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SIR में 70 लाख नाम बिना वजह काटे गए? अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का बड़ा दावा

चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम हटाए गए. अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला के अनुमान के मुताबिक, जिन राज्यों में फाइनल लिस्ट जारी हो चुकी है, वहां करीब 70 लाख पात्र मतदाताओं के नाम बिना स्पष्ट वजह के सूची से बाहर रह गए हो सकते हैं.

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अर्थशास्त्री भल्ला ने 70 लाख नाम कटने का अनुमान लगाया है (COURTSEY- ITG)

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  • भारतीय चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट-लेवल पर कुल 13.37 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटा दिए, जिनमें तीन चरणों के दौरान नामों में कटौती शामिल है।
  • SIR के दौरान हटाए गए नामों में मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेशन जैसे वैध कारण शामिल थे, जिसके कारण लगभग 70 लाख पात्र मतदाताओं के नाम बिना स्पष्ट कारण हटाए गए।
  • अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला के अनुसार, हटाए गए नामों में से लगभग 70 लाख नाम ऐसे पात्र मतदाता हैं, जिन्हें हटाए जाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया और यह 16 अक्टूबर, 2026 तक के डेटा पर आधारित है।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने जो SIR किया, उसे लेकर पूरे देश में बवाल कटा है. विपक्ष का आरोप है कि इसमें कई ऐसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे, जो वोट देने के लिए एलिजिबल थे. SIR को लेकर चल रही बहस मुख्य रूप से 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आंकड़े पर केंद्रित है. लेकिन, इनमें से कितने ऐसे वोटर्स थे, जिनके नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाने चाहिए थे? इस पर अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का अनुमान है कि जिन राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां लगभग 70 लाख एलिजिबल वोटरों के नाम बिना किसी स्पष्टीकरण के हटा दिए गए होंगे.

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17 अक्टूबर की रात अपने एक ब्लॉग में उन्होंने ये दावा किया है.

भल्ला के एनालिसिस में क्या है?

अपने एनालिसिस में भल्ला ने तर्क दिया कि 13 करोड़ के आंकड़े में SIR के तीनों चरणों के दौरान ड्राफ्ट-लेवल पर हटाए गए नाम शामिल हैं. इनमें वे नाम भी हैं जिन्हें मृत्यु, कहीं और चले जाने या नाम दोहराए जाने (डुप्लीकेशन) जैसे वैध कारणों से हटाया गया था. इसमें वे राज्य भी शामिल हैं, जहां फाइनल वोटर लिस्ट अभी तक जारी नहीं की गई हैं. भल्ला कहते हैं कि जनसंख्या के अनुमानों, जन्म-मृत्यु के आधिकारिक आंकड़ों और SIR से पहले चुनाव आयोग के वोटर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों के आधार पर बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए गए मतदाताओं की संख्या लगभग 70 लाख है. यह आंकड़ा राजनीतिक बहस के सेंटर में चल रहे 13 करोड़ के आंकड़े से काफी कम है. भल्ला कहते हैं, 

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बिना स्पष्टीकरण के हटाने का मतलब यह नहीं है कि इन 70 लाख लोगों में से हर एक का नाम गलत तरीके से हटाया गया है. हालांकि, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके लिए यह कोई छोटी बात नहीं है. लेकिन यह हर 100 वयस्क नागरिकों में से एक से भी कम है. न कि वह आंकड़ा जो सुर्खियों से ऐसा लगता है कि हर 7 में से एक व्यक्ति का नाम हटा दिया गया है.

हालांकि, भल्ला का एनालिसिस गलत तरीके से नाम हटाए जाने की चिंताओं को खारिज नहीं करता. इसके बजाय, यह SIR के दौरान हटाए गए कुल नामों और उन पात्र मतदाताओं की संख्या के बीच अंतर करने का प्रयास करता है, जो शायद फाइनल लिस्ट में नहीं है.

13 करोड़ के आंकड़े का context क्या है?

चुनाव आयोग ने बताया कि SIR के तीन चरणों के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम हटाए गए थे. इनमें से 7.22 करोड़ नाम बिहार और दूसरे चरण (Phase II) में शामिल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से थे. जबकि 6.15 करोड़ नाम तीसरे चरण के 17 राज्यों से थे. भल्ला ने बताया कि ये नाम दावों और आपत्तियों की सुनवाई से पहले हटाए गए थे. 

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रॉयटर्स द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इनमें 2.8 करोड़ ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी. 6.3 करोड़ ऐसे लोग थे, जो कहीं और चले गए थे. एक करोड़ के नाम दो बार दर्ज थे. वहीं तीन करोड़ ऐसे लोग थे, जिनका पता नहीं चल सका. भल्ला का तर्क है कि इन श्रेणियों को अपने आप 'गलत तरीके से हटाया गया' नहीं माना जा सकता. उनका कहना है कि मुख्य सवाल यह है कि वोटर लिस्ट से वाजिब नाम हटाने के बाद कितने एलिजिबल वोटर्स लिस्ट से गायब हैं?

Shortfall का हिसाब कैसे लगाया?

भल्ला ने 2026 के मध्य में भारत की वयस्क माने एडल्ट आबादी का अनुमान 100.8 करोड़ लगाया है. उनका तर्क है कि एक फुल वोटर लिस्ट में हर एडल्ट का नाम हो, ये जरूरी नहीं है. क्योंकि वोटर रजिस्ट्रेशन स्वैच्छिक है और कुछ लोग कभी वोटर्स लिस्ट में रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराते. उनका अनुमान है कि 7.5 प्रतिशत एडल्ट लोग रजिस्टर्ड नहीं हैं. अधिक उम्र के वयस्कों में 1 प्रतिशत की और कमी को जोड़ते हुए वो कुल नॉन-रजिस्टर्ड वोटर्स को लगभग 8.5 प्रतिशत मानते हैं. इस आधार पर एक सही मतदाता सूची में लगभग 92.2 करोड़ नाम होने चाहिए.

इसके बाद, भल्ला इसी तरीके को हर राज्य के लिए लागू करते हैं. वो जनसंख्या के अनुमानों और वोटर रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं ताकि अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन रेट के अंतर को ध्यान में रखा जा सके. अंतिम SIR रोल वाले 9 बड़े राज्यों के आंकड़ों के आधार पर एक सही और सटीक मतदाता सूची में 53.51 करोड़ नाम होने चाहिए. जबकि अंतिम सूची में 52.78 करोड़ नाम हैं. यानी लगभग 73 लाख नामों की कमी है.

(यह भी पढ़ें: पुरानी वोटर लिस्ट में मां-बाप का नाम था, ये साबित करने के बाद भी SIR लिस्ट से नाम कट गया)

इसमें से लगभग 5 लाख ऐसे लोगों को घटा दें जो नागरिक नहीं थे और जिन्हें सही तरीके से लिस्ट से हटाया गया था. फिर भी लगभग 70 लाख ऐसे पात्र वोटर्स बचते हैं, जिन्हें हटाए जाने का कोई साफ कारण नहीं बताया गया. ये अनुमान 16 अक्टूबर, 2026 तक उपलब्ध डेटा पर आधारित हैं. 

बता दें कि यह भल्ला की अपनी कैलकुलेशन है, न कि चुनाव आयोग की कोई आधिकारिक गिनती.

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