सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है. इसमें अन्ना ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि छात्रों की पेपर लीक से जुड़ी मांगों को बात करके सुलझाया जाए, न की उन्हें दबाने की कोशिश की जाए.
'एक मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिर जाएगी', अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को क्या-क्या कह दिया?
Social Activist Anna Hazare ने PM Narendra Modi को Sonam Wangchuk की भूख हड़ताल और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर लेटर लिखा है.


अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफे से ‘सत्ता नहीं चली जाएगी’ बल्कि, अन्य मंत्रालयों में कड़ा संदेश जाएगा कि सही से काम न करने पर पद से बर्खास्त कर दिया जाएगा.
पीएम मोदी को अन्ना हजारे की चिट्ठीअन्ना हजारे की ओर से यह लेटर बुधवार, 22 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया. उन्होंने देश के छात्रों और सोनम वांगचुक की उन मांगों पर भी ध्यान देने को कहा, जिसे लेकर महीने भर से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. अन्ना ने अपने लेटर में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी बेरोजगारी और अन्य कई समस्याओं के बारे में बात की. इनमें NEET पेपर लीक का मुद्दा भी शामिल है.
अन्ना ने NEET पेपर लीक के साथ उन 22 छात्रों का भी जिक्र किया जिन्होंने पेपर लीक के बाद आत्मघाती कदम उठाए. अन्ना ने साफ तौर पर अपने लेटर में लिखा कि परीक्षा के रिजल्ट में बड़ी गड़बड़ी होने के बाद उसको छोटे स्तर के कर्मचारियों पर डालना और अच्छी बातों का श्रेय खुद लेना अच्छा नहीं है. अन्ना ने कहा कि देश की जनता के प्रति वरिष्ठों (मंत्रियों) की जिम्मेदारी और जवाबदेही बनती है.
लेटर में आगे लिखा है,
‘छात्र और उनके परिजन पिछले 25 दिनों से सड़कों पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करते हुए संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. जवाबदेही तय करने के लिए किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिर जाएगी. बल्कि, बाकी मंत्रियों को यह संदेश जाएगा कि अगर उनका विभाग सही से काम नहीं करेगा, तो उसे पद से हटा दिया जाएगा.’

अन्ना हजारे ने सोनम वांगचुक को ‘जबरन’ जंतर-मंतर से हटाए जाने के बारे में भी लिखा. उन्होंने कहा कि वांगचुक को प्रोटेस्ट साइट से हटाने के पहले सरकार की ओर से उनसे कोई बातचीत नहीं की गई. इतने दिनों तक दिल्ली में चल रहे अनशन के बावजूद भी सरकार की ओर से किसी का आंदोलनकारियों से बात न करना सही नहीं है.
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अन्ना ने आगे लिखा,
‘लोकतंत्र में बातचीत करना हमेशा सही ऑप्शन है. आपसे निवेदन है कि जनता की आवाज को विपक्ष की आवाज के रूप में न देखा जाए. आंदोलनकारी भी हमारे देश के नागरिक हैं. उनकी बातों को सुनना, विश्वास बनाना और सकारात्मक चर्चा के बाद उसका हल निकालना ही लोकतंत्र की असली परीक्षा है.’

अन्ना के मुताबिक, मतभेद होना स्वाभाविक बात है, लेकिन उसका समाधान बातचीत और आपसी सम्मान के साथ ही निकाला जाना चाहिए.
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