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'राम की बदनामी छिपाई गई, सीता को खोकर अपना विवेक खोया', तमिल कवि के बयान पर बवाल

तमिल गीतकार वैरामुत्तु ने भगवान राम को लेकर ऐसा बयान दिया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया. उन्होंने कहा कि सीता को खो देने के बाद भगवान राम अपना होश खो बैठे थे.

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वैरामुत्तु के राम दिए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है (India Today)

तमिल गीतकार और कवि वैरामुत्तु (Vairamuthu) ने भगवान राम पर बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने प्राचीन तमिल कवि कंबर (Kambar) के लिखे रामायण के एक प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि सीता को खो देने के बाद भगवान राम अपना ‘होश खो बैठे थे’. वैरामुत्तु को कंबर के नाम पर 'कविचक्कवर्ती कंबार' पुरस्कार दिया जा रहा था. इसी दौरान अपने भाषण में उन्होंने ये बातें कहीं. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कवि वैरामुत्तु ने कहा, 

बदनामी और निंदा लोकप्रियता के अवशेष के तौर पर साथ आते हैं. अगर प्रसिद्धि आती है तो बदनामी भी आती है. भगवान राम का जीवन भी ऐसा ही था, लेकिन कवि कंबर ही वो व्यक्ति हैं, जिन्होंने भगवान राम के चरित्र से बदनामी को मिटा दिया था.

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वैरामुत्तु ने आगे कहा,

राम ने छिपकर बालि का वध किया था. इससे उन्हें बड़ी बदनामी मिली थी, लेकिन कंबर ने राम के हिस्से आई इस बदनामी को मिटा दिया.

रामायण की कथा के अनुसार, भगवान राम ने किष्किंधा के राजा बालि का तब छिपकर वध कर दिया था, जब वह अपने भाई सुग्रीव के साथ गदा युद्ध कर रहे थे. कम्बन के महाकाव्य में बालि के संवाद का हवाला देते हुए वैरामुथु ने कहा, 

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बालि ने राम के इस कृत्य पर सवाल उठाया था और एक शासक और वनवासी के रूप में उनके आचरण के बीच अंतर भी बताया था. इस ग्रंथ में बालि ने टिप्पणी की है कि राम ने अपने भाई के लिए अपना राज्य त्याग दिया था. लेकिन वन में बालि का शासन उसके ही भाई को सौंप दिया. हालांकि बालि ने राम को दोषी नहीं माना और आगे कहा कि राम के कामों को क्षमा किया जा सकता है क्योंकि सीता को खोने के बाद वह अपना होश खो बैठे थे.

कंबर रामायण के श्लोक की व्याख्या करते हए कवि वैरामुथु ने कहा, 

"सीता को खोकर राम अपना विवेक खो बैठे हैं." विवेक खो चुके किसी व्यक्ति के अपराध को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के अनुसार अपराध नहीं माना जाता. आईपीसी की धारा 84 कहती है कि पागल व्यक्ति का अपराध, अपराध नहीं माना जा सकता. मुझे नहीं पता कि कंबर को आईपीसी का ज्ञान था या नहीं, लेकिन वह समाज को जानते थे.

वैरामुत्तु ने कहा कि वाल्मीकि भी राम को इस अपराध के कलंक से नहीं बचा पाए थे लेकिन कंबर ने राम को बचा लिया. कंबर ने राम को 'रामचंद्र' कहा क्योंकि सूर्य पर कोई दाग नहीं होता जबकि चंद्रमा पर होता है. यही वजह है कि कंबर ने भगवान राम की तुलना चंद्रमा से की थी. 

सियासी विवाद शुरू

गीतकार के इस बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. भाजपा के प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा, 

वैरामुत्तु रामासामी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के मामले में एक घृणित अपराधी हैं. उन्हें भगवान राम और हिंदू धर्म के करोड़ों भक्तों से तुरंत माफी मांगनी चाहिए. क्या वैरामुत्तु में दूसरे धर्मों के खिलाफ ऐसी ईशनिंदा करने का साहस है?

इस कार्यक्रम में सीएम एमके स्टालिन भी मौजूद थे. ऐसे में केशवन ने डीएमके को भी इसे लेकर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि यह अपशब्द डीएमके के एक मौजूदा लोकसभा सांसद के कार्यक्रम में कहे गए थे. डीएमके नेताओं ने इस टिप्पणी की निंदा क्यों नहीं की?

केशवन के अलावा, तमिलनाडु भाजपा के राज्य सचिव अश्वत्थामन ने भी वैरामुत्तु से माफी मांगने को कहा है.

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