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चिलचिलाती गर्मी से राहत देने कब आएगा मानसून? मौसम विभाग ने बता दिया

Southwest monsoon update: केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख 1 जून होती है. जो चार महीने लंबे इस मौसम की शुरुआत का संकेत देती है. लेकिन इस साल अगर ये 26 को आया, तो ऐसा लगातार तीसरी बार होगा, जब केरल में मानसून ने समय से पहले दस्तक दी.

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केरल में समय से पहले मानसून के पहुंचने की संभावना है. (फोटो-इंडिया टुडे)

दक्षिण-पश्चिम मानसून के एक बार फिर केरल में तय समय से पहले पहुंचने की संभावना है. 15 मई को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को केरल में दस्तक दे सकता है. लेकिन इसमें चार दिन आगे-पीछे का अंतर हो सकता है.  

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केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख 1 जून होती है. जो चार महीने लंबे इस मौसम की शुरुआत का संकेत देती है. लेकिन इस साल अगर ये 26 को आया, तो ऐसा लगातार तीसरी बार होगा, जब केरल में मानसून ने समय से पहले दस्तक दी. 

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में 2025 में मानसून के 27 मई को पहुंचने की संभावना जताई गई. मगर ये 24 मई को आ गया था. इसी तरह 2024 में ये 31 मई के पूर्वानुमान के मुकाबले 30 मई को पहुंचा था. 

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फोटो-एक्स

केरल में ‘ऑरेंज अलर्ट’

केरल समेत दक्षिण भारत के कई इलाकों में पूरे हफ्ते मानसून से पहले ही बारिश हो रही है. केरल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने के बाद 15 मई को IMD ने राज्य के दो जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' भी जारी किया. ये जिले हैं-इडुक्की और मलप्पुरम.

मौसम विभाग ने 15 मई के लिए ही राज्य के सात जिलों में ‘येलो अलर्ट’ बताया है. ये जिले हैं- कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड. 16 मई के लिए, मौसम विभाग ने राज्य के सात जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है. 

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'ऑरेंज अलर्ट' का मतलब है 11 cm से 20 cm तक बहुत भारी बारिश, जबकि 'येलो अलर्ट' का मतलब है 6 cm से 11 cm के बीच भारी बारिश.

इस साल कम बारिश का अनुमान

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून सबसे पहले 22 मई के आस-पास दक्षिण अंडमान सागर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण बंगाल की खाड़ी में पहुंचता है. मगर मौसम विभाग ने कहा है कि इस साल यहां मानसून की शुरुआत अगले 24 घंटों में कभी भी होने की उम्मीद है.

भारत में सालभर होने वाली बारिश का 70 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच देखने को मिलता है. यह बारिश पूरे देश की खेती-बाड़ी, जल संसाधन प्रबंधन, जलाशयों को फिर से भरने और पूरी इकॉनोमी के लिए काफी जरूरी है. मगर IMD ने इस अवधि के दौरान देश भर में औसत से कम बारिश होने का अनुमान लगाया है.

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