दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी की सरकार थी तब उसने अपनी ‘शिक्षा-क्रांति का ‘ढोल-नगाड़ा’ खूब पीटा था. दावा किया था कि यहां सरकारी स्कूलों की सूरत बदल दी गई है. इससे लोग प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने लगे हैं. 2022 में पंजाब चुनाव में भी यही वादा AAP ने किया. यहां इसे ‘सिख्या क्रांति’ कहा और दावा किया कि वो सरकारी स्कूलों को ऐसा संवार देंगे कि बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूल भी उसके सामने पानी भरेंगे. अब ये हुआ या नहीं हुआ, इसका रिएलिटी चेक कैसे हो?
पंजाब सरकार की 'सिख्या क्रांति' का सच, AAP के सिर्फ एक विधायक के बच्चे सरकारी स्कूल में
दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों में जिसका ‘ढोल-नगाड़ा’ सबसे ज्यादा पीटा था वो था सरकारी स्कूलों का काया-कल्प. इसी मुद्दे को लेकर वो पंजाब गए और साल 2022 के चुनाव में वहां ‘सिख्या क्रांति’ का वादा किया था.


ये चेकिंग इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पंजाब के सीएम भगवंत मान को लगता है कि जो लोग अपने बच्चों को बाहर बड़े स्कूलों में पढ़ने भेजते हैं, वो आम जनता के बच्चों के साथ एक किस्म की नाइंसाफी करते हैं. 7 अप्रैल 2025 को उन्होंने एक रैली में कहा था कि जनता के सपने तोड़ने वाले अमेरिकी या अंग्रेज लोग नहीं थे. अपने ही लोग थे, जिन्होंने अपने बच्चों को पहाड़ी कस्बों और बड़े स्कूलों में पढ़ने भेजा था. उन्होंने आम लोगों के बच्चों के लिए ऐसे स्कूल छोड़े थे, जहां न तो टॉयलेट था और न बेंच.
पंजाब चुनाव को हुए 4 साल बीत गए. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सुविधाएं तो बढ़ी हैं. राष्ट्रीय औसत के मुकाबले पंजाब के सरकारी स्कूल बेहतर हालत में हैं. इसके बावजूद सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के ही विधायक अपने सीएम के विचारों का अनुपालन नहीं कर रहे.
कितने विधायकों के बच्चे सरकारी स्कूल में जाते हैं?
इंडियन एक्सप्रेस ने इस पर विस्तार से पड़ताल की है. अखबार ने बताया कि पंजाब के कुल 117 विधायकों में सिर्फ 36 के बच्चे स्कूल जाते हैं. इनमें सबसे ज्यादा 31 विधायक आम आदमी पार्टी के हैं, जिनके बच्चे अभी स्कूल में हैं. बाकियों में 2 कांग्रेस के, एक अकाली दल के, एक बसपा के और एक निर्दलीय विधायक के बच्चे स्कूल जाते हैं.
हैरानी की बात ये है कि AAP के 31 में 30 विधायकों के बच्चे बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं. इनमें से कुछ के बच्चे पंजाब के बाहर के स्कूलों में हैं, तो कई के देश से बाहर ब्रिटेन और अमेरिका में पढ़ रहे हैं. AAP के सुखवीर सिंह मैसरखाना पंजाब के अकेले ऐसे विधायक हैं, जिनके बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूल में है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के 27 विधायकों में से 10 विधायकों के बच्चे चंडीगढ़ या पंजाब के बाहर रेजिडेंशियल स्कूलों में पढ़ते हैं. जबकि 17 विधायकों के बच्चों का एडमिशन उनके ही निर्वाचन क्षेत्र के इंग्लिश मीडियम कॉन्वेंट स्कूलों में है. AAP के दो विधायकों के बच्चे ब्रिटेन और अमेरिका में पढ़ते हैं.
इनमें से एक विधायक का कहना है कि उनकी पत्नी अमेरिकन सिटिजन हैं. पत्नी और बच्चे वहीं रहते हैं. इसलिए उनका एडमिशन भी वहीं हुआ है. दूसरे विधायक का भी यही कहना है. बस देश बदल गया है. उनकी पत्नी बच्चों के साथ लंदन में रहती हैं. इसलिए उनका बेटा वहीं के स्कूल में पढ़ता है.
लेकिन बात सिर्फ यही नहीं है कि पत्नी वहां रहती हैं. आप के विधायक ये भी मानते हैं कि सरकारी स्कूलों की दशा भी वैसी नहीं है कि उनके बच्चे वहां पढ़ें. ऐसे ही एक आप विधायक ने कहा भी कि अगर उनका बेटा भारत में होता तो भी वो उसे सरकारी स्कूल नहीं भेजते. क्योंकि ऐसे स्कूलों में अभी भी न तो सुविधाएं हैं और न ही वहां किसी तरह के मौके हैं.
अब बाकी पार्टियों की ओर चलते हैं. इस कैटेगरी में दो कांग्रेस के, एक अकाली दल, एक बीएसपी और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं. इनमें से तीन के बच्चे पंजाब के बाहर बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं. बाकी बचे दो में से एक विधायक अपने बच्चों को चंडीगढ़ के ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे हैं. दूसरे ने अपने बच्चे का दाखिला अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के एक प्राइवेट स्कूल में कराया है.
अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाते, इस पर ये नेता क्या कहते हैं?
जो विधायक आम आदमी पार्टी से नहीं हैं, उनके पास तो सरकार को ब्लेम करने का बढ़िया जवाब है. वो आरोप लगाते हैं कि पंजाब सरकार की ‘सिख्या क्रांति’ योजना सिर्फ कागजी है. सरकारी स्कूल में टीचर ही नहीं हैं. वहीं राज्य सरकार ने स्कूलों का मीडियम भी अंग्रेजी से बदलकर पंजाबी कर दिया. ऐसे हालात में वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं भेज सकते. दिलचस्प बात ये है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों की भी सोच इससे अलग नहीं है. उनके विचार अपने ही सरकार के दावों से अंतर्विरोध रखते हैं.
AAP के एक विधायक ने कहा कि सरकारी स्कूल में टीचर कम हैं. इसलिए वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं. तीन आप विधायकों ने तो बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने की वजह बताई, उनका ‘फ्रेंड सर्किल’. एक और आप विधायक कहते हैं कि सरकारी हो या प्राइवेट, दोनों स्कूलों के कोर्स सेम होते हैं लेकिन दोनों जगहों पर पढ़ने का तजुर्बा अलग-अलग होता है. दोनों ही जगहों पर मौके बराबर नहीं मिलते. वो बताते हैं कि उनकी बेटी ने विदेश में अपने स्कूल को रिप्रेजेंट किया था. ये किसी सरकारी स्कूल में पढ़ने से संभव नहीं था.
हालांकि, अपने दो बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने वाले मैसरखाना की राय थोड़ी अलग है. वो कहते हैं कि अगर वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं दिलाएंगे तो जनता को ऐसा करने के लिए कैसे मना पाएंगे.
अपनी रिपोर्ट में इंडियन एक्सप्रेस ने उन 35 विधायकों के नाम नहीं बताए हैं, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते. ताकि उनके नाबालिग बच्चों की पहचान उजागर न हो और उन्हें निशाना न बनाया जाए.
वीडियो: दुबई इंटरनेशनल हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमला, कितना नुकसान हुआ?











.webp?width=275)






