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'औरंगज़ेब के मकबरे पर लाखों खर्च, शिवाजी के मंदिर के लिए सिर्फ 270 रुपये प्रति वर्ष' RTI के हवाले से दावा

Funding For Aurangzeb Tomb: हिंदू जनजागृति समिति के सुनील घनवत ने मांग की है कि मालवन, सिंधुदुर्ग में शिवाजी के मंदिर के लिए दी जाने वाली ग्रांट में बढ़ोतरी की जाए. ये मंदिर महाराष्ट्र सरकार के अधीन है. घनवत का कहना है कि 1970 के गज़ट के मुताबिक, राज्य सरकार प्रति वर्ष महज 270 रुपये की ग्रांट देती है. इसे बढ़ाया जाना चाहिए.

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RTI में हुआ है खुलासा. (AI Image)
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मुस्तफा शेख

हिंदू जनजागृति समिति से जुड़े एक शख्स ने RTI के हवाले से दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज के मंदिर की देखरेख के लिए सिर्फ 270 रुपये प्रति वर्ष खर्च किए, जबकि औरंगज़ेब के मकबरे की देखरेख के लिए कुल साढ़े चार लाख रुपये से ज़्यादा खर्च किए गए. हिंदू जनजागृति समिति ने शिवाजी महाराज के मंदिर की देखरेख पर किए जाने वाले खर्च को बढ़ाने की मांग की है.

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हिंदू जनजागृति समिति के सुनील घनवत ने मांग की है कि मालवन, सिंधुदुर्ग में स्थित शिवाजी महाराज के मंदिर के लिए दी जाने वाली ग्रांट में बढ़ोतरी की जाए. दरअसल, मालवन में छत्रपति शिवाजी महाराज मंदिर स्थित है, जिसका निर्माण शिवाजी महाराज के बेटे राजाराम महाराज ने कराया था. यह मंदिर महाराष्ट्र सरकार के अधीन है. सुनील घनवत का कहना है कि 1970 के गजट के मुताबिक, राज्य सरकार ने प्रति वर्ष महज 270 रुपये की ग्रांट दी है, जिसे बढ़ाया जाना चाहिए.

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घनवत ने आरोप लगाया कि शिवाजी महाराज के मंदिर पर खर्च के विपरीत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने छत्रपति संभाजी नगर में स्थित औरंगज़ेब के मकबरे पर 2021-22 में 2 लाख 55 हजार 160 रुपये और 2022 से नवंबर 2023 तक 2 लाख 626 रुपये खर्च किए हैं. उनका दावा है कि औरंगज़ेब के मकबरे को लेकर RTI का जवाब जनवरी 2023 में मिला था, इसलिए उसके बाद के खर्च का कोई डेटा मौजूद नहीं है.

औरंगज़ेब-शिवाजी विवाद

हालिया विवाद समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी के एक बयान के बाद शुरू हुआ था. उन्होंने कहा था कि वे 17वीं सदी के मुगल बादशाह औरंगज़ेब को क्रूर, अत्याचारी या असहिष्णु शासक नहीं मानते. उनका कहना था कि इन दिनों फिल्मों के माध्यम से मुगल बादशाह की विकृत छवि बनाई जा रही है. इस बयान के बाद राजनीतिक पार्टियों ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया. बाद में अबू आज़मी ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. साथ ही, अपने बयान के लिए माफी भी मांगी थी.

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दूसरा विवाद महाराष्ट्र के संभाजीनगर में औरंगज़ेब की कब्र को लेकर है. बीजेपी, शिवसेना, MNS समेत कई पार्टियों ने औरंगज़ेब की कब्र हटाने की मांग की है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीते दिनों कहा था कि औरंगज़ेब की कब्र को हटाने की इच्छा हमारी भी है, लेकिन यह ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के तहत संरक्षित है. कांग्रेस सरकार के समय इसे ASI के हवाले कर दिया गया था.

उधर, कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. हर बार कांग्रेस पर आरोप लगाना सही नहीं है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार को खुद फैसला लेना चाहिए.

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