सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंस रिवीजन) प्रक्रिया में चुनाव आयोग की मदद के लिए जिला जजों की नियुक्ति के निर्देश दिए थे. इस पर ममता बनर्जी सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि चुनाव आयोग ने इन न्यायिक अधिकारियों को एक ‘ट्रेनिंग मॉडयूल’ फॉलो करने को कहा है. इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर संदेह मत करिए. वो किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे.
'जजों पर शक मत करें', सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को ये नसीहत क्यों दे दी?
Supreme Court ने 20 फरवरी को SIR प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और रिटायर्ड जिला जजों को तैनात करने के निर्देश दिए थे. बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे तकरार के बीच ये फैसला आया था.


NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते पहले कलकत्ता हाईकोर्ट को SIR प्रक्रिया में मदद करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने वोटर लिस्ट को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप का भी जिक्र किया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि न्यायिक अधिकारी दावों और आपत्तियों की जांच कर सकते हैं लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच का तनाव कम नहीं हुआ.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने 27 फरवरी को हुई सुनवाई में बंगाल सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने न्यायिक अधिकारियों को एक तय ट्रेनिंग मॉड्यूल का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं. कपिल सिब्बल ने कहा,
“कुछ अजीब हुआ है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायधीशों ने आदेश पारित किया था कि सभी तौर-तरीके कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और समिति द्वारा तय किए जाएंगे. लेकिन उन्होंने (चुनाव आयोग) पीठ पीछे न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं और एक ट्रेनिंग मॉड्यूल जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं.”
सिब्बल के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा,
“वह अपने न्यायिक अधिकारियों को अच्छी तरह से जानता है. वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे. न्यायिक अधिकारियों पर संदेह न करें. वे फैसला करेंगे. इसका अंत होना ही चाहिए. चुनाव आयोग के अलावा और कौन ट्रेनिंग देगा? हमने साफ कर दिया है कि किन डॉक्यूमेंट्स को देखा जाना है. हमारे निर्देश बेहद स्पष्ट हैं. इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.”
इसके बाद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR सत्यापन में डोमिसाइल सर्टिफिकेट को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जवाब में कहा,
“अगर हमारे आदेशों में ऐसा कोई डॉक्यूमेंट शामिल है तो इसकी जांच की जाएगी. न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार इस मामले में उसके पारित आदेशों से आगे जाएगी.”
बता दें कि 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और रिटायर्ड जिला जजों को तैनात करने के निर्देश दिए थे. बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे तकरार के बीच ये फैसला आया था. 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 250 जिला जजों के अलावा पश्चिम बंगाल के सिविल जजों की तैनाती और 80 लाख दावों और आपत्तियों की जांच के लिए झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की मांग को मंजूरी दी थी.
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