अयोध्या के राम मंदिर के बाद चढ़ावा चोरी के बाद अब मुंबई से दान चोरी की खबरें आ रही हैं. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के मशहूर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में 18 करोड़ रुपये की दान चोरी का दावा किया है. अब इस मामले में महाराष्ट्र के कानून और न्याय विभाग ने सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट से डिटेल्ड फाइनेंशियल रिपोर्ट मांगी है.
मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में 18 करोड़ की दान चोरी! सरकार ने मंदिर ट्रस्ट से मांगा हिसाब
Siddhivinayak Temple Donation Scam: मनसे प्रमुख Raj Thackeray ने एक लेटर के हवाले से आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटियों से नियमित तौर पर पैसे निकाले जा रहे थे. इससे सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

महाराष्ट्र के कानून और न्याय विभाग की तरफ से रिपोर्ट तलब किए जाने पर मंदिर ट्रस्ट ने अपना पक्ष रखा है. ट्रस्ट ने दान में हेरफेर का मामला सामने आने के बाद रिपोर्ट मांगने के दावों से इनकार किया है. आजतक की खबर के मुताबिक, इस मामले में 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था.
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की सफाईटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि कानून और न्याय विभाग का ताजा कदम उसकी गुजारिश पर ही आया है. ट्रस्ट ने बताया कि इस साल मई में उसने ही विभाग से मंदिर के डिटेल्ड ऑडिट की गुजारिश की थी, जो इन आरोपों के सामने आने से कई महीने पहले की गई थी.
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन और सीनियर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) नेता सदा सरवणकर ने मीडिया को बताया कि उन्होंने मार्च में चोरी के आरोप में 9 कर्मचारियों को पकड़ा था. तब कानून और न्याय विभाग को मामले की जांच के लिए लिखा गया था. सदा सरवणकर ने दावा किया,
"जब (मंदिर में) स्कैम रुक गया, तो मंदिर की कमाई 40-50 लाख रुपये महीना से 80-90 लाख रुपये महीना तक पहुंच गई."
सदा सरवणकर और मंदिर के एक अन्य ट्रस्टी राहुल लोंढे से इस्तीफा देने पर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या वे राम मंदिर दान चोरी मामले में चंपत राय और अनिल कुमार मिश्रा की तरह इस्तीफा देंगे? जवाब में सदा सरवणकर ने कहा, "हम क्यों इस्तीफा दें? घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए?"
मामले ने शनिवार, 1 अगस्त को तूल पकड़ा, जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सिद्धिविनायक मंदिर में दान चोरी का मुद्दा उठाया. मनसे के स्टूडेंट विंग के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि कर्मचारियों के पकड़े जाने से पहले मंदिर में हर हफ्ते मिलने वाला दान 50 लाख रुपये से कम था. उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन हफ्तों में यह कलेक्शन बढ़कर हर हफ्ते लगभग 1.5 करोड़ रुपये हो गया है.
ठाकरे ने तर्क दिया कि इससे पता चलता है कि दान पेटियों से नियमित तौर पर पैसे निकाले जा रहे थे. इससे सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अपना दावा मजबूत करने के लिए ठाकरे ने एक पत्र पढ़कर सुनाया.
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उन्होंने दावा किया ये पत्र मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने साइन करके महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखा था. पत्र में कहा गया है कि दान पेटियों से पैसे चुराने के आरोपी कर्मचारियों को ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण पकड़ा गया.
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