अजय सिंह नाम का एक शख्स दिल्ली की फ्लाइट लेने के लिए भोपाल एयरपोर्ट पहुंचा. वहां फ्लाइट बोर्डिंग से पहले रूटीन चेकिंग चल रही थी. अजय की भी चेकिंग हुई. लेकिन इसी दौरान उन्हें एयरपोर्ट पर मौजूद CISF स्टाफ ने हिरासत में ले लिया. आरोप लगा कि चेकिंग के दौरान उनके पास से हेरोइन (Heroin) और MDEA ड्रग्स बरामद किए गए हैं. लेकिन अब सामने आया कि ये सब कुछ एक गलती थी. एयरपोर्ट अथॉरिटी को जो मिला वो असल में अमचूर पाउडर और गरम मसाला का पैकेट निकला. इसी मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित को दस लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है. अब पूरा मामला विस्तार से समझते हैं.
'ड्रग्स नहीं, गरम मसाला'... 57 दिन जेल में रहा कारोबारी, कोर्ट ने दिया 10 लाख हर्जाने का आदेश
Madhya Pradesh High Court: एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान एक शख्स के पास से Heroin और MDEA ड्रग्स बरामद किए गए. लेकिन अब सामने आया कि ये सब कुछ एक गलती थी. एयरपोर्ट अथॉरिटी को जो मिला वो असल में अमचूर पाउडर और गरम मसाला का पैकेट निकला.


सबसे पहले तो MDEA और हेरोइन के बारे में जान लीजिए. हेरोइन एक नशीला पदार्थ है जो अफीम के पौधे से बनाया जाता है और अक्सर भूरे या सफेद रंग में पाउडर के फॉर्म में होता है. MDEA (Mytheylene Dioxym N-Ethylamphetamine) एक तरह का नशीला केमिकल ड्रग है जो MDMA से मिलता-जुलता है. ये एम्फेटामाइन फैमिली ड्रग्स कैटेगरी में है, जिसे अक्सर 'ईव' भी कहा जाता है. अब केस पर वापिस आते हैं.
भोपाल एयरपोर्ट का है केसलाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब अजय सिंह भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके बैग की चेकिंग हुई. चेकिंग के दौरान एयरपोर्ट पर मौजूद ETD मशीन में पाया गया कि अजय के पास मौजूद ब्रांडेड अमचूर पैकेट में 1-4 फीसदी हीरोइन और गरम मसाला पैकेट में 10 फीसदी MDEA है. ETD मशीन एक सेंसिटिव डिटेक्टर है जो ड्रग्स को भांपने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जिसके बाद CISF स्टाफ ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और बरामद पैकेट को टेस्टिंग के लिए भेज दिया गया. इस मामले में भोपाल के गांधी नगर पुलिस थाने में अजय के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, जब्त किए गए पैकेट को रीजनल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (RFL) भेजा गया. अजय के वकील ने आरोप लगाया कि लैब ने भी टेस्टिंग में देरी की और बाद में सैंपल वापस भेज दिया. लैब की तरफ से जवाब आया कि लैब में पर्याप्त इक्विपमेंट न होने के कारण टेस्टिंग पूरी नहीं की जा सकी. जिसके बाद सैंपल को सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी (CFL) हैदराबाद भेजा गया. CFL की रिपोर्ट के मुताबिक, जब्त किए गए पैकेट में कोई नशीला पदार्थ नहीं पाया गया. फिर अजय सिंह को आख़िरकार 57 दिन हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया.
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High Court ने दिया हर्जाने का आदेशजस्टिस दीपक खोट की बेंच ने कहा कि अधिकारीयों की लापरवाही की वजह से पीड़ित अजय सिंह को बिना किसी गलती के 57 दिन के लिए हिरासत में रहना पड़ा. कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को 10 लाख रुपये हर्जाना अजय सिंह को देने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि ऑर्डर रिलीज़ होने के तीन महीने के अंदर ये राशि पीड़ित को मुहैया करा दी जाए. कोर्ट ने ये भी कहा कि राज्य के पास स्टैंडर्ड लैब न होने की वजह से इस प्रक्रिया में देरी हुई है.
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