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राजौरी में कैसे हुई 17 की मौत? अब तक नहीं पता चला, 200 पदार्थ जांच के लिए भेजे गए

Rajouri mysterious deaths: राजौरी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अमरजीत सिंह भाटिया ने बताया कि मेडिकल अलर्ट की स्थिति से निपटने के लिए शीतकालीन छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं. और क्या तैयारियां की गई हैं? अभी तक कुछ पता क्यों नहीं चल सका?

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राजौरी के गांव में ऐसा क्यों हो रहा? किसी को समझ नहीं आ रहा (फ़ोटो - PTI)

जम्मू-कश्मीर का राजौरी ज़िला. यहां के बधाल गांव में अधिकारी अभी भी उस अज्ञात बीमारी का कारण जानने में जुटे हुए हैं, जिससे 17 लोगों की मौत हो गई. इसे लेकर मेडिकल अलर्ट जारी किया गया है. इस अलर्ट के मद्देनज़र राजौरी के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) के सभी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ़ की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. क़रीब 200 जहरीले पदार्थों (Toxins) की जांच की जा रही है.

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राजौरी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अमरजीत सिंह भाटिया ने बताया कि मेडिकल अलर्ट की स्थिति से निपटने के लिए शीतकालीन छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं. वहीं, चिकित्सा व्यवस्था में मदद के लिए GMC, राजौरी में 10 अतिरिक्त मेडिकल छात्रों को तैनात किया गया है. एक अधिकारी ने न्यूज़ एजेंसी PTI को बताया,

केंद्रीय टीम और पुलिस ने तीन परिवारों में रहस्यमय तरीक़े से हुई मौतों की अलग-अलग जांच शुरू की है. मृतकों के नमूनों में कुछ न्यूरोटॉक्सिन पाए जाने के बाद गठित 11 सदस्यीय SIT, आपराधिक पहलू की जांच जारी रखे हुए है. इस संबंध में अब तक 50 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ कर ली गई है. 

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इससे पहले, गांव बधाल को कंटेनमेंट जोन बनाया गया. क्वारंटीन में भेजे गए लोगों की संख्या बढ़कर 230 हो गई है.

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मामले की जांच में शामिल एक सीनियर डॉक्टर ने समाचार पत्र ट्रिब्यून को बताया कि वर्तमान में 200 से ज़्यादा जहरीले पदार्थों (Toxins) की जांच चल रही है. स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि बीमारी के कारण का पता लगाने में जल्द ही सफलता मिलेगी. मामले में राजौरी GMC के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सैयद शुजा कादरी का कहना है,

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सभी नमूने भारत भर में नेशनल लैबोरटरी में भेजे गए हैं. बीमारी के कारण का पता लगाने के लिए कम से कम 200 जहरीले पदार्थों की जांच की जा रही है. एक हफ़्ते के भीतर बीमारी के स्रोत के बारे में स्पष्ट पता चल जाएगा. हमें उम्मीद है कि हमें जल्द ही जवाब मिल जाएगा. जैसे ही कुछ पता चलेगा, हम जनता को इसके बारे में बता देंगे.

डॉ. सैयद शुजा कादरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि बीमारी किसी वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या जूनोटिक संक्रमण से जुड़ी नहीं है. उधर, GMC, राजौरी ने 25 जनवरी को बताया कि इस समय अस्पताल में भर्ती सभी नौ मरीज ठीक हो रहे हैं.

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मरीजों की जांच करते अधिकारी. (फ़ोटो - PTI)

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इन मौतों के सिलसिले में एक याचिका को स्वीकार कर लिया है. ये याचिका जम्मू स्थित एक आरटीआई कार्यकर्ता रमन शर्मा की तरफ़ से दायर की गई थी. न्यूज़ एजेंसी PTI की ख़बर के मुताबिक़, रमन शर्मा ने याचिका में ‘संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए न्याय, राहत और सक्रिय उपाय’ सुनिश्चित करने के लिए आयोग के हस्तक्षेप की मांग की है.

बता दें कि 7 दिसंबर से 19 जनवरी के बीच बधाल गांव में 13 बच्चों समेत 17 लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. मरीजों ने बुखार, दर्द, अत्यधिक पसीना, मतली और बेहोशी की शिकायत की थी. जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो गई.

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