पंचायतों ने इसी वादे को पूरा करते हुए आवारा कुत्तों पर ये क्रूर कार्रवाई की है.
पुलिस ने क्या बताया?इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुलिस ने ये मामला पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत दर्ज किया है. शिकायत में ये भी कहा गया है कि सरकार को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नसबंदी और टीकाकरण जैसे मानवीय उपाय अपनाने चाहिए थे. रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस ने बताया कि कुत्तों को इंजेक्शन के जरिए ज़हर दिया गया और उनके खाने में भी ज़हर मिलाया गया था. पुलिस ने कुत्तों के अंगों से मिले ज़हर को फॉरेंसिक टेस्ट के लिए भेज दिया है.
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच कर रही है. कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की ज़िम्मेदारी और जवाबदेही भी तय की जाएगी. मंगलवार, 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता भी जताई. कोर्ट ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से नियमों का सही से पालन नहीं हो रहा है. ऐसे मामलों में राज्यों से भारी मुआवज़ा दिलाने पर विचार किया जा जाएगा. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने की बात भी कही गई है.
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