NEET UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI का शक अब पेपर कराने वाली एजेंसी NTA पर ही गहरा रहा है. क्योंकि जिस तरह पेपर लीक हुआ है उससे साफ है कि बिना किसी अंदरूनी मदद के इतनी बड़ी धांधली नहीं हो सकती है. सूत्रों का दावा है कि मामले की जांच कर रही CBI को NTA के भीतर भी कुछ गड़बड़ी की आशंका है. उन्हें शक है कि कोई अंदरूनी व्यक्ति संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचा रहा है. CBI को इस बात का शक क्यों और कैसे हुआ अब ये जानते हैं.
NEET पेपर लीक में NTA के अफसर पर शक, CBI जांच में जुड़ रहीं कड़ियां, खुले राज
NEET paper leak: CBI को लगता है कि जिस तरह पेपर लीक हुआ, उससे साफ है कि बिना किसी अंदरूनी मदद के इतनी बड़ी धांधली नहीं हो सकती है. CBI को शक है कि NTA के भीतर का कोई व्यक्ति संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचा रहा है.


हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 14 मई को CBI ने दिल्ली की एक अदालत में बताया कि NEET-UG 2026 का प्रश्न पत्र लीक होने का सुराग NTA के अंदर मौजूद किसी सूत्र से जुड़ा है. आरोप है कि आरोपी शुभम खैरनार ने गेस पेपर पुणे के एक व्यक्ति से हासिल किया था. जिसने NEET UG 2026 का गेस पेपर अपने किसी "NTA सूत्र" से प्राप्त किया था. CBI ने कहा कि वह अब इस लीक में शामिल NTA अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की पहचान करने पर काम कर रही है.
CBI की जांच में कौन से राज खुले?रिमांड याचिका में CBI ने बताया कि कैसे पेपर लीक हुआ और इसकी शुरुआत कहां से हुई. CBI के मुताबिक शुभम खैरनार ने पुणे में अपने एक अज्ञात संपर्क से पेपर हासिल करने के बाद, अप्रैल में गुरुग्राम के यश यादव को बताया कि मांगीलाल खाटिक अपने छोटे बेटे के लिए NEET-UG के 10 से 12 लाख रुपए देने को तैयार है.
इसके बाद 29 अप्रैल को, खैरनार ने टेलीग्राम के ज़रिए यादव को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर से 500-600 सवाल दिए. यादव को मांगीलाल का बड़ा बेटा विकास बीवाल, राजस्थान के सीकर में NEET कोचिंग के दौरान से जानता था. इसी कनेक्शन के जरिए वो मांगीलाल खटीक तक पहुंचा. इसके बाद मांगीलाल और यश यादव के बीच 10 लाख में सौदा तय हुआ. जिसकी शर्त यह थी कि क्वेश्चन बैंक के 150 सवाल NEET के पेपर से मेल खाने चाहिए.
CBI ने बताया कि मांगीलाल को जैसे ही पेपर मिला. उसने उन्हें प्रिंट करवाया. फिर तीन प्रिंटेड सेट अपने छोटे बेटे विकास और जान-पहचान वालों को बांट दिए, जिन्हें परीक्षा देनी थी. CBI ने कोर्ट में बताया कि यश यादव के साथ सारा संपर्क मांगीलाल ने ही किया था. PDF प्रिंट करवाए गए और तीन प्रिंटेड सेट बांट दिए गए. आरोपी यश यादव ने मांगीलाल के बड़े बेटे विकास से यह भी कहा था कि वह लीक हुए सवालों के लिए और उम्मीदवार ढूंढ़े. ताकि उन सवालों को हासिल करने में जो पैसे खर्च किए थे, उनमें से कुछ की भरपाई हो सके. इसके बाद विकास ने WhatsApp और Instagram के ज़रिए उम्मीदवारों की जानकारी यादव के साथ शेयर की.
इंडिया टुडे से जुड़े शरत कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक मांगीलाल और दिनेश पहले भी नीट का पेपर लीक कर आगे बेच चुके है. पिछले साल 2025 में भी बिवाल परिवार के सभी पांच बच्चों को नीट का पेपर परीक्षा से पहले मिल गया था. जांच एजेंसियों का अब भी मानना है कि सारा खेल कोचिंग माफिया का है. पकड़े गए लोग केवल नेटवर्क का हिस्सा थे.
फिलहाल CBI का सारा फोकस पुणे के उस अज्ञात शख्स का पता लगाना है. जिसके "NTA सोर्स" से पेपर लीक हुआ. अभी CBI ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इसके साथ ही देश के कई हिस्सों में एक साथ छापेमारी की. एक्शन भी हुआ. इसी जांच के बाद CBI को शक हुआ कि इस बार पेपर लीक के पीछे कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक पुराना और संगठित नेटवर्क काम कर रहा है. CBI के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर 12 मई को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई. इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत मामला दर्ज किया गया. भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की संबंधित धाराओं को भी एफआईआर में शामिल किया गया है.
अब तक CBI की कार्रवाईपिछले 24 घंटों में 14 जगहों पर छापेमारी हुई है. जिसमें आरोपियों के पास से आपत्तिजनक चैट, लीक हुए प्रश्न पत्र और मोबाइल फ़ोन सहित अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए गए. कुछ डिलीट किए गए डेटा की फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता है. दस्तावेज इकट्ठा करने के लिए CBI की एक टीम दिल्ली में NTA मुख्यालय भी गई. अब देखना होगा कि जांच जब आगे बढ़ती है तो क्या नए खुलासे होते हैं और NTA पर CBI को जो शक है क्या वो सच साबित होता है.
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