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दुकान का QR कोड स्कैन करते ही पुलिसवाले के सारे अकाउंट हुए सफाचट, APK फाइल से हुआ खेल

पुणे के सासवाड में 40 साल के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने एक बेकरी शॉप पर भुगतान करने के लिए QR कोड स्कैन किया और उसे 2.3 लाख रुपये की चपत लग गई.

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पुणे के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के दौरान अपने 2.3 लाख रुपये गंवा दिए. (तस्वीर:प्रतिकात्मक/Gork से बनाई गई है.)

क्या हो जब जनता को ठगी से बचाने में लगे लोग खुद धोखाधड़ी का शिकार होकर अपने लाखों रुपये गंवा दें? ऐसा ही कुछ हुआ है पुणे के एक पुलिस कॉन्स्टेबल के साथ. एक बेकरी की दुकान पर कथित तौर पर QR कोड स्कैन करते ही उसके अकाउंट से एक के बाद एक कई ट्रांजैक्शन हुए. इस दौरान कुल 2.3 लाख रुपये खाते से सफाचट हो गए. पुलिस ने केस दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी है.

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एक बार स्कैन करते ही आई शामत

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, घटना पुणे के सासवाड की है. यहां 40 साल के एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने एक बेकरी शॉप पर भुगतान करने के लिए QR कोड स्कैन किया था. कुछ देर बाद उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि सेविंग अकाउंट से 18,755 रुपये कट गए हैं. उसने अपना दूसरा अकाउंट चेक किया तो मालूम पड़ा कि उसके दूसरे अकाउंट से भी 12,250 रुपये निकाल लिए गए हैं. 

लेकिन पैसों को निकाले जाने का सिलसिला यहीं तक नहीं रुका. कॉन्स्टेबल के गोल्ड लोन अकाउंट से 1.9 लाख रुपये के भुगतान के लिए मोबाइल पर एक OTP यानी वन टाइम पासवर्ड आया. वो अभी तक कुछ सोच समझ पाता कि ये भुगतान भी अपनेआप हो गया. यानी 1.9 लाख रुपये गोल्ड अकाउंट से कट गए.

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जालसाजों ने पीड़ित पुलिस कॉन्स्टेबल के क्रेडिट कार्ड से भी पैसे उड़ाने के लिए पूरा इंतजाम कर लिया था. लेकिन तब तक उसको माजरा समझ आ चुका था. ऐसे में उसने अपना बैंक अकाउंट ब्लॉक करवा दिया जिससे वो और धोखाधड़ी से बच गया.

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APK फाइल के जरिए किया था हैक

पुणे के सासवाड थाने में पुलिस कॉन्स्टेबल ने अपने साथ हुई ऑनलाइन धोखाधड़ी के संबंध में मामला दर्ज कराया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने BNS यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. धोखाधड़ी के मामलों में यह धारा लगाई जाती है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर दो साल के कारावास और जुर्माने की सजा दी जाती है.

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पुलिस ने बताया कि ठगों ने APK फाइल का इस्तेमाल करके पुलिस कॉन्स्टेबल को अपना शिकार बनाया था. हर मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं होता. ऐसे में कंपनियों ने एक व्यवस्था की है जिसमें प्ले स्टोर से इतर दूसरे रास्ते से ऐप डाउनलोड होते हैं. इसको कहते हैं APK फ़ाइल, मतलब Android Package Kit. लेकिन APK फ़ाइल एक दोधारी तलवार है. कई बार इसकी मदद से हैकर भी फोन में अपना अड्डा जमा लेते हैं.

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