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गाजियाबाद में चलती कार में होती थी भ्रूण की लिंग जांच, इन लोगों ने अर्टिगा को 'क्लिनिक' बना डाला

गाजियाबाद पुलिस ने एक अर्टिगा कार से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य उपकरण बरामद कर भ्रूण का लिंग परीक्षण करने वाले चार लोगों के गिरोह का पर्दाफाश किया है. आरोपी हर जांच के लिए 5 से 10 हजार रुपये वसूलते थे और गर्भपात के लिए महिलाओं को अस्पताल तक भी ले जाते थे.

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चलती-फिरती सेक्स टेस्ट क्लिनिक का खुलासा. (फोटो- India Today)

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  • गाजियाबाद में चार लोगों का गिरोह अर्टिगा कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग कर भ्रूण का लिंग जांचने का अवैध सेक्स टेस्ट क्लिनिक चला रहा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया।
  • भारत में भ्रूण के लिंग जांचना 1994 के पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत गैर-कानूनी है, इसके बावजूद आरोपियों ने हर जांच के लिए 5 से 10 हजार रुपये लेकर यह सेवा दी।
  • पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से उपकरण और नगद जब्त कर न्यायालय में भारतीय दंड संहिता और पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड की मशीन. अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान स्किन पर लगाया जाने वाला जेल. बैटरी से चलने वाली बिजली व्यवस्था. गर्भ में पल रहे बच्चे (भ्रूण) का लिंग क्या है, इसकी जांच के लिए इससे ज्यादा क्या चाहिए? यही सारी व्यवस्था लेकर कुछ लोगों ने एक अर्टिगा कार के अंदर चलता-फिरता ‘सेक्स टेस्ट क्लिनिक’ बना रखा था. यह गाजियाबाद में चार लोगों का एक गिरोह था, जो पकड़े जाने से बचने के लिए अपनी लोकेशन भी बार-बार बदलता रहता था. 

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चलती कार में भ्रूण का लिंग परीक्षण

भारत में भ्रूण के लिंग की जांच करना गैर-कानूनी है और ऐसा करने वालों के लिए ठीक-ठाक सजा का प्रावधान है. लेकिन कानून को चुनौती देने वाले ‘जुगाड़ू’ लोगों से यह देश भरा पड़ा है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजियाबाद में एक अर्टिगा कार के अंदर 4 लोगों ने मिलकर भ्रूण के जेंडर टेस्ट की सारी व्यवस्था कर रखी थी. जिस दिन पुलिस ने उन्हें पकड़ा, उस दिन भी वह दो महिलाओं की जांच कर चुके थे. तीसरी महिला का इंतजार कर रहे थे, तभी पुलिस ने छापा मार दिया.

एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि पुलिस को किसी मुखबिर ने सूचना दी थी कि अर्टिगा कार में भ्रूण का सेक्स बताने वाली अवैध जांच चल रही है. इसके बाद एक ‘PCPNDT टीम’ का गठन किया गया. पीसी-पीएनडीटी एक्ट 1994 भारत का एक कानून है. यह गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच और गर्भपात पर रोक लगाता है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई, पेनल्टी, जेल और मेडिकल लाइसेंस रद्द होने तक की सजा हो सकती है. 

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अर्टिगा कार में अवैध लिंग जांच की खबर मिलने के बाद एसडीएम ने पीसी-पीएनडीटी टीम का गठन किया. इसके बाद अधिकारियों की संयुक्त टीम ने रविवार तड़के महामाया स्टेडियम के पास जाल बिछाया और अर्टिगा कार को रोककर उसकी तलाशी ली. एसीपी उपासना के मुताबिक, टीम को कार के अंदर एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन और अल्ट्रासाउंड के दौरान स्किन पर लगाई जाने वाली प्रोब जेल मिली. इसके अलावा, कार में ही गाड़ी की बैटरी से बिजली का सिस्टम बनाकर मशीन चलाने की व्यवस्था भी की गई थी. 

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आरोपी कौन-कौन?

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ये सारी चीजें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लीं. मामले के चार आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया. इनमें बागपत के रहने वाले 38 साल के संदीप कुमार, बुलंदशहर के रहने वाले 48 साल के तस्लीम उर्फ साहिल राणा, हापुड़ के 26 वर्षीय सलमान और गाजियाबाद के 46 वर्षीय शाहिद अहमद शामिल हैं. आरोपियों के पास से पुलिस को 20 हजार रुपये भी मिले हैं. 

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों से पूछताछ की तो उनका सारा प्लान खुला. आरोपी सलमान ने माना कि वह अल्ट्रासाउंड टेस्ट करता था. वहीं, तस्लीम और शाहिद उन गर्भवती महिलाओं को कनेक्ट करने का काम करते थे, जिन्हें अपने भ्रूण का जेंडर जानना होता था. संदीप ऐसी महिलाओं को उस अस्पताल तक ले जाता था, जहां पर अवैध गर्भपात कराया जाता था. जांच में पता चला कि आरोपी हर जांच के लिए 5 से 10 हजार रुपये की वसूली करते थे. 

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और धारा 319 (किसी और का रूप धारण कर धोखाधड़ी) के साथ-साथ पीसीपीएनडीटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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