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'अप्रेजल के बाद भी सैलरी कम आई', TCS के कर्मचारियों ने अपना दुखड़ा सुनाया

TCS News: TCS में अप्रेजल के बाद भी कर्मचारी नाराज हैं. उनका कहना है कि 5% अप्रेजल होने के बावजूद उनकी सैलरी कम आई है. इसकी वजह नए लेबर कोड के मुताबिक फिर से डिजाइन किया हुआ सैलरी स्ट्रक्चर बताया जा रहा है.

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टीसीएस के कर्मचारी सैलरी स्ट्रक्चर में हुए बदलाव से परेशान हैं (PHOTO-India Today)

सैलरी में अप्रेजल होने पर लोग खुश हो जाते हैं. लेकिन टाटा की जानी-मानी कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) में उल्टा देखने को मिल रहा है. यहां अप्रेजल के बाद भी कर्मचारी नाराज हैं. उनका कहना है कि 5% अप्रेजल होने के बावजूद उनकी सैलरी कम आई है. इसकी वजह नए लेबर कोड के मुताबिक फिर से डिजाइन किया हुआ सैलरी स्ट्रक्चर बताया जा रहा है.

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कई कर्मचारियों का आरोप है कि भारत के नए लेबर कोड से जुड़े रीस्ट्रक्चरिंग बदलावों के बाद, उनकी नई सैलरी या तो बहुत कम बढ़ी या असल में कम हो गई. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक एक कर्मचारी ने कथित तौर पर दावा किया कि अप्रेजल लेटर मिलने के बाद भी उनकी सैलरी हर महीने 3,000 रुपये कम हो गई, जबकि दूसरों ने कहा कि कागजों पर उनकी सालाना सैलरी 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक कम हो गई है.

कैसे हुआ सैलरी में अंतर?

सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन कंपनी के सैलरी स्ट्रक्चर में हुए बदलावों को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, TCS ने इस साल दिखाए गए 'कॉस्ट टू कंपनी' (CTC) स्ट्रक्चर से ग्रेच्युटी को हटा दिया है, भले ही ग्रेच्युटी का पेमेंट अंदरूनी तौर पर जारी रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक TCS से जुड़े एक सीनियर व्यक्ति ने मनीकंट्रोल को बताया कि ग्रॉस सैलरी और 'टेक-होम पे' (हाथ में आने वाली सैलरी) दोनों ही सुरक्षित हैं. उन्होंने यह तर्क दिया कि कर्मचारी नए स्ट्रक्चर की तुलना पुराने सैलरी लेटर से कर रहे हैं, जिनमें ग्रेच्युटी को कुल CTC में शामिल किया गया था.

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यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत की IT इंडस्ट्री, क्लाइंट के कम खर्च, प्रोजेक्ट में देरी और मुनाफे पर दबाव जैसी समस्याओं से जूझ रही है. ज्यादाचर बड़ी IT कंपनियां इस साल सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर काफी सतर्क रही हैं. दूसरी ओर Infosys, HCLTech और Tech Mahindra जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने भी अभी तक अपने कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से सैलरी में बढ़ोतरी लागू नहीं की है.

TCS ने सैलरी पर क्या कहा?

TCS में अभी 5.84 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. कंपनी का कहना है कि नए सैलरी स्ट्रक्चर का मकसद नए लेबर कोड का पालन करना, सैलरी स्ट्रक्चर को एक जैसा बनाना और कर्मचारियों की 'टेक-होम पे' (हाथ में आने वाली सैलरी) को सिक्योर रखना है. साथ ही कर्मचारियों को टैक्स बचाने के लिए जरूरी लचीलापन भी देना है. कंपनी ने यह भी कहा कि वह हर साल सैलरी में बढ़ोतरी करने के अपने रिकॉर्ड को बनाए रखेगी और कर्मचारियों की तरक्की और लंबे समय तक वैल्यू बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

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