सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ा दिया है, ताकि लोग सोना कम खरीदें और देश का पैसा बाहर न जाए. अब सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का ध्यान देश में विदेशी पैसा लाने पर है. वे विदेशी निवेशकों को भारत में पैसा लगाने के लिए आकर्षित करना चाहते हैं. इसके लिए केंद्र सरकार ‘सरकारी बॉन्ड’ पर लगने वाले ‘विदहोल्डिंग टैक्स’ को कम करने या पूरी तरह खत्म करने का विचार कर रही है.
विदेशी पैसा देश में लाने की तैयारी कर रही सरकार, अब घटेगा टैक्स
केंद्र सरकार एक तरफ सोने का आयात रोककर देश का पैसा बाहर जाने से रोकने की कोशिश कर रही है. दूसरी तरफ टैक्स घटाकर विदेशी निवेशकों को भारत में पैसा लगाने का लालच दे रही है. अब एक और बड़ी तैयारी चल रही है.


जब कोई विदेशी निवेशक, भारतीय सरकारी बॉन्ड खरीदता है, तो उसे उस पर ब्याज मिलता है. विदेशी निवेशकों को मिलने वाले इस ब्याज पर सरकार पहले ही टैक्स काट लेती है. इसे ‘विदहोल्डिंग टैक्स’ कहते हैं. अभी विदेशी इन्वेस्टर्स को अपनी इस ब्याज कमाई पर लगभग 20% टैक्स देना पड़ता है. 20% की यह टैक्स दर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा दरों में से एक है. इस वजह से विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाने से कतराते हैं.
स्थिति कब और क्यों बदली?इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से पहले सरकार विदेशी निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ 5% टैक्स (रियायती दर) लेती थी. तब भारत में पैसा लगाना उनके लिए बहुत फायदेमंद था. लेकिन 2023 के बाद सरकार ने यह 5% वाली छूट खत्म कर दी. छूट खत्म होते ही यह टैक्स सीधे बढ़कर लगभग 20% हो गया. टैक्स 20% होने से विदेशी निवेशकों को भारत में कम मुनाफा हो रहा है, इसलिए वे यहां पैसा नहीं लगा रहे हैं. यही वजह है कि अब सरकार और RBI इस 20% टैक्स को फिर से कम करने या पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि विदेशी पैसा फिर से भारत आ सके.
सूत्रों के मुताबिक, नीतियां बनाने वाले अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर बहस चल रही है कि क्या टैक्स घटाने का यह फैसला वाकई काम करेगा. विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिका सबसे सुरक्षित बाजार माना जाता है. अमेरिका में ब्याज दरें पहले से ही बहुत ऊंची हैं. इससे विदेशी निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिलता हैं. ऐसे में अधिकारी डरे हुए हैं कि टैक्स कम करने के बाद भी विदेशी निवेशक भारत आएंगे या नहीं.
चिंता के पीछे की वजह?विदेशी निवेशकों ने एक तरह से हड़ताल कर दी है और वे भारत में नया पैसा लगाने से पूरी तरह कतरा रहे हैं. जब विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालते हैं, तो वे अपना रुपया डॉलर में बदलकर ले जाते हैं. इस वजह से सिर्फ दो महीने में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से 38 अरब डॉलर (लगभग 3.1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) कम हो गए हैं. यह देश के लिए एक बड़ी चेतावनी है.
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सरकार के पास अब हाथ पर हाथ धरकर बैठने का विकल्प नहीं बचा है. सरकार को अब एक साथ दो मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है. पहला- विदेशी मुद्रा का संरक्षण. जैसे कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाना, ताकि लोग बाहर से कम सोना खरीदें और देश का डॉलर बाहर जाने से बचे. दूसरा- बाजार को आकर्षक बनाना. जैसे कि विदहोल्डिंग टैक्स को 20% से घटाकर कम करना, ताकि विदेशी निवेशकों को भारत के बॉन्ड मार्केट में ज्यादा मुनाफा दिखे और वे भारत में पैसा वापस लाएं.
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