स्कूल ‘शिक्षा का मंदिर है’ ठीक बात है, लेकिन ये क्या कि इस मंदिर में पढ़ाने वाले टीचर को आप ‘पुजारी’ ही मान लें और उनकी ड्यूटी ‘रामकथा के पंडाल’ में लगा दें. पढ़ाने के साथ-साथ जनगणना से लेकर चुनाव कराने तक हर काम में फिट करके उनको पहले ही ‘हर काम का राम’ बना रखा है. अब रामकथा की व्यवस्था भी ‘गुरुजी’ ही संभालेंगे!
सरकारी टीचर्स की नई ड्यूटी, "क्लास छोड़ रामकथा की व्यवस्था संभालें"
राजस्थान के बूंदी में शिक्षा विभाग का अनोखा फरमान सामने आया है. जहां पत्र लिखकर, पांच विद्यालय के पांच अध्यापकों की धार्मिक आयोजन में ड्यूटी लगाई गई है. यह ड्यूटी उन्हें 2 फरवरी से 7 फरवरी तक देनी होगी.


राजस्थान के बूंदी से खबर है कि 5 स्कूलों के 5 टीचर्स की ड्यूटी महायज्ञ और रामकथा के कार्यक्रम में लगा दी गई. ऐसा नहीं है कि मौखिक बोला गया. इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से बाकायदा फरमान जारी किया गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल है. हालांकि मामला सामने आने के बाद फरमान को निरस्त कर दिया गया.
फरमान में संबंधित स्कूलों के प्रिंसिपल को आदेश दिया गया है कि वो बताए गए टीचर्स को कार्यमुक्त करें ताकि धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उन्हें व्यवस्था में लगाया जा सके. जिन शिक्षकों की इस काम में ड्यूटी लगी है, उनके नाम अमित विजयवर्गीय, भगवती प्रसाद शर्मा, फिजिकल टीचर महावीर कुमार जैन, श्याम सुंदर शर्मा, पंकज कुमार शर्मा हैं.
31 जनवरी को जारी किए गए इस आदेश में लिखा है, “अंबिका माता मंदिर बांसी में 9 दिन के महायज्ञ, सामाजिक कार्यक्रम और रामकथा का आयोजन हो रहा है. इस धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 5 शिक्षकों की ड्यूटी ‘कार्यव्यस्थार्थ’ 2 फरवरी से 7 फरवरी तक लगाई जा रही है. संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों और संस्था प्रधानों को आदेश दिया जाता है कि वो इन 5 लोगों को कार्यमुक्त करें ताकि वो कार्यक्रम में व्यवस्था के लिए कार्यभार ग्रहण कर सकें.”

इस पत्र के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया.
इंडिया टुडे से जुड़े भवानी सिंह हाड़ा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र की प्रतियां मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य, संबंधी संस्था प्रधान, संबंधित कार्मिक और कार्यालय को भी भेजी गई हैं. इस पर माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी कुंज बिहारी भारद्वाज से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि गलती हुई थी. इस पूरे मामले में पत्र को संशोधित किया गया है और आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है.
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