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"किसान, महाकुंभ और वन नेशन वन इलेक्शन..." राष्ट्रपति ने अपने संदेश में इस बार क्या-क्या कहा?

President Draupadi Murmu ने राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने किसानों, मजदूरों और संविधान की चर्चा की. उन्होंने संविधान के निर्माण में शामिल होने वाली महिलाओं को भी याद किया. और क्या-क्या कहा है राष्ट्रपति ने?

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राष्ट्रपति ने देश को संबोधित किया. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने अपने भाषण (President Draupadi Murmu Speech) में उन महिलाओं को याद किया, जो देश के संविधान के निर्माण में शामिल थीं. उन्होंने किसानों की बात की, संविधान की विशेषताओं के बारे में बताया और कहा कि भारत कभी ज्ञान का स्त्रोत हुआ करता था. उन्होंने प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले का भी जिक्र किया.

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राष्ट्रपति ने कहा,

भारत प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है, जिसे कभी ज्ञान और बुद्धि के स्रोत के रूप में जाना जाता था. 

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किसानों और मजदूरों की बात

उन्होंने भारत के संविधान, किसानों और मजदूरों के बारे में कहा,

न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा हमेशा से हमारी सभ्यतागत विरासत का हिस्सा रहे हैं. संविधान भारतीयों के रूप में हमारी सामूहिक पहचान का आधार प्रदान करता है, यह हमें एक परिवार के रूप में बांधता है. आज भी देश के कई हिस्से गरीबी और भुखमरी की स्थिति में हैं. लेकिन हमारा आत्मविश्वास कभी डगमगाया नहीं. हमने इससे उबरने के लिए अलग-अलग संकल्प लिए. हमारे किसानों ने हमारे देश को खाद्यान्न और फसलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की. हमारे मजदूरों की कड़ी मेहनत ने देश के बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है. हम वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा,

एक साहसिक, दूरदर्शी और आर्थिक ताकत के साथ, आने वाले सालों में हम अपने विकास की गति को बनाए रखेंगे. सरकार ने कल्याण की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित किया है और बुनियादी जरूरतों को हमारे अधिकार से जोड़ा है. 

"SC/ST समुदाय का विकास"

उन्होंने कहा कि देश ने SC/ST समुदायों के विकास के लिए विशेष कदम उठाए हैं. राष्ट्रपति ने आगे कहा,

हमने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विशेष योजनाएं बनाई हैं. जैसे 'धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान' और ‘प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाभियान’.

उन्होंने वन नेशन वन इलेक्शन की भी चर्चा की. राष्ट्रपति ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन योजना, शासन में निरंतरता को बढ़ावा दे सकती है और वित्तीय बोझ को कम कर सकती है.

Mahakumbh का जिक्र

राष्ट्रपति ने सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर, सुचेता कृपलानी, हंसाबेन मेहता, मालती चौधरी और 15 अन्य महिलाओं को याद किया. इन्होंने भारत के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

उन्होंने कहा कि महाकुंभ हमारी सभ्यता और विरासत की समृद्धि का प्रतीक है. 

कल यानी 26 जनवरी, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली के कर्तव्य पथ से, 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्र का नेतृत्व करेंगी.

पिछले साल का संबोधन

पिछले साल 2024 में, गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति ने कहा था कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारे देश ने लंबी दूरी तय कर ली है. उन्होंने संविधान और लोकतंत्र का जिक्र किया था. साथ ही अर्थव्यवस्था, विज्ञान, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और अन्य क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों पर बात की थी.

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